सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR पारदर्शी तरीके से हो:चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता; EC बोला- आयोग पर हमला फैशन बन गया है

सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR पारदर्शी तरीके से हो:चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता; EC बोला- आयोग पर हमला फैशन बन गया है

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि, यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या SIR नियमों से हटकर हो सकती है। इस पर चुनाव आयोग की तरफ से दलील दे रहे एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा- वोटर लिस्ट की जांच करना न्यायसंगत और सही है। कोर्ट को इस प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर देना चाहिए। द्विवेदी ने आगे कहा कि कुछ NGO और नेताओं के कहने पर हर मामले की जांच नहीं हो सकती। बिहार में जिन 66 लाख लोगों के नाम हटे हैं उनमें से किसी ने कोर्ट में शिकायत नहीं की। आजकल ECI को गाली देकर चुनाव जीतना फैशन बन गया है। चुनाव आयोग के 5 तर्क कोर्ट रूम LIVE: एडवोकेट द्विवेदी: ECI का मकसद संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत यह देखना था कि कोई व्यक्ति नागरिक है या अवैध प्रवासी। कोर्ट के सवाल पर उन्होंने कहा कि जांच में यह देखा जाता है कि माता-पिता भारतीय नागरिक हैं या नहीं। दूसरा माता-पिता अवैध प्रवासी तो नहीं। 2003 की एन्यूमरेशन (घर-घर सर्वे) पहले से हुई थी। उस समय 76% लोगों को कोई दस्तावेज जमा ही नहीं करना पड़ा। बाकी लोग 11 में से कोई एक दस्तावेज देकर सूची में शामिल हो गए द्विवेदी: SIR मैनुअल कानून नहीं है। यह ECI की शक्तियों को सीमित नहीं कर सकता। भविष्य में SIR कैसे डिजाइन होगा, यह मैनुअल तय नहीं कर सकता। अगर नियम 21(3) के तहत बदलाव जरूरी हो, तो ECI ऐसा कर सकता है द्विवेदी: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि प्रक्रिया में ‘ड्यू प्रोसेस’ नहीं अपनाया गया। भारत की अदालतें अमेरिका की तरह ‘ड्यू प्रोसेस’को सीधे लागू नहीं करतीं। कोर्ट नीतिगत फैसलों की समझदारी पर बैठकर फैसला नहीं कर सकता। उदाहरण देते हुए कहा: अमेरिका में भी कई फैसले बिना ‘ड्यू प्रोसेस’ के होते हैं, फिर भी वहां की अदालतें हर नीति पर दखल नहीं देतीं। CJI: चाहे चुनाव आयोग की व्याख्या मान भी ली जाए फिर भी जब SIR से नागरिकों के अधिकारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं तो प्रक्रिया कम से कम उतनी पारदर्शी क्यों न हो। जितनी सामान्य पुनरीक्षण में होती है। CJI: मतदाता सूची में बदलाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि अपनाई गई प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। जस्टिस बागची: कोई भी शक्ति पूरी तरह अनियंत्रित नहीं हो सकती। इस पर द्विवेदी ने सहमति जताई। SIR पर पिछली मुख्य 5 सुनवाई 21 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR के गंभीर परिणाम हो सकते हैं सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मतदाता सूची में संशोधन (SIR) के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होते। कोर्ट ने कहा ‘कोई भी शक्ति अनियंत्रित नहीं हो सकती।’ पूरी खबर पढ़ें… 20 जनवरीः चुनाव आयोग बोला- सभी राज्यों की SIR प्रोसेस अलग चुनाव आयोग ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR) प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, अभी तक किसी की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे किसी एक मामले के तथ्यों को उठाकर उन्हें किसी दूसरे राज्य की SIR प्रक्रिया पर लागू करना गलत होगा, क्योंकि हर जगह प्रक्रिया अलग रही है। पूरी खबर पढ़ें… 19 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वोटर्स को नाम जुड़वाने का एक और मौका दिया सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। कोर्ट ने कहा चुनाव आयोग गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक तौर पर लगाए, ताकि लोगों को पता चल सके। पूरी खबर पढ़ें… 15 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा था- हम देश निकाला नहीं दे रहे चुनाव आयोग ने SC में कहा था- SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। 6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा- लिस्ट को सही रखना हमारा काम चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। पूरी खबर पढ़ें… 26 नवंबर: चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… —————– ये खबर भी पढ़ें… चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…

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