Jaipur Literature Festival 2026: जयपुर: साहित्य महोत्सव के दौरान आयोजित सत्र ‘द पर्सनल एंड द पॉलिटिकल’ में निजी अनुभव, राजनीति, कविता, हास्य, प्रेम और प्रतिरोध पर गहरी और संवेदनशील बातचीत हुई। इस सत्र का संचालन लेखक और सांस्कृतिक टिप्पणीकार परिख अनिश गावंडे ने किया।
मंच पर प्रसिद्ध कवि, परफॉर्मेंस आर्टिस्ट और सामाजिक चिंतक आलोक वैद मेनन तथा लेखिका और कवयित्री करुणा एजारा मौजूद रहीं। गावंडे ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि आज के समय में निजी जीवन और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कलाकार और लेखक अपने काम के साथ-साथ समाज की उम्मीदों, आलोचनाओं और दबावों को भी अपने साथ ढोते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कोई व्यक्ति खुद को गंभीरता से लेते हुए भी खुद को बहुत गंभीर न बनाए, यह संतुलन कैसे साधे?
कविताएं हमें जोड़ती हैं
इस पर आलोक वैद मेनन ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके लिए हास्य एक राजनीतिक रणनीति है। उनका मानना है कि हंसी कमजोरी नहीं, बल्कि प्रतिरोध का तरीका है। उन्होंने कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने खड़े होने का एक तरीका है।
आलोक ने बताया कि उन्हें बचपन से ही समाज की बनावटी ईमानदारी खलती रही और कला उनके लिए वह जगह बनी, जहां सच कहा जा सकता है। उनके अनुसार, कविता और परफॉर्मेंस लोगों को यह स्वीकार करने की आज़ादी देती है कि हम सभी अधूरे, उलझे और अकेले हैं और यही हमें जोड़ता है।
अपनी राय से अधिक लोगों की आवाज सुनना जरूरी
करुणा एजारा ने सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर लेखन और समुदाय बनाने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म लोगों को एक पहचान में बांधना चाहते हैं, जबकि रचनात्मकता सीमाओं को तोड़ती है। शुरुआती दौर में ऑनलाइन पहचान ने उन्हें समुदाय दिया, लेकिन बाद में वही पहचान एक दबाव भी बन गई।
इस अकेलेपन से बाहर आने का रास्ता उनके लिए रीडिंग कम्युनिटी बनाना रहा। जहां सवाल पूछे जाते हैं, जवाब नहीं थोपा जाता। पढ़ना और पढ़ने के समुदाय बनाना उनके लिए दोबारा जुड़ने का रास्ता बना। उन्होंने कहा कि केवल अपनी राय रखने से ज्यादा जरूरी है, दूसरों की आवाज सुनने की जगह बनाना।
प्यार की भाषा से दुनिया को जोड़ सकते हैं
सत्र में नफरत, ट्रोलिंग और धमकियों पर भी खुलकर चर्चा हुई। आलोक ने कहा कि नफरत भरी भाषा असल में भाषा के मूल उद्देश्य जुड़ाव को तोड़ती है। उन्होंने लव स्पीच की अवधारणा पर बात करते हुए कहा कि प्रेम और करुणा के जरिए ही समाज को जोड़ा जा सकता है।
वहीं, करुणा ने कहा कि कड़वाहट आसान रास्ता है, लेकिन सहानुभूति ज्यादा साहस मांगती है। कविता, कला और इच्छा (डिज़ायर) आज के समय में दुनिया को फिर से सीने का काम कर रही हैं।


