पटना के होटल मौर्या में आज यानी रविवार को राजद कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी (कार्यवाहक) अध्यक्ष चुना गया। राजद नेता भोला यादव ने तेजस्वी यादव को राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को सर्टिफिकेट दिया। इसके बाद तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद और मां राबड़ी देवी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव ने अपना पहला भाषण दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि मोदी जी की शरण में नहीं जाएंगे, चाहे मर ही क्यों न जाए। साथ ही नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि चाचा जी तो पलट गए। पढ़िए तेजस्वी का सिलसिलेवार भाषण पहले देखिए राजद कार्यकारिणी की बैठक की 3 तस्वीरें… दो ही विकल्प हैं, मोदी जी के शरण में रहिए या लड़ाई लड़िए तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारे सामने दो ही विकल्प है। मोदी जी की शरण में रहिए या लड़ाई लड़िए। हमारे चाचा तो शरण में चले गए, लेकिन आदरणीय लालू जी ने आज तक अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया है। हम इतना भरोसा देते हैं कि हम लोगों को किसी के शरण में जाने की जरूरत नहीं है। हमें उनके खिलाफ लड़ना पसंद है। अब सब लोग मिलकर लड़ेंगे। सिद्दीकी साहब ने दो अच्छे गीत गाए हैं। हम होंगे कामयाब… और कल की बातें छोड़ो। तो हम सब लोग नए सिरे से काम करेंगे। एकता में ही शक्ति है। अब एक हो कर लड़ाई लड़नी है। हमको ये पसंद नहीं, तुमको वो पसंद नहीं। इस सोच से नुकसान सबका है। 2010 के चुनाव में मेरी बहुत छोटी सी भूमिका रही- तेजस्वी तेजस्वी ने आगे कहा कि 15 साल से राजनीति में सक्रिय हूं। 2010 के विधानसभा चुनाव में मेरी बहुत छोटी भूमिका रही है। उस समय लोजपा और राष्ट्रीय जनता दल का गठबंधन था। हम क्रिकेट खेला करते थे। पार्टी कार्यालय में चुनाव का माहौल था। अपने पिता का तब तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखे थे। तब पार्टी कार्यालय और मीडिया के लोगों ने चलाना शुरू कर दिया कि लालू जी ने अपने बेटे को लॉन्च किया। हालांकि, पिताजी ने केवल इंट्रोड्यूस कराया था कि मेरा बेटा यहां बैठा है, लेकिन उस दौरान चुनाव का माहौल था तो गठबंधन के प्रत्याशियों की मांग थी कि हमारे लिए तेजस्वी चुनाव प्रचार करें। इस दौरान बहुत छोटी सी भूमिका मेरी रही। अब कांटों के रास्ते से गुजरकर मुकाम तक पहुंचना है तेजस्वी ने कहा कि, मैंने विधानमंडल के नेता और विधायक दल के नेता के रूप में काम किया है, लेकिन संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं मिली। अब जो जिम्मेदारी मिली है, वह ऐसे वक्त में मिली है, जो कठिन है। कांटों का रास्ता है, अपनों को जोड़ते हुए मुकाम तक पहुंचना है। इस दौर में विचारधारा की राजनीति खत्म हो रही है। एक और जिम्मेदारी सामाजिक न्याय और धर्म निरपेक्षता की आती है, जो हम लोगों की विचारधारा है, उसको जिंदा रखना है। कर्पूरी जी का आशीर्वाद लेकर राजनीति की शुरुआत की तेजस्वी ने कहा कि हम बिहार की यात्रा पर निकले थे। इस यात्रा की शुरुआत कर्पूरी ठाकुर जी के घर से उनका आशीर्वाद लेकर किया था। साल 2012-13 में एक साजिश के तहत लालू जी को जेल भेजा गया। जब जेल भेजा गया तो राबड़ी देवी जी के नेतृत्व में हम प्रमण्डलीय स्तर पर बिहार की यात्रा पर निकले। हर एक प्रमंडल में हम लोग घूमे थे। 2020 में जनता के एजेंडे पर चुनाव लड़े और जीते 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में हम लोग जीत कर आए और सरकार भी बनाया। 2017 में लालू जी के दुश्मनों और साम्प्रदायिक शक्तियों ने जेल भेजने का काम किया। वह 2017 के बाद से उल्टा पड़ गया। मेरे परिवार पर भी एक झूठा मुकदमे का षडयंत्र शुरू हुआ। साल 2017 से लगातार लड़ते रहे। 