580 मीटर जमीन के कारण 14.52 किलोमीटर लंबे शेरपुर-दिघवारा 6 लेन ब्रिज समय से पूरा नहीं हो पाएगा। गंगा नदी पर बन रहे इस ब्रिज के एलाइनमेंट पर आने वाले 47 भवनों में से 24 ही अब तक हटाए गए हैं। 48 महीने (सितंबर 2023- सितंबर 2027) में चालू करने की अवधि में से 29 माह बीत गए पर मात्र 15% काम ही अब तक हो पाया है। हालात से परेशान केन्द्रीय एजेंसी एनएचएआई ने राज्य प्रशासन से कड़ाई से पेश आने की गुहार लगाई है। अगले 19 महीने में पुल का 85% काम पूरा नहीं होने की आशंका को देखते हुए निर्माण लागत बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी है। ब्रिज का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। सितंबर 2023 से निर्माण शुरू है। डेढ़ साल में मात्र 2.5% ही काम हुआ था। वहीं अब ढाई साल बीतने के बाद अब तक 15% काम हो सका है। यानी 12 महीने में मात्र 13% काम बढ़ा है। ऐसे में सितंबर 2027 तक निर्माण पूरा करना मुश्किल दिखने लगा है। मुआवजा मिलने को लेकर जारी है परेशानी पूरा ब्रिज 3012 करोड़ में बनाया जा रहा है। इस ब्रिज के दोनों किनारे पटना के शेरपुर और छपरा के दिघवारा के बीच काम करने में शुरू से दिक्कत हो रही है। दिघवारा की तरफ तो तीन गांव मीरपुर भुआल, सैदपुर दिघवारा और मानपुर के लोगों ने मुआवजा लेने से सामूहिक इनकार कर दिया था। रैयतों को पैसे देने के लिए शासन तैयार है पर मुआवजा बढ़ाने के मुद्दे पर शासन और रैयतों के बीच तकरार चलता रहा है। अब मामला सुलझने की उम्मीद जगी है। काफी परेशानी के बाद मस्जिद हटाई जा सकी है। अब 580 मीटर जमीन का मामला फंसा है। परियोजनाओं के देर/नहीं बनने से इस्टीमेट बढ़ने के मामले 14.52 किलोमीटर लंबे ब्रिज की तय निर्माण अवधि 48 महीने में से 29 महीने बीते, मगर काम अब तक सिर्फ 15 फीसदी ही हुआ .जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) 48 की जगह 138 महीने में दीघा से दीदारगंज गंगा पथ चालू हो सका है। दीघा साइड से 12.5 किलोमीटर हिस्सा तो 10 साल में बन पाया है। 3390 करोड़ खर्च हो रहे थे पर देरी होने से लागत 3831 करोड़ पर पहुंच गई। .बख्तियारपुर-ताजपुर ग्रीनफील्ड गंगा पुल 2011 से बन रहा। 14 साल से निर्माण हो रहा। 65% बन पाया है। कई बार पूरा करने की अवधि बढ़ी। नवंबर 2011 में निर्माण शुरु हुआ तो लागत 1603 करोड़ थी। पहले 2875 करोड़ और अब 3923 करोड़ हो गई है। फायदा क्या… पटना से उत्तर बिहार जाना-आना आसान होगा। पटना शहर के दीघा सेतु और आरा-छपरा के बीच बने वीर कुंवर सिंह सेतु पर ट्रैफिक लोड कम होगा। पटना से छपरा की दूरी 60 किलोमीटर की जगह आधी रह जाएगी। उत्तर बिहार से आने वाली गाड़ियां शहर के बाहर ही बाहर दक्षिण बिहार के चारों तरफ चली जाएंगी। 580 मीटर जमीन के कारण 14.52 किलोमीटर लंबे शेरपुर-दिघवारा 6 लेन ब्रिज समय से पूरा नहीं हो पाएगा। गंगा नदी पर बन रहे इस ब्रिज के एलाइनमेंट पर आने वाले 47 भवनों में से 24 ही अब तक हटाए गए हैं। 48 महीने (सितंबर 2023- सितंबर 2027) में चालू करने की अवधि में से 29 माह बीत गए पर मात्र 15% काम ही अब तक हो पाया है। हालात से परेशान केन्द्रीय एजेंसी एनएचएआई ने राज्य प्रशासन से कड़ाई से पेश आने की गुहार लगाई है। अगले 19 महीने में पुल का 85% काम पूरा नहीं होने की आशंका को देखते हुए निर्माण लागत बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी है। ब्रिज का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। सितंबर 2023 से निर्माण शुरू है। डेढ़ साल में मात्र 2.5% ही काम हुआ था। वहीं अब ढाई साल बीतने के बाद अब तक 15% काम हो सका है। यानी 12 महीने में मात्र 13% काम बढ़ा है। ऐसे में सितंबर 2027 तक निर्माण पूरा करना मुश्किल दिखने लगा है। मुआवजा मिलने को लेकर जारी है परेशानी पूरा ब्रिज 3012 करोड़ में बनाया जा रहा है। इस ब्रिज के दोनों किनारे पटना के शेरपुर और छपरा के दिघवारा के बीच काम करने में शुरू से दिक्कत हो रही है। दिघवारा की तरफ तो तीन गांव मीरपुर भुआल, सैदपुर दिघवारा और मानपुर के लोगों ने मुआवजा लेने से सामूहिक इनकार कर दिया था। रैयतों को पैसे देने के लिए शासन तैयार है पर मुआवजा बढ़ाने के मुद्दे पर शासन और रैयतों के बीच तकरार चलता रहा है। अब मामला सुलझने की उम्मीद जगी है। काफी परेशानी के बाद मस्जिद हटाई जा सकी है। अब 580 मीटर जमीन का मामला फंसा है। परियोजनाओं के देर/नहीं बनने से इस्टीमेट बढ़ने के मामले 14.52 किलोमीटर लंबे ब्रिज की तय निर्माण अवधि 48 महीने में से 29 महीने बीते, मगर काम अब तक सिर्फ 15 फीसदी ही हुआ .जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) 48 की जगह 138 महीने में दीघा से दीदारगंज गंगा पथ चालू हो सका है। दीघा साइड से 12.5 किलोमीटर हिस्सा तो 10 साल में बन पाया है। 3390 करोड़ खर्च हो रहे थे पर देरी होने से लागत 3831 करोड़ पर पहुंच गई। .बख्तियारपुर-ताजपुर ग्रीनफील्ड गंगा पुल 2011 से बन रहा। 14 साल से निर्माण हो रहा। 65% बन पाया है। कई बार पूरा करने की अवधि बढ़ी। नवंबर 2011 में निर्माण शुरु हुआ तो लागत 1603 करोड़ थी। पहले 2875 करोड़ और अब 3923 करोड़ हो गई है। फायदा क्या… पटना से उत्तर बिहार जाना-आना आसान होगा। पटना शहर के दीघा सेतु और आरा-छपरा के बीच बने वीर कुंवर सिंह सेतु पर ट्रैफिक लोड कम होगा। पटना से छपरा की दूरी 60 किलोमीटर की जगह आधी रह जाएगी। उत्तर बिहार से आने वाली गाड़ियां शहर के बाहर ही बाहर दक्षिण बिहार के चारों तरफ चली जाएंगी।


