सहरसा के मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर में अल्प वेतन संविदा कर्मियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। वे अपनी 6 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। महाविद्यालय परिसर में कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। लंबे समय से उपेक्षा और शोषण का लगाया आरोप संविदा कर्मियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से उपेक्षा और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। संविदा कर्मी राजेश कुमार ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान, कर्मियों को परेशान करने की प्रवृत्ति पर रोक, पीएफ कटौती में अनियमितताओं की जांच, गलत आरोप लगाकर सेवा से हटाने की धमकी बंद करना और अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया कर्मियों का कहना है कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कई कर्मियों ने बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया। उनका आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। संविदा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा संविदा कर्मी संघ के अध्यक्ष राजेश ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संविदा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जो अस्वीकार्य है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग हड़ताल के कारण महाविद्यालय के कई प्रशासनिक और तकनीकी कार्य प्रभावित होने लगे हैं। छात्रों से जुड़ी कुछ सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। संविदा कर्मियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। सहरसा के मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर में अल्प वेतन संविदा कर्मियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। वे अपनी 6 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। महाविद्यालय परिसर में कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। लंबे समय से उपेक्षा और शोषण का लगाया आरोप संविदा कर्मियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से उपेक्षा और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। संविदा कर्मी राजेश कुमार ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान, कर्मियों को परेशान करने की प्रवृत्ति पर रोक, पीएफ कटौती में अनियमितताओं की जांच, गलत आरोप लगाकर सेवा से हटाने की धमकी बंद करना और अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया कर्मियों का कहना है कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कई कर्मियों ने बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया। उनका आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। संविदा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा संविदा कर्मी संघ के अध्यक्ष राजेश ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संविदा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जो अस्वीकार्य है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग हड़ताल के कारण महाविद्यालय के कई प्रशासनिक और तकनीकी कार्य प्रभावित होने लगे हैं। छात्रों से जुड़ी कुछ सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। संविदा कर्मियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।