2019 में हम लोग लड़े, एक भी सीट नहीं जीते। 2020 में हम लोग लड़े। तब जनता के एजेंडे पर चुनाव लड़े। पढ़ाई, दवाई, सिंचाई, करवाई और सुनवाई के नाम पर हमने चुनाव लड़ा और न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आए, बल्कि हम लोगों ने सरकार बना लिया। 2022 में नीतीश जी मोदी के शरण में चले गए। नीतीश जी ने हाथ जोड़कर लालू जी से माफी मांगी, फिर भी पलट गए तेजस्वी ने कहा कि लालू जी ने शुरुआती दौर में नीतीश जी को अपनाया। नीतीश जी ने सरेआम सबके सामने लालू जी और रबड़ी जी से हाथ जोड़कर माफी मांगी थी और कहा था कि अब वैसा नहीं होगा। सब लोगों ने देखा था। यह बताने की जरूरत नहीं है। हम केवल स्मरण करा रहे हैं। जो मेरा अनुभव है 15 सालों का, उसके बारे में हम बता रहे हैं। हम लोग दोबारा सत्ता में आए और लालू जी के ही इशारे पर देश के सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट किया। पटना में सभी लोगों को बुलाया और इंडिया अलायंस की हमने शुरुआत की। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले चाचा जी पलट गए। जो लोग 400 पार का नारा दिए थे, वो 240 से नीचे चले गए। अगर नीतीश जी से धोखा नहीं मिला होता तो आज शायद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते। हारे नहीं है, 1 करोड़ 90 लाख वोट मिला है राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में महागठबंधन की पार्टियां चुनाव मैदान में उतरी थी। हम लोगों को 1 करोड़ 90 लाख वोट मिले, जो आज तक राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास में नहीं मिला था। अब हमारा और लालू जी का एकमात्र लक्ष्य है। कई बार आप लोगों को बोला गया कि संगठन पर ध्यान दीजिए। संगठन को मजबूत कीजिए, निचले स्तर पर मजबूत कीजिए। क्या हम इस काम में सफल हुए? इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अब तस्वीरों में देखिए राजद कार्यकारिणी की बैठक…. पटना के होटल मौर्या में आज यानी रविवार को राजद कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी (कार्यवाहक) अध्यक्ष चुना गया। राजद नेता भोला यादव ने तेजस्वी यादव को राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को सर्टिफिकेट दिया। इसके बाद तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद और मां राबड़ी देवी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव ने अपना पहला भाषण दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि मोदी जी की शरण में नहीं जाएंगे, चाहे मर ही क्यों न जाए। साथ ही नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि चाचा जी तो पलट गए। पढ़िए तेजस्वी का सिलसिलेवार भाषण पहले देखिए राजद कार्यकारिणी की बैठक की 3 तस्वीरें… दो ही विकल्प हैं, मोदी जी के शरण में रहिए या लड़ाई लड़िए तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारे सामने दो ही विकल्प है। मोदी जी की शरण में रहिए या लड़ाई लड़िए। हमारे चाचा तो शरण में चले गए, लेकिन आदरणीय लालू जी ने आज तक अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया है। हम इतना भरोसा देते हैं कि हम लोगों को किसी के शरण में जाने की जरूरत नहीं है। हमें उनके खिलाफ लड़ना पसंद है। अब सब लोग मिलकर लड़ेंगे। सिद्दीकी साहब ने दो अच्छे गीत गाए हैं। हम होंगे कामयाब… और कल की बातें छोड़ो। तो हम सब लोग नए सिरे से काम करेंगे। एकता में ही शक्ति है। अब एक हो कर लड़ाई लड़नी है। हमको ये पसंद नहीं, तुमको वो पसंद नहीं। इस सोच से नुकसान सबका है। 2010 के चुनाव में मेरी बहुत छोटी सी भूमिका रही- तेजस्वी तेजस्वी ने आगे कहा कि 15 साल से राजनीति में सक्रिय हूं। 