भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पैतृक गांव नवादा के अमावां में खासा उत्साह दिख रहा है। काफी दिनों से नितिन नवीन का परिवार वहां नहीं रह रहा है। लेकिन नितिन नवीन गांव से जुड़े रहे हैं। न सिर्फ गांव के लोगों से सीधे संपर्क में रहे हैं बल्कि हाल में वे गांव भी आए थे। उनके गोतिया पप्पू सिन्हा बताते हैं कि यह पल गौरव का पल है। गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। पूरा देश आज जान गया । नितिन नवीन के दादाजी दशकों पहले रजौली के अमावां से पटना जाकर बसे थे। उनके पिताजी नवीन किशोर सिन्हा का जन्म अमावा में ही हुआ था। वे गांव के संपर्क में थे। जो लोग पटना जाते थे उनसे हाल-चाल लेते थे। उनके बाद नितिन नवीन भी गांव के लोगों से जुड़े रहे। नितिन नवीन के चाचा और अमावां गांव निवासी रवि भूषण प्रसाद सिन्हा कहते हैं नितिन सच्चा हीरा था, जिसे असली हीरे ने पहचान दिया। सीरा-पीड़ा पूजकर गए थे नितिन नवीन, फल मिला: करीब 19 महीना पहले वे रजौली के अमावां स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचे थे । वे अपने गांव की मिट्टी से इस कदर जुड़े हैं कि अपने पैतृक घर में सीरा- पीड़ा (कुल देवी – देवताओं) को नमन किया। इसका आशीर्वाद उन्हें मिल गया है। ग्रामीणों के अनुसार नितिन नवीन के पुरखों की कई पीढ़ी का जीवन अमावां गांव में ही बीता है। दो पीढ़ी पूर्व यानी नितिन नवीन के दादाजी स्व. कामेंद्र प्रसाद सिन्हा रोजगार के सिलसिले में पटना गए और वहीं बस गए। गांव में हर घर में जले नितिन के नाम से घी के दीये: नितिन नवीन के पैतृक गांव अमावां में इस अवसर पर भव्य जश्न मनाया गया। गांव की गलियों में ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी, पटाखे फोड़े गए व एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं। लोगों ने इसे न केवल अमावां बल्कि रजौली प्रखंड व नवादा के लिए गौरव का क्षण बताया। हर घर में नितिन नवीन के नाम से घी का दीपक जलाए गए। नवादा के अमावां गांव के लोगों में खासा उत्साह, हाल ही में पूजा करने गए थे भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पैतृक गांव नवादा के अमावां में खासा उत्साह दिख रहा है। काफी दिनों से नितिन नवीन का परिवार वहां नहीं रह रहा है। लेकिन नितिन नवीन गांव से जुड़े रहे हैं। न सिर्फ गांव के लोगों से सीधे संपर्क में रहे हैं बल्कि हाल में वे गांव भी आए थे। उनके गोतिया पप्पू सिन्हा बताते हैं कि यह पल गौरव का पल है। गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। पूरा देश आज जान गया । नितिन नवीन के दादाजी दशकों पहले रजौली के अमावां से पटना जाकर बसे थे। उनके पिताजी नवीन किशोर सिन्हा का जन्म अमावा में ही हुआ था। वे गांव के संपर्क में थे। जो लोग पटना जाते थे उनसे हाल-चाल लेते थे। उनके बाद नितिन नवीन भी गांव के लोगों से जुड़े रहे। नितिन नवीन के चाचा और अमावां गांव निवासी रवि भूषण प्रसाद सिन्हा कहते हैं नितिन सच्चा हीरा था, जिसे असली हीरे ने पहचान दिया। सीरा-पीड़ा पूजकर गए थे नितिन नवीन, फल मिला: करीब 19 महीना पहले वे रजौली के अमावां स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचे थे । वे अपने गांव की मिट्टी से इस कदर जुड़े हैं कि अपने पैतृक घर में सीरा- पीड़ा (कुल देवी – देवताओं) को नमन किया। इसका आशीर्वाद उन्हें मिल गया है। ग्रामीणों के अनुसार नितिन नवीन के पुरखों की कई पीढ़ी का जीवन अमावां गांव में ही बीता है। दो पीढ़ी पूर्व यानी नितिन नवीन के दादाजी स्व. कामेंद्र प्रसाद सिन्हा रोजगार के सिलसिले में पटना गए और वहीं बस गए। गांव में हर घर में जले नितिन के नाम से घी के दीये: नितिन नवीन के पैतृक गांव अमावां में इस अवसर पर भव्य जश्न मनाया गया। गांव की गलियों में ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी, पटाखे फोड़े गए व एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं। लोगों ने इसे न केवल अमावां बल्कि रजौली प्रखंड व नवादा के लिए गौरव का क्षण बताया। हर घर में नितिन नवीन के नाम से घी का दीपक जलाए गए। नवादा के अमावां गांव के लोगों में खासा उत्साह, हाल ही में पूजा करने गए थे


