सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वाले युवाओं के सपनों का सौदा करने वाले एक शातिर ठग का पर्दाफाश हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह ठग कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि खुद चिकित्सा विभाग में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी है। झुंझुनूं के सबसे बड़े बीडीके (BDK) अस्पताल में सहायक रेडियोग्राफर के पद पर तैनात सोनू कुमार मीणा ने भरतपुर कलेक्टर और चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर 15 युवाओं से करीब 20 लाख रुपए डकार लिए। झुंझुनूं में नौकरी, भरतपुर में ‘जालसाजी’ का धंधा आरोपी सोनू कुमार मीणा, जो मूल रूप से अलवर के सलीमपुर खुर्द (भूसावर) का निवासी है, वर्तमान में झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में बतौर सहायक रेडियोग्राफर प्रोबेशन पीरियड पर चल रहा है। अपनी सरकारी रसूख का फायदा उठाकर उसने बेरोजगार युवाओं को संविदा पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसने न केवल युवाओं को भरोसा दिलाया, बल्कि विभाग के निदेशक राकेश कुमार शर्मा और भरतपुर कलेक्टर कमर उल जमान चौधरी के फर्जी हस्ताक्षर कर नोकरी देने के लिए चिकित्सा विभाग में PMO और CMHO के नाम लेटर जारी कर दिए। कैसे बुना ठगी का जाल? फर्जी आदेश की शुरुआत 9 अक्टूबर 2025 को आरोपी ने चिकित्सा निदेशक के नाम से सीएमएचओ और पीएमओ को एक फर्जी पत्र जारी किया। इसके बाद उसने कलेक्टर के नाम से आदेश निकालकर युवाओं को जॉइनिंग के लिए भेजा। जब ठगी के शिकार युवक नियुक्ति पत्र लेकर संबंधित संस्थानों में पहुंचे, तो वहां वैकेंसी होने से इनकार कर दिया गया। जांच में पता चला कि उनके हाथ में मौजूद लेटर रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं थे। आरोपी ने हर पीड़ित से डेढ़ से दो लाख रुपए वसूले सुनील कुमार (कुम्हेर): 1.5 लाख रुपए लोकेंद्र सिंह (इकरन): 2 लाख रुपए हेमंत सैनी (बयाना): 2 लाख रुपए जयसिंह, प्रिया, यशपाल, हरिओम, नवीन: प्रत्येक से 1.5 लाख रुपए उमेश कुमार (दौसा): 1 लाख रुपए कलेक्टर के सामने खुली पोल, थाने पहुंची फाइल सोमवार को ठगी के शिकार युवा जब कलेक्ट्रेट पहुंचे और भरतपुर कलेक्टर कमर उल जमान चौधरी को अपने ‘नियुक्ति पत्र’ दिखाए, तो कलेक्टर भी दंग रह गए। उन्होंने तुरंत इन पत्रों को फर्जी करार दिया। पीड़ितों ने बताया कि सोनू मीणा उन्हें 15 दिन में नौकरी का झांसा देकर लगातार टरका रहा था। अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट भरतपुर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है।