2010 के विधानसभा चुनाव में मेरी बहुत छोटी भूमिका रही है। उस समय लोजपा और राष्ट्रीय जनता दल का गठबंधन था। हम क्रिकेट खेला करते थे। पार्टी कार्यालय में चुनाव का माहौल था। अपने पिता का तब तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखे थे। तब पार्टी कार्यालय और मीडिया के लोगों ने चलाना शुरू कर दिया कि लालू जी ने अपने बेटे को लॉन्च किया। हालांकि, पिताजी ने केवल इंट्रोड्यूस कराया था कि मेरा बेटा यहां बैठा है, लेकिन उस दौरान चुनाव का माहौल था तो गठबंधन के प्रत्याशियों की मांग थी कि हमारे लिए तेजस्वी चुनाव प्रचार करें। इस दौरान बहुत छोटी सी भूमिका मेरी रही। अब कांटों के रास्ते से गुजरकर मुकाम तक पहुंचना है तेजस्वी ने कहा कि, मैंने विधानमंडल के नेता और विधायक दल के नेता के रूप में काम किया है, लेकिन संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं मिली। अब जो जिम्मेदारी मिली है, वह ऐसे वक्त में मिली है, जो कठिन है। कांटों का रास्ता है, अपनों को जोड़ते हुए मुकाम तक पहुंचना है। इस दौर में विचारधारा की राजनीति खत्म हो रही है। एक और जिम्मेदारी सामाजिक न्याय और धर्म निरपेक्षता की आती है, जो हम लोगों की विचारधारा है, उसको जिंदा रखना है। कर्पूरी जी का आशीर्वाद लेकर राजनीति की शुरुआत की तेजस्वी ने कहा कि हम बिहार की यात्रा पर निकले थे। इस यात्रा की शुरुआत कर्पूरी ठाकुर जी के घर से उनका आशीर्वाद लेकर किया था। साल 2012-13 में एक साजिश के तहत लालू जी को जेल भेजा गया। जब जेल भेजा गया तो राबड़ी देवी जी के नेतृत्व में हम प्रमण्डलीय स्तर पर बिहार की यात्रा पर निकले। हर एक प्रमंडल में हम लोग घूमे थे। 2020 में जनता के एजेंडे पर चुनाव लड़े और जीते 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में हम लोग जीत कर आए और सरकार भी बनाया। 2017 में लालू जी के दुश्मनों और साम्प्रदायिक शक्तियों ने जेल भेजने का काम किया। वह 2017 के बाद से उल्टा पड़ गया। मेरे परिवार पर भी एक झूठा मुकदमे का षडयंत्र शुरू हुआ। साल 2017 से लगातार लड़ते रहे। 2019 में हम लोग लड़े, एक भी सीट नहीं जीते। 2020 में हम लोग लड़े। तब जनता के एजेंडे पर चुनाव लड़े। पढ़ाई, दवाई, सिंचाई, करवाई और सुनवाई के नाम पर हमने चुनाव लड़ा और न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आए, बल्कि हम लोगों ने सरकार बना लिया। 2022 में नीतीश जी मोदी के शरण में चले गए। नीतीश जी ने हाथ जोड़कर लालू जी से माफी मांगी, फिर भी पलट गए तेजस्वी ने कहा कि लालू जी ने शुरुआती दौर में नीतीश जी को अपनाया। नीतीश जी ने सरेआम सबके सामने लालू जी और रबड़ी जी से हाथ जोड़कर माफी मांगी थी और कहा था कि अब वैसा नहीं होगा। सब लोगों ने देखा था। यह बताने की जरूरत नहीं है। हम केवल स्मरण करा रहे हैं। जो मेरा अनुभव है 15 सालों का, उसके बारे में हम बता रहे हैं। हम लोग दोबारा सत्ता में आए और लालू जी के ही इशारे पर देश के सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट किया। पटना में सभी लोगों को बुलाया और इंडिया अलायंस की हमने शुरुआत की। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले चाचा जी पलट गए। जो लोग 400 पार का नारा दिए थे, वो 240 से नीचे चले गए। अगर नीतीश जी से धोखा नहीं मिला होता तो आज शायद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते। हारे नहीं है, 1 करोड़ 90 लाख वोट मिला है राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में महागठबंधन की पार्टियां चुनाव मैदान में उतरी थी। हम लोगों को 1 करोड़ 90 लाख वोट मिले, जो आज तक राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास में नहीं मिला था। अब हमारा और लालू जी का एकमात्र लक्ष्य है। कई बार आप लोगों को बोला गया कि संगठन पर ध्यान दीजिए। संगठन को मजबूत कीजिए, निचले स्तर पर मजबूत कीजिए। क्या हम इस काम में सफल हुए? इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अब तस्वीरों में देखिए राजद कार्यकारिणी की बैठक….


