16 बच्चों को फैक्ट्री में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे 6 तस्कर गिरफ्तार

16 बच्चों को फैक्ट्री में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे 6 तस्कर गिरफ्तार

पटना जंक्शन पर पुलिस ने 16 बाल मजदूरों को तस्करों से मुक्त कराया। साथ ही छह तस्करों को गिरफ्तार किया। तस्करों में मधेपुरा के अमलेश ऋषिदेव, अमित कुमार, अर्जुन यादव, रतन दास, सारण का लोरिक राय और मोतिहारी का ओम प्रकाश शामिल है। बाल मजदूरों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है। अधिकतर मधेपुरा और मोतिहारी के ही हैं। तीन बच्चे बंगाल के हैं। तस्करों के खिलाफ रेल थाने में केस दर्ज किया गया और पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। बंगाल पुलिस को भी जानकारी दी गई है। बच्चों को चिल्ड्रन वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया गया। इन बच्चों को तमिलनाडु, केरल और आंध्रप्रदेश लेकर जा रहे थे। तस्करों के तीन ग्रुप इन बच्चों को लेकर पटना जंक्शन पहुंचे थे। एर्नाकुलम एक्सप्रेस से बच्चों को ले जाते। इससे पहले एसोसिएशन फॉर वॉलेंटियरी एक्शन की टीम को इसकी जानकारी मिली। टीम ने आरपीएफ को सूचना दी और सभी की गिरफ्तारी हुई। तस्करों ने पुलिस को बताया कि इन बच्चों को दाना फैक्ट्री, कपड़ा फैक्ट्री, पेट्रोल पंप सहित अन्य जगहों पर काम में लगाया जाता। कोसी इलाके में बाल तस्करों का बड़ा गिरोह सक्रिय है। ये गरीब परिवारों को टारगेट करते हैं। बरामद बच्चों के माता-पिता ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। तस्करों ने 2 हजार से 4 हजार रुपए दिए और कहा कि हर महीने 12 हजार से 20 हजार मिलेंगे। सभी बच्चों को पुलिस ने चिल्ड्रन वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया है। उनके अभिभावकों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है। पटना जंक्शन पर पुलिस ने 16 बाल मजदूरों को तस्करों से मुक्त कराया। साथ ही छह तस्करों को गिरफ्तार किया। तस्करों में मधेपुरा के अमलेश ऋषिदेव, अमित कुमार, अर्जुन यादव, रतन दास, सारण का लोरिक राय और मोतिहारी का ओम प्रकाश शामिल है। बाल मजदूरों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है। अधिकतर मधेपुरा और मोतिहारी के ही हैं। तीन बच्चे बंगाल के हैं। तस्करों के खिलाफ रेल थाने में केस दर्ज किया गया और पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। बंगाल पुलिस को भी जानकारी दी गई है। बच्चों को चिल्ड्रन वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया गया। इन बच्चों को तमिलनाडु, केरल और आंध्रप्रदेश लेकर जा रहे थे। तस्करों के तीन ग्रुप इन बच्चों को लेकर पटना जंक्शन पहुंचे थे। एर्नाकुलम एक्सप्रेस से बच्चों को ले जाते। इससे पहले एसोसिएशन फॉर वॉलेंटियरी एक्शन की टीम को इसकी जानकारी मिली। टीम ने आरपीएफ को सूचना दी और सभी की गिरफ्तारी हुई। तस्करों ने पुलिस को बताया कि इन बच्चों को दाना फैक्ट्री, कपड़ा फैक्ट्री, पेट्रोल पंप सहित अन्य जगहों पर काम में लगाया जाता। कोसी इलाके में बाल तस्करों का बड़ा गिरोह सक्रिय है। ये गरीब परिवारों को टारगेट करते हैं। बरामद बच्चों के माता-पिता ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। तस्करों ने 2 हजार से 4 हजार रुपए दिए और कहा कि हर महीने 12 हजार से 20 हजार मिलेंगे। सभी बच्चों को पुलिस ने चिल्ड्रन वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया है। उनके अभिभावकों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है।  

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