शब-ए-कद्र आज, इबादत और तकदीर के फैसले की मुक़द्दस रात:मस्जिदों में अमन और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए होंगी खास दुआएं

शब-ए-कद्र आज, इबादत और तकदीर के फैसले की मुक़द्दस रात:मस्जिदों में अमन और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए होंगी खास दुआएं

रमजान की सबसे मुकद्दस रातों में शुमार शब-ए-कद्र आज मनाई जा रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने इसे इबादत के ऐतबार से बेहद खास और खुसूसी रात बताया है। उन्होंने कहा कि आज की रात अल्लाह रब्बुल इज्जत इंसान की जिदंगी, रिज्क और मौत से जुड़े तमाम लेखा-जोखा का फैसला फरमाते हैं। शमशुल हसन ने बताया कि कमेटी पिछले दो दिनों से इस रात को लेकर फिक्रमंद थी, क्योंकि शब-ए-कद्र का महत्व बेहद बड़ा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रात नहीं, बल्कि इंसान की तकदीर से जुड़ी रात है, इसलिए इसे पूरी तरह इबादत में गुजारना चाहिए। सड़क पर तेज़ रफ्तार से बचने की अपील
उन्होंने शहर, प्रदेश और देश के लोगों को शब-ए-कद्र की मुबारकबाद देते हुए खास अपील की। कहा कि रात को बेवजह सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाने से बचें। परिवार के लोग अपने बच्चों और युवाओं को ताकीद करें कि यह रात गाड़ी भगाने के लिए नहीं, बल्कि इबादत के लिए है,” उन्होंने कहा। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी सभी धर्मों—हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई—के लिए काम करती है। उन्होंने तमाम मस्जिदों, मदरसों और चौराहों पर लगने वाले मंचों से अपील की कि शब-ए-क़द्र की रात नमाज़, इबादत और दुआओं का पूरा एहतेमाम किया जाए। शब-ए-कद्र की रात को लेकर मस्जिदों में विशेष नमाज़ और इबादत का सिलसिला देर रात तक जारी रहेगा। मंगलवा की रात होगी इबादत
शब-ए-बारात आज रात को मनाई जाएगी। इस निस्फ शाबान या मध्य शाबान भी कहा जाता है। यह रमजान के पवित्र महीने के शुरू होने से तकरीबन 15 दिन पहले मनाई जाती है। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शाबान माह की पंद्रहवी रात को शब-ए-बारात आती है। शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बारात से मिलकर बना है। शब का अर्थ है रात। बारात का अर्थ बरी या मुक्ति। मुसलमानों के लिए यह रात इबादत के लिहाज से बहुत अहम होती है। ऐसे माना जाता है कि इस पवित्र रात में अगले साल के लिए सभी मनुष्यों की किस्मत तय की जाती है। इस दिन मुसलमान अपने घरों में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। इस दिन ज्यादातर घरों में हलवे से चीजें बनाई जाती हैं जिसे इबादत के बाद गरीबों में बांट दिया जाता है। इस रात इबादत का महत्व
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि शब-ए-बारात को अल्लाह अपने बंदों पर बेहद मेहरबान होता है और वो इस रात इबादत करने वालों को माफ कर देता है। इस दिन मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। यही वजह है कि इसे मोक्ष की रात भी कहा जाता है। शब-ए-बारात को सारी रात इबादत और कुरान की तिलावत की जाती है। इस रात लोग अपने उन परिजनों के लिए भी दुआएं मांगते हैं जो दुनिया को अलविदा कह चुके है। लोग इस रात अपने करीब के कब्रिस्तानों में जियारत के लिए भी जाते हैं।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *