बरेली नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि खलीलपुर रोड पर किए गए अवैध निर्माणों को हर हाल में हटाया जाएगा। अधिकारी का कहना है कि इन लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करके मकान बना लिए हैं, जिसके कारण अब सड़क चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट में बाधा आ रही है। निगम ने कुल 300 मकानों को चिन्हित कर उन पर लाल निशान लगा दिए हैं और सभी को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अभियंता राठी ने चेतावनी दी है कि यदि लोगो ने स्वयं अपने घरों को नहीं तोड़ा, तो नगर निगम बुलडोजर की कार्रवाई करेगा और इस पूरी प्रक्रिया में आने वाला खर्च भी संबंधित मकान स्वामियों से ही वसूला जाएगा। देखे जिन घरो में लाल निशान लगे है वहां की कुछ तस्वीरें सैकड़ों वर्षों की विरासत पर मंडराया संकट का साया
सीबीगंज क्षेत्र के खलीलपुर रोड पर रहने वाले परिवारों के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि उनके परिवार यहां कई पीढ़ियों से, लगभग सौ वर्षों से रह रहे हैं। जिन घरों की दीवारों पर आज नगर निगम ने लाल निशान लगाए हैं, उनमें लोगों की जीवनभर की खून-पसीने की कमाई और यादें जुड़ी हुई हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जमापूंजी इन आशियानों को बनाने में लगा दी और अब बुढ़ापे की दहलीज पर उनसे उनकी छत छीनी जा रही है। सड़क चौड़ीकरण के दावे पर उठ रहे हैं सवाल
नगर निगम जहां एक तरफ सड़क चौड़ीकरण को इस कार्रवाई का मुख्य आधार बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि सड़क पहले से ही 12 मीटर चौड़ी है और किनारे पर पक्का नाला भी बना हुआ है। ऐसे में सड़क को और कितना चौड़ा किया जाना है, यह समझ से परे है। लोगों ने निगम के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई केवल डराने और भ्रष्टाचार के उद्देश्य से की जा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे इस कार्रवाई को रोकने के बदले पैसों की मांग की गई है। मलबे में तब्दील होने से पहले दे देंगे जान
मकानों पर लगे लाल निशानों को देखकर महिलाओं और बुजुर्गों का बुरा हाल है। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने बड़ी मेहनत करके एक-एक ईंट जोड़ी थी, ताकि उनके बच्चों को सिर छिपाने की जगह मिल सके। यदि बुलडोजर चला तो पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे भाजपा के कट्टर समर्थक हैं और हमेशा सरकार के साथ खड़े रहे, लेकिन आज उन्हीं की सरकार में उन्हें बेघर किया जा रहा है। पीड़ितों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे अपने आशियाने को मलबे में तब्दील होते देखने के बजाय अपनी जान देना बेहतर समझेंगे। सरकार से इंसाफ की मांग
फिलहाल नगर निगम की टीम चेतावनी देकर मौके से लौट गई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बरकरार है। प्रभावित परिवार अब सरकार से मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह जमीन वास्तव में सरकारी है, तो इतने वर्षों तक निगम कहां सोया हुआ था? बिजली के कनेक्शन, पानी के बिल और हाउस टैक्स लेने के बाद अब इसे अवैध बताना सरासर अन्याय है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई को रोका जाए, अन्यथा सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो जाएंगे।


