पूर्णिया के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माता कामाख्या स्थान में ठाढी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव के.नगर प्रखंड के माजरा पंचायत के भवानीपुर गांव स्थित शक्तिपीठ माता कामाख्या स्थान में किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालु उमड़े। महोत्सव हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को आयोजित होता है और इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने का लंबे समय से चल रहा परंपरा है। तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय से हुई। इसके बाद शनिवार को व्रती खरना करते हैं। ठाढी महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धालु निर्जला उपवास रखते हुए माता कामाख्या और भगवान हरि की पूजा-अर्चना करने पहुंचे। इस दौरान भक्त अपने सिर पर धूपची, हाथ में झालर और खोइंछा में फल-फूल लेकर माता के दरबार की परिक्रमा की। सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और यातायात के पुख्ता इंतजाम थे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी ने सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस और स्वयंसेवक मंदिर के विभिन्न हिस्सों में तैनात हैं ताकि किसी भक्त को कोई परेशानी न हो। मां कामाख्या मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। असम के कामरूप कामाख्या से माता स्वयं अपने भक्तों की पुकार पर यहां आई थीं। मंदिर में माथा टेकने से असाध्य रोग, खासकर कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है, ऐसी श्रद्धा लोगों के बीच है। इसलिए दूर-दराज से लोग माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। ठाढ़ी व्रत महोत्सव क्षेत्र की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा ठाढ़ी व्रत महोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर में जयकारों और जय माता दी, हरि बोल के नारे गूंज रहे हैं। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ अपनी मनोकामनाओं की प्रार्थना कर रहे हैं। मंदिर में माता के विशेष दर्शन के लिए लोग सुबह से ही लाइन में खड़े हैं। मंदिर कमेटी के सदस्य भोला यादव ने बताया, ठाढ़ी व्रत महोत्सव हमारे क्षेत्र की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा है। भक्त इसे बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं। मेला आयोजक संतोष मिश्रा ने कहा कि इस महोत्सव में लाखों श्रद्धालु आते हैं। हमने सभी सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया है ताकि हर भक्त आसानी से दर्शन कर सके। भक्तों का उत्साह और भक्ति का माहौल पूरे मंदिर परिसर में नजर आ रहा है। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखा है बल्कि बिहार की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को भी प्रदर्शित किया है। मंदिर कमेटी सदस्य भोला यादव ने कहा कि मां कामाख्या की कृपा से हर साल लोग अपने रोग और कष्ट दूर करने यहां आते हैं। मेला आयोजक संतोष मिश्रा ने कहा कि ठाढ़ी व्रत महोत्सव हमारी पुरानी परंपरा है। श्रद्धालु इसे बड़े विश्वास के साथ मानते हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा और सुविधा पर पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि कोई भक्त परेशान न हो। पूर्णिया के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माता कामाख्या स्थान में ठाढी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव के.नगर प्रखंड के माजरा पंचायत के भवानीपुर गांव स्थित शक्तिपीठ माता कामाख्या स्थान में किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालु उमड़े। महोत्सव हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को आयोजित होता है और इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने का लंबे समय से चल रहा परंपरा है। तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय से हुई। इसके बाद शनिवार को व्रती खरना करते हैं। ठाढी महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धालु निर्जला उपवास रखते हुए माता कामाख्या और भगवान हरि की पूजा-अर्चना करने पहुंचे। इस दौरान भक्त अपने सिर पर धूपची, हाथ में झालर और खोइंछा में फल-फूल लेकर माता के दरबार की परिक्रमा की। सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और यातायात के पुख्ता इंतजाम थे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी ने सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस और स्वयंसेवक मंदिर के विभिन्न हिस्सों में तैनात हैं ताकि किसी भक्त को कोई परेशानी न हो। मां कामाख्या मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। असम के कामरूप कामाख्या से माता स्वयं अपने भक्तों की पुकार पर यहां आई थीं। मंदिर में माथा टेकने से असाध्य रोग, खासकर कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है, ऐसी श्रद्धा लोगों के बीच है। इसलिए दूर-दराज से लोग माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। ठाढ़ी व्रत महोत्सव क्षेत्र की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा ठाढ़ी व्रत महोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर में जयकारों और जय माता दी, हरि बोल के नारे गूंज रहे हैं। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ अपनी मनोकामनाओं की प्रार्थना कर रहे हैं। मंदिर में माता के विशेष दर्शन के लिए लोग सुबह से ही लाइन में खड़े हैं। मंदिर कमेटी के सदस्य भोला यादव ने बताया, ठाढ़ी व्रत महोत्सव हमारे क्षेत्र की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा है। भक्त इसे बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं। मेला आयोजक संतोष मिश्रा ने कहा कि इस महोत्सव में लाखों श्रद्धालु आते हैं। हमने सभी सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया है ताकि हर भक्त आसानी से दर्शन कर सके। भक्तों का उत्साह और भक्ति का माहौल पूरे मंदिर परिसर में नजर आ रहा है। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखा है बल्कि बिहार की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को भी प्रदर्शित किया है। मंदिर कमेटी सदस्य भोला यादव ने कहा कि मां कामाख्या की कृपा से हर साल लोग अपने रोग और कष्ट दूर करने यहां आते हैं। मेला आयोजक संतोष मिश्रा ने कहा कि ठाढ़ी व्रत महोत्सव हमारी पुरानी परंपरा है। श्रद्धालु इसे बड़े विश्वास के साथ मानते हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा और सुविधा पर पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि कोई भक्त परेशान न हो।


