हरियाणा के मुरथल ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ेंगी:बिना CLU के चल रहे ढाबों को पूरे करने होंगे डाक्यूमेंट; STP-CTP प्लांट लगाने होंगे

हरियाणा के मुरथल ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ेंगी:बिना CLU के चल रहे ढाबों को पूरे करने होंगे डाक्यूमेंट; STP-CTP प्लांट लगाने होंगे

हरियाणा के मुरथल ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने जीटी रोड, विशेषकर मुरथल क्षेत्र के ढाबा संचालकों से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पानी के संरक्षण एवं पुनः उपयोग (री-यूज) को सुनिश्चित करने के लिए सभी ढाबों में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) एवं सीटीपी (कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना अनिवार्य है। राव नरबीर सिंह आज विधायक देवेंद्र कादियान के नेतृत्व में आए मुरथल के ढाबा मालिकों के साथ बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बिना CLU के चल रहे ढाबों के लिए अलग निर्देश बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जो ढाबा संचालक बिना सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) के ढाबा चला रहे हैं, उन्हें नगर निगम से संबंधित टैक्स एवं अन्य वैधानिक शुल्क से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण करने होंगे। वहीं, जिन ढाबों के पास सीएलयू स्वीकृत है, उन्हें भी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई एवं जुर्माना लगाया जाएगा।
सभी समाधानों के दिए निर्देश
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों की सुरक्षा और कानून के तहत सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव योगेश कुमार को निर्देश दिए कि इस विषय में बोर्ड के चेयरमैन से शीघ्र बातचीत कर समग्र समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
जुर्मान को लेकर परेशान दिखे ढाबा संचालक
बैठक के दौरान मंत्री को यह भी अवगत कराया गया कि एनजीटी एवं अन्य संबंधित संस्थानों द्वारा निरीक्षण के दौरान जब किसी ढाबे के विरुद्ध क्लोजर आदेश जारी किया जाता है, तो ढाबे के निर्माण की तिथि से लेकर निरीक्षण की तिथि तक की अवधि के आधार पर जुर्माने की गणना की जाती है। इस पर मंत्री ने कहा कि सभी संचालक समय रहते नियमों का पालन करें ताकि किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके।

उन्होंने ढाबा संचालकों से अपील की कि वे स्वेच्छा से पर्यावरण हितैषी उपाय अपनाएं और सरकार व प्रशासन का सहयोग करें, ताकि मुरथल क्षेत्र को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।

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