Ayushman Yojana: मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों के साथ संबद्ध अस्पतालों की मनमानी और गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से अब थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें डेस्क ऑडिट के साथ फील्ड में जाकर निजी अस्पतालों की जांच पड़ताल कर उनका ऑडिट भी किया जाएगा। इस प्रकार निजी अस्पतालों द्वारा भेजे जाने वाले क्लेम्स के साथ जाकर टीम ऑडिट कर गड़बड़ियों का पता लगाएगी।
इसके लिए तीन तरह की टीमें बनाई जाएंगी-डेस्क ऑडिट टीम, स्पेशलिस्ट टीम और सुपर स्पेशलिस्ट टीम। इन टीमों में डॉक्टर रहेंगे जो मरीजों के मर्ज और उसके इलाज की जरूरत को आसानी से समझकर गड़बड़ियों को पकड़ सकेंगे। इसके साथ ऑडिट टीम आयुष्मान का रियान्वन करने वाली स्टेट हैल्थ एजेंन्सी को योजना में फ्रॉड रोकने के लिए सुझाव भी देगी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में भी मदद करेगी। (MP News)
फर्जीवाड़े पर कसेगी नकेल
अभी आयुष्मान योजना में बिना जरूरत के ज्यादा दिन तक भर्ती रखने या आइसीयू में भर्ती करने, अनावश्यक जांच कराने, बिल ज्यादा बनाने आदि की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही है। स्टेट हेल्थ एजेंसी ने कुछ उपाय लागू किए है लेकिन फिर भी इन पर प्रभावी रोकथाम नहीं लग पा रही है। इसलिए अब प्रदेश आयुष्मान कार्यालय ने निजी एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का फैसला लिया है। इसके लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए 27 जनवरी तक प्रस्ताव मांगे है। यह प्रक्रिया दो महीने के अंदर पूरी होने की संभावना है।
बिना जरूरत भर्ती करने का फर्जीवाड़ा आ चुका सामने
बीते साल प्रदेश के कुछ निजी अस्पतालों में बिना जरूरत मरीजों को आइसीयू में भर्ती कर मोटी रकम निकालने का फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसके बाद भोपाल, ग्वालियर और सीहोर के 8 निजी अस्पतालों की मान्यता रद्द कर उन्हें आयुष्मान योजना से अलग कर दिया गया था। आयुष्मान की टीम के निरीक्षण में यह गड़बड़ी सामने आई थी। पूछताछ में डॉक्टर मरीजों को आइसीयू में भर्ती करने के उचित कारण नहीं बता सके थे।
यह काम करेगी एजेंसी
- एजेंसी स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट के तहत निर्धारित क्लेम का ऑडिट करेगी। एजेंसी अपनी टिप्पणियों साथ उनका विश्लेषण सिफारिशें और संभावित कार्रवाई की रिपोर्ट देगी।
- ऑडिट एजेंसी को दावों की जांच के साथ अस्पतालों का ऑडिट कर योजना के संभावित दुरुपयोग या धोखाधड़ी का पता लगाएगी।एजेंसी पैकेज-वार, विशेषज्ञता-वार, अस्पताल-वार और जिला-वार विश्लेषण करेगी।
- एजेंसी यह भी बताएगी कि किन बीमारियों के इलाज के लिए नए पैकेज की जरूरत है और किन में बदलावों की। इसके साथ अतिरिक्त सहायक दस्तावेज (इम्प्लांट फोटो, बारकोड, रोगी फोटो) प्राप्त करने के बारे में बताएगी।
- उन चिकित्सा सुविधाओं को भी बताएगी जो प्रदेश में नहीं हैं, जिनके लिए अन्य राज्यों में जाना पड़ता है।
- एजेंसी अस्पतालों द्वारा धोखाधड़ी करने के कारणों को पकड़ने और उन्हें रोकने के लिए विशेष टूल या बाजार में उपलब्ध आइटी टूल और सेवाओं का उपयोग करेगी। (MP News)


