नाबालिग से रेप के मामले में चंडीगढ़ अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि पीड़िता के माता-पिता, सरकारी वकील की ओर से रखे गए पक्ष और अन्य गवाहों के बयानों में आपसी विरोध था, जबकि होटल मालिक भी आरोपी को पहचान नहीं सका। ऐसे में आरोप पूरी तरह साबित नहीं हो पाए। यह मामला जिला मोहाली के होटल से जुड़ा है। इस संबंध में पुलिस स्टेशन-39, चंडीगढ़ में एफआईआर 19 दिसंबर 2023 दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 363, 366, 376 आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया था। नहीं कर पाया वकील साबित केस में जो सबूत के तौर पर एविडेंस फाइल में लगाए थे उनपर जब कोर्ट में जब बहस हुई तो सरकारी वकील ने कहा घटना जिला मोहाली के नयागांव के होटल की चौथी मंजिल पर स्थित कमरे में हुई थी। पुलिस ने इस संबंध में साइट प्लान तैयार कर उसे अदालत के रिकॉर्ड में पेश किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान वकील की कहानी कई अहम बिंदुओं पर कमजोर साबित हुई। मामले में बचाव पक्ष की ओर से तरमिंदर सिंह, मधु वानी और जगमोहन कौशिक ने पैरवी की। वकीलों ने अदालत में दलील दी कि सरकारी वकील आरोपों को ठोस सबूतों के साथ साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर ऐसे गंभीर मामलों में जांच की गुणवत्ता और साक्ष्यों की मजबूती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़िता के माता-पिता के बयानों में मतभेद अदालत ने अपने फैसले में अहम टिप्पणियां करते हुए कहा कि पीड़िता के माता-पिता के बयान आपस में मेल नहीं खाते। इसके साथ ही सरकार की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान भी एक-दूसरे से अलग पाए गए। अदालत ने यह भी कहा कि होटल मालिक आरोपी की पहचान नहीं कर सका। मामले में पेश किए गए सबूत आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहे। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।


