अररिया में मजदूरों ने निकाली ‘मनरेगा शव यात्रा’:महात्मा गांधी के पुण्यतिथि पर केंद्र सरकार के खिलाफ जताया विरोध

अररिया में मजदूरों ने निकाली ‘मनरेगा शव यात्रा’:महात्मा गांधी के पुण्यतिथि पर केंद्र सरकार के खिलाफ जताया विरोध

अररिया में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि, 30 जनवरी को जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों ने अररिया जिले के दर्जनों गांवों में “मनरेगा शव यात्रा” निकालकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कथित खात्मे के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह यात्रा गांधीजी के नाम से जुड़ी मनरेगा योजना के कथित अंत के विरोध का प्रतीक बनी। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान “मनरेगा बचाओ, मजदूर बचाओ”, “वी बी ग्राम जी जुमला है” और “मजदूरों पर हमला है” जैसे नारे लगाए। यह अनोखी यात्रा स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई और ग्रामीणों में योजना के प्रति जागरूकता फैलाई। यात्रा निकालकर मजदूरों को इसकी जानकारी दे रहे रानीगंज थाना क्षेत्र के खरहट पंचायत के मजदूर ब्रह्मानंद ऋषिदेव ने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “आज ही के दिन गांधीजी को गोली मारी गई थी, इसलिए हम मनरेगा के ‘शव’ की यात्रा निकालकर मजदूरों को इसकी जानकारी दे रहे हैं।” संगठन के सचिव आशीष रंजन ने आरोप लगाया कि सरकार यह भ्रम फैला रही है कि अब 100 की जगह 125 दिन काम मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया, “जब 50 दिन का काम भी नहीं दिया जा रहा, तो 125 दिन कैसे संभव है?” 40% वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया गया रंजन ने आगे कहा कि मनरेगा को खत्म कर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी नामक नया कानून लाया गया है, जो महज एक जुमला है। उनके अनुसार, नए कानून में काम के अधिकार को कुचलकर आपूर्ति आधारित स्कीम लागू की जा रही है, जिससे काम मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि योजना का 40% वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है। बिहार जैसे गरीब राज्य को पहले से 4-5 गुना अधिक खर्च करना होगा, जो असंभव है और इससे काम बहुत कम मिलेगा। मनरेगा में मजदूरी का पूरा पैसा और कुल खर्च का 90% केंद्र सरकार देती थी। ”नए कानून में खेती के सीजन में 60 दिनों की तालाबंदी” रामपुर कोदरकट्टी गांव की मजदूर मांडवी देवी ने जानकारी दी कि पहले बजट ग्राम सभा से पारित होकर मांग के आधार पर तय होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार राज्य का बजट तय करेगी और पंचायत स्तर पर काम भी निर्धारित करेगी। पलासी प्रखंड के भीखा पंचायत के दिलीप मंडल ने कहा, “नए कानून में खेती के सीजन में 60 दिनों की तालाबंदी है, कोई काम नहीं चलेगा। इससे मजदूर सस्ते दाम में जमींदारों और कंपनियों के लिए मजबूरन काम करेंगे। यह गुलामी की ओर धकेलना है। यात्रा के आयोजन में तन्मय, आशीष रंजन, ब्रह्मानंद ऋषिदेव, पवन राम, ज्योति कुमारी, मो. अयूब, बेचन, गुलबदन और रंजय पासवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह विरोध मनरेगा के हालिया बदलावों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष का हिस्सा है। अररिया में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि, 30 जनवरी को जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों ने अररिया जिले के दर्जनों गांवों में “मनरेगा शव यात्रा” निकालकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कथित खात्मे के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह यात्रा गांधीजी के नाम से जुड़ी मनरेगा योजना के कथित अंत के विरोध का प्रतीक बनी। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान “मनरेगा बचाओ, मजदूर बचाओ”, “वी बी ग्राम जी जुमला है” और “मजदूरों पर हमला है” जैसे नारे लगाए। यह अनोखी यात्रा स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई और ग्रामीणों में योजना के प्रति जागरूकता फैलाई। यात्रा निकालकर मजदूरों को इसकी जानकारी दे रहे रानीगंज थाना क्षेत्र के खरहट पंचायत के मजदूर ब्रह्मानंद ऋषिदेव ने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “आज ही के दिन गांधीजी को गोली मारी गई थी, इसलिए हम मनरेगा के ‘शव’ की यात्रा निकालकर मजदूरों को इसकी जानकारी दे रहे हैं।” संगठन के सचिव आशीष रंजन ने आरोप लगाया कि सरकार यह भ्रम फैला रही है कि अब 100 की जगह 125 दिन काम मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया, “जब 50 दिन का काम भी नहीं दिया जा रहा, तो 125 दिन कैसे संभव है?” 40% वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया गया रंजन ने आगे कहा कि मनरेगा को खत्म कर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी नामक नया कानून लाया गया है, जो महज एक जुमला है। उनके अनुसार, नए कानून में काम के अधिकार को कुचलकर आपूर्ति आधारित स्कीम लागू की जा रही है, जिससे काम मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि योजना का 40% वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है। बिहार जैसे गरीब राज्य को पहले से 4-5 गुना अधिक खर्च करना होगा, जो असंभव है और इससे काम बहुत कम मिलेगा। मनरेगा में मजदूरी का पूरा पैसा और कुल खर्च का 90% केंद्र सरकार देती थी। ”नए कानून में खेती के सीजन में 60 दिनों की तालाबंदी” रामपुर कोदरकट्टी गांव की मजदूर मांडवी देवी ने जानकारी दी कि पहले बजट ग्राम सभा से पारित होकर मांग के आधार पर तय होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार राज्य का बजट तय करेगी और पंचायत स्तर पर काम भी निर्धारित करेगी। पलासी प्रखंड के भीखा पंचायत के दिलीप मंडल ने कहा, “नए कानून में खेती के सीजन में 60 दिनों की तालाबंदी है, कोई काम नहीं चलेगा। इससे मजदूर सस्ते दाम में जमींदारों और कंपनियों के लिए मजबूरन काम करेंगे। यह गुलामी की ओर धकेलना है। यात्रा के आयोजन में तन्मय, आशीष रंजन, ब्रह्मानंद ऋषिदेव, पवन राम, ज्योति कुमारी, मो. अयूब, बेचन, गुलबदन और रंजय पासवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह विरोध मनरेगा के हालिया बदलावों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष का हिस्सा है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *