माघ मेला के संगम तट पर दंडी स्वामियों और साधु-संतों ने UGC अध्यादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर-तख्तियां थामे साधुओं ने कैंडल मार्च निकाला और केंद्र सरकार से बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की। सवर्णों पर खतरा, हिंदुत्व को तोड़ने की साजिश अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष दंडी स्वामी ब्रह्माआश्रम ने कहा कि यह UGC अध्यादेश सवर्णों के लिए घातक है। सवर्ण, बैकवर्ड, SC-ST के बीच भेदभाव पैदा करेगा। सवर्ण समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि अध्यादेश वापस हो और पुरानी व्यवस्था बहाल रहे। चार वर्णों की एकता पर जोर देते हुए कहा कि हम चार वर्ण हैं, इन्हें लड़ाने का काम हो रहा है। इससे हिंदुत्व और सनातन धर्म खतरे में पड़ जाएगा। अंग्रेजों-मुगलों ने भी ऐसा नहीं किया। समान कानून की बात करते हैं लेकिन एक को जेल, एक को बेल? दिल्ली में डॉक्टर को ब्लैकमेल का मामला इसका उदाहरण है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिल न लौटा तो दिल्ली तक मार्च होगा। काले कानून से छात्रों का भविष्य अंधकारमय श्यामदेवाचार्य और अन्य संतों ने मां गंगा की गोद में संकल्प लिया। संत का कहना कि संकल्प का अर्थ दृढ़ता है। चार वर्णों को तोड़कर एक वर्ग को लाभ देकर सरकार चैन से नहीं बैठ सकती।उसामान्य वर्ग के विधायक-सांसद-अधिकारी अगर नहीं उठे तो जनता मार-मारकर भगाएगी। जनता ने बनाया, जनता उतारेगी। UGC बिल को काला कानून बताते हुए संत बोले कि बिना जांच-पड़ताल के झूठा आरोप लगेगा तो छात्रों का फ्यूचर बर्बाद। उच्च शिक्षा कॉर्पोरेट्स के हाथों बिक जाएगी। संस्थानों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। शिक्षा का धार्मिक-आध्यात्मिक मूल्य नष्ट हो जाएगा। सनातन बचाना है तो जोड़ो, तोड़ो मत।


