भास्कर न्यूज | कटिहार टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सोमवार को जिले में प्राइवेट आयुष चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य संभावित टीबी रोगियों की समय पर पहचान, उचित रेफरल प्रक्रिया तथा राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम में आयुष चिकित्सकों की सक्रिय सहभागिता को सशक्त बनाना रहा। कार्यशाला का आयोजन जिला यक्ष्मा केंद्र एवं एचएलएफपीपीटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिले के बड़ी संख्या में आयुष चिकित्सकों के साथ-साथ एसटीएस, एसटीएलएस एवं एलटीके ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा टीबी के लक्षणों, जांच प्रक्रिया और उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. अशफाक नजीर बट्ट ने टीबी के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी हो, जिसमें बलगम या कभी-कभी खून आना, शाम के समय हल्का बुखार, रात में पसीना आना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, भूख न लगना, सांस लेते या खांसते समय सीने में दर्द तथा लगातार कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें जांच करानी चाहिए। एचएलएफपीपीटी के राज्य समन्वयक आकाश कुमार ने जानकारी दी कि अब प्रत्येक टीबी मरीज के सैंपल ट्यूब पर एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस अवसर पर आयुष एंगेजमेंट ऑफिसर सुजित कुमार, कमलेश कुमार (रीजनल मैनेजर, डब्ल्यूएचपी), प्रकाश चंद्र प्रकाश, संजय कुमार, योगेन्द्र प्रसाद पाल तथा ओआरडब्ल्यू अशोक पासवान सहित अन्य थे। भास्कर न्यूज | कटिहार टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सोमवार को जिले में प्राइवेट आयुष चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य संभावित टीबी रोगियों की समय पर पहचान, उचित रेफरल प्रक्रिया तथा राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम में आयुष चिकित्सकों की सक्रिय सहभागिता को सशक्त बनाना रहा। कार्यशाला का आयोजन जिला यक्ष्मा केंद्र एवं एचएलएफपीपीटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिले के बड़ी संख्या में आयुष चिकित्सकों के साथ-साथ एसटीएस, एसटीएलएस एवं एलटीके ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा टीबी के लक्षणों, जांच प्रक्रिया और उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. अशफाक नजीर बट्ट ने टीबी के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी हो, जिसमें बलगम या कभी-कभी खून आना, शाम के समय हल्का बुखार, रात में पसीना आना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, भूख न लगना, सांस लेते या खांसते समय सीने में दर्द तथा लगातार कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें जांच करानी चाहिए। एचएलएफपीपीटी के राज्य समन्वयक आकाश कुमार ने जानकारी दी कि अब प्रत्येक टीबी मरीज के सैंपल ट्यूब पर एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस अवसर पर आयुष एंगेजमेंट ऑफिसर सुजित कुमार, कमलेश कुमार (रीजनल मैनेजर, डब्ल्यूएचपी), प्रकाश चंद्र प्रकाश, संजय कुमार, योगेन्द्र प्रसाद पाल तथा ओआरडब्ल्यू अशोक पासवान सहित अन्य थे।


