पति-पत्नी के विवाद में ससुराल-वालों को आरोपी बनाना गलत:हाईकोर्ट बोला-बिना सबूत के दहेज उत्पीड़न फंसाने का बना साधन, कहा- यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है

पति-पत्नी के विवाद में ससुराल-वालों को आरोपी बनाना गलत:हाईकोर्ट बोला-बिना सबूत के दहेज उत्पीड़न फंसाने का बना साधन, कहा- यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दहेज प्रताड़ना बिना सबूत के ससुरालवालों को फंसाने का साधन बन गया है। डिवीजन बेंच ने कहा है कि इस तरह से बगैर सबूत के केवल आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों को आरोपी बनाना गलत है। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही अंबिकापुर के महिला थाने में दर्ज एफआईआर और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया। दरअसल, बिलासपुर के रहने वाले मोहम्मद शाहरुख खान का 18 जनवरी 2022 को अंबिकापुर की महिला से मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ निकाल हुआ था। शादी के बाद पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद शुरू हो गया। पत्नी का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पति, ससुर, सास और ननद ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। वहीं, आए दिन विवाद के चलते पति मोहम्मद शाहरुख खान ने पत्नी को 18 दिसंबर 2023 को उसके मायके में छोड़कर आ गया। महिला ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाकर दर्ज करा दी FIR
इस दौरान महिला ने बिलासपुर कलेक्टर और महिला थाने में शिकायत कर दी, जिसमें बताया कि पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था। साथ ही ससुराल वालों ने 5 लाख रुपए नकद और 10 तोला सोने की मांग की थी। उसने यह भी आरोप लगाया गया कि उसे दिए गए दहेज को पति ने अपने पास रख लिया है। बिलासपुर से केस को अंबिकापुर में महिला परामर्श केंद्र भेज दिया गया, जिसके बाद महिला की शिकायत पर अंबिकापुर में पुलिस ने पति मोहम्मद शाहरुख खान, ससुर मोहम्मद फिरोज खान, सास नसरीन अख्तर और ननद अलीशा खान ने समेत सभी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया। FIR को हाईकोर्ट में दी चुनौती
पुलिस की एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसमें बताया गया कि महिला के बड़े पापा ने पुलिस को दिए गए बयान में खुद स्वीकार किया है कि पति मोहम्मद शाहरुख खान एवं उनके परिवार द्बारा सोने-चांदी के जेवरात को सौंप कर आ गए थे। यह भी बताया कि जब पति ने मुस्लिम विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए नोटिस दिया। इसके बाद दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा दी। ऐसे में सबूत और गवाहों के बिना केवल आरोप के आधार पर पति और ससुरालवालों को आरोपी बनाया गया है, जिसे निरस्त किया जाए। हाईकोर्ट बोला- फंसाने का साधन बना दहेज प्रताड़ना
इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना, जिसके बाद अपने फैसले में कहा कि शिकायत में ससुराल वालों के खिलाफ कोई विशिष्ट घटना या तारीख का जिक्र नहीं था। केवल सामान्य और व्यापक आरोप लगाए गए थे। पत्नी ने एफआईआर तब दर्ज कराई जब उसे पति की ओर से तलाक (तलाक-ए-हसन) का कानूनी नोटिस मिला था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल विरुद्ध हरियाणा राज्य के मामले का हवाला देते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों में दूर के रिश्तेदारों को बिना किसी ठोस सबूत के घसीटना उत्पीड़न का साधन बन गया है। हाईकोर्ट ने अंबिकापुर के महिला थाने में दर्ज एफआईआर और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *