सीवान उर्दू भाषा कोषांग, समाहरणालय सीवान के तत्वावधान में शनिवार को टाउन हॉल सीवान में फरोग़-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा एवं कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी सीवान विवेक रंजन मैत्रेय एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने उद्बोधन में जिला पदाधिकारी ने उर्दू भाषा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है। उन्होंने दाग देहलवी का शेर पढ़ते हुए कहा— “उर्दू है जिसका नाम हमीं जानते हैं दाग, सारे जहां में धूम हमारी जबां की है।” ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसा नारा उर्दू में दिया गया डीएम ने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म या क्षेत्र की भाषा नहीं है, बल्कि यह संस्कृत, हिंदी और कई अन्य भाषाओं के शब्दों के सुंदर संगम से बनी है। भारत की आजादी की लड़ाई में उर्दू भाषा का अहम योगदान रहा है। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसा नारा उर्दू में ही दिया गया, जिसने देशवासियों में देशभक्ति की भावना को प्रबल किया। उन्होंने बताया कि उर्दू की पैदाइश हिंदुस्तान में हुई और आज दुनिया के 30 से अधिक देशों में यह बोली जाती है। विश्व में उर्दू बोलने वालों की संख्या 230 मिलियन से अधिक है और यह दुनिया की दस सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। बिहार में वर्ष 1981 में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा मिला, और इसके विकास व प्रचार-प्रसार के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। कार्यक्रम के दौरान जिला उर्दू नामा का विमोचन भी मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। अपनी शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया “उर्दू जुबान का फरोग” विषय पर मरियम फातिमा, नाजिया परवीन, सफूरा सिद्दीकी, सूफिया सिद्दीकी एवं मुस्कान ने अपने विचार रखे। वहीं “मुश्तरफा का तहजीब और उर्दू जुबान” विषय पर डॉ. इम्तियाज सरमद, डॉ. शमसुल आरफिन एवं डॉ. जफरुल इस्लाम ने सारगर्भित वक्तव्य दिए। “उर्दू की तदरीस, मसाएल और इमकानात” विषय पर डॉ. जफर कमाली, डॉ. तारिक हसनैन एवं डॉ. जैनब नाज ने विचार साझा किए। द्वितीय सत्र में आयोजित मुशायरे में कमर सिवानी, जफर कमाली, फैज अली फैज फैजी, जाहिद सिवानी, सोहैल पैगंबरपुरी, डॉ. नीलम श्रीवास्तव मोइज बहमनबरवी, मुश्ताक सिवानी, बिपिन कुमार शरर एवं तृप्ति रक्षा ने अपनी शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संपूर्ण कार्यक्रम अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र कुमार यादव की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सीवान उर्दू भाषा कोषांग, समाहरणालय सीवान के तत्वावधान में शनिवार को टाउन हॉल सीवान में फरोग़-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा एवं कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी सीवान विवेक रंजन मैत्रेय एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने उद्बोधन में जिला पदाधिकारी ने उर्दू भाषा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है। उन्होंने दाग देहलवी का शेर पढ़ते हुए कहा— “उर्दू है जिसका नाम हमीं जानते हैं दाग, सारे जहां में धूम हमारी जबां की है।” ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसा नारा उर्दू में दिया गया डीएम ने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म या क्षेत्र की भाषा नहीं है, बल्कि यह संस्कृत, हिंदी और कई अन्य भाषाओं के शब्दों के सुंदर संगम से बनी है। भारत की आजादी की लड़ाई में उर्दू भाषा का अहम योगदान रहा है। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसा नारा उर्दू में ही दिया गया, जिसने देशवासियों में देशभक्ति की भावना को प्रबल किया। उन्होंने बताया कि उर्दू की पैदाइश हिंदुस्तान में हुई और आज दुनिया के 30 से अधिक देशों में यह बोली जाती है। विश्व में उर्दू बोलने वालों की संख्या 230 मिलियन से अधिक है और यह दुनिया की दस सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। बिहार में वर्ष 1981 में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा मिला, और इसके विकास व प्रचार-प्रसार के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। कार्यक्रम के दौरान जिला उर्दू नामा का विमोचन भी मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। अपनी शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया “उर्दू जुबान का फरोग” विषय पर मरियम फातिमा, नाजिया परवीन, सफूरा सिद्दीकी, सूफिया सिद्दीकी एवं मुस्कान ने अपने विचार रखे। वहीं “मुश्तरफा का तहजीब और उर्दू जुबान” विषय पर डॉ. इम्तियाज सरमद, डॉ. शमसुल आरफिन एवं डॉ. जफरुल इस्लाम ने सारगर्भित वक्तव्य दिए। “उर्दू की तदरीस, मसाएल और इमकानात” विषय पर डॉ. जफर कमाली, डॉ. तारिक हसनैन एवं डॉ. जैनब नाज ने विचार साझा किए। द्वितीय सत्र में आयोजित मुशायरे में कमर सिवानी, जफर कमाली, फैज अली फैज फैजी, जाहिद सिवानी, सोहैल पैगंबरपुरी, डॉ. नीलम श्रीवास्तव मोइज बहमनबरवी, मुश्ताक सिवानी, बिपिन कुमार शरर एवं तृप्ति रक्षा ने अपनी शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संपूर्ण कार्यक्रम अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र कुमार यादव की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


