क्या तेजस्वी की पत्नी राजश्री बनेंगी RJD की दूसरी ‘राबड़ी’:लैंड फॉर जॉब केस में जेल जा सकता है परिवार, ‘भाभी जी’ संभालेंगी पार्टी की कमान!

क्या तेजस्वी की पत्नी राजश्री बनेंगी RJD की दूसरी ‘राबड़ी’:लैंड फॉर जॉब केस में जेल जा सकता है परिवार, ‘भाभी जी’ संभालेंगी पार्टी की कमान!

लैंड फॉर जॉब मामले में राजद प्रमुख लालू यादव के परिवार की मुसीबत बढ़ गई है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को लालू, राबड़ी, तेजस्वी, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए। इससे पूरे लालू परिवार पर जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है। CBI की चार्जशीट के आधार पर लालू परिवार के साथ कुल 41 लोगों पर आरोप तय हुए हैं। इनपर अब मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया है। इस मामले में अगर लालू परिवार को सजा होती है तो तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री RJD की दूसरी ‘राबड़ी’ बन सकती हैं। मतलब पार्टी की कमान ‘भाभी जी’ के हाथों में होगी। कोर्ट में आरोप साबित हुए, सजा मिली तो तेजस्वी यादव का क्या होगा? RJD का क्या होगा? पढ़ें खास रिपोर्ट… क्या पिता के नक्शे-कदम पर चलेंगे तेजस्वी यादव? तेजस्वी यादव नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में आरोपी हैं। कोर्ट ने उनपर आरोप तय किया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जेल जाने की नौबत आने पर तेजस्वी यादव क्या करेंगे? तेजस्वी अभी राजद का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। तेजस्वी यादव क्या फैसला ले सकते हैं? इसपर बात करने से पहले बीते वक्त में झांकना होगा। 30 जुलाई 1997 को लालू यादव चारा घोटाला में जेल गए थे। उस वक्त वह बिहार के मुख्यमंत्री थे। जेल जाने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी के किसी नेता को CM नहीं बनाया। उन्हें यह जोखिम भरा लगा। इससे पार्टी और सरकार में ताकत शिफ्ट होने का डर था। लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। राजद का गठन 5 जुलाई 1997 को हुआ था। इसके बाद से इस पार्टी का नेतृत्व लालू यादव और इनके परिवार के लोगों ने किया है। तेजप्रताप यादव को पिछले साल पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया गया। अब तेजस्वी के सामने जेल जाने की नौबत आई तो जानकारों का मानना है कि वह पिता के नक्शे-कदम पर चल सकते हैं। अपनी पत्नी राजश्री को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या तेजस्वी की पत्नी राजश्री RJD की दूसरी ‘राबड़ी’ बनेंगी? 29 साल के राजद के इतिहास में पार्टी की कमान कभी लालू परिवार से बाहर नहीं गई। कौन हैं राजश्री यादव? राजश्री राजद नेता तेजस्वी यादव की पत्नी हैं। विवाह से पहले उनका नाम रचेल गोडिन्हो था। जन्म हरियाणा के रेवाड़ी के एक ईसाई परिवार में हुआ था। दिल्ली में पली-बढ़ी हैं। एयर होस्टेस की पढ़ाई की है। लालू परिवार में आने के बाद रचेल राजश्री बन गईं। क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला? लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रिश्वत में जमीन लेकर बहुत से लोगों को रेलवे की नौकरी दिलाई। CBI के अनुसार लालू ने रेलवे के कई जोन में ग्रुप डी पदों पर 12 लोगों की भर्ती कराई। इसके बदले अपने परिवार वालों के नाम पर जमीन के 7 प्लॉट ट्रांसफर कराए। लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI की चार्जशीट में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत कई लोगों के नाम हैं। आरोप है कि नौकरी के लिए कई लोगों ने लालू परिवार को बहुत ही कम कीमत पर जमीनें गिफ्ट डीड के माध्यम से दीं। लालू परिवार पर क्या आरोप हैं? राबड़ी देवी: 6 फरवरी 2008 को पटना के किशुन देव राय ने 3,375 वर्ग फीट जमीन 3.75 लाख रुपए में राबड़ी देवी को बेची। 2008 में ही किशुन के परिवार के 3 लोगों (राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार) को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिली। फरवरी 2008 में पटना के महुआबाग के संजय राय ने 3.75 लाख रुपए में 3,375 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को बेची। संजय राय के अलावा उसके परिवार के 2 अन्य लोगों को रेलवे में नौकरी मिली। फरवरी 2007 में पटना के हजारी राय ने 9,527 स्क्वायर फीट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपए में बेची। हजारी के 2 भतीजों (दिलचंद कुमार और प्रेम चंद कुमार) को वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ-ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिली। 2014 में एके इंफोसिस्टम के ज्यादातर शेयर राबड़ी देवी ने खरीद लिए और कंपनी की डायरेक्टर बन गईं। पटना के लाल बाबू राय ने मई 2015 में 13 लाख रुपए में 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम की। लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिली। मीसा भारती: पटना की किरण देवी ने नवंबर 2007 में 3.70 लाख रुपए में 80,905 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की बेटी मीसा भारती को बेची। 2008 में सेंट्रल रेलवे मुंबई में किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को नौकरी मिली। हेमा यादव: बृज नंदन राय ने मार्च 2008 में 3,375 वर्ग फुट जमीन गोपालगंज के हृदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपए में बेची। हृदयानंद चौधरी को 2005 में ईस्ट-सेंट्रल रेलवे हाजीपुर में नौकरी मिली। 2014 में हृदयानंद ने गिफ्ट डीड के जरिए इस जमीन को लालू यादव की बेटी हेमा को ट्रांसफर कर दिया। विशुन देव राय ने मार्च 2008 में 3,375 वर्ग फीट जमीन सीवान के ललन चौधरी को दी। ललन के पोते पिंटू कुमार की 2008 में वेस्टर्न रेलवे मुंबई में नौकरी लगी। इसके बाद ललन ने फरवरी 2014 में यह जमीन हेमा यादव को दे दी। तेजस्वी और तेजप्रताप यादव: 14 जून 2005 को एक व्यक्ति ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए 5700 रुपए में दो जमीनें राबड़ी देवी के संरक्षण में तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के नाम कर दीं। उस समय दोनों नाबालिग थे। कोर्ट ने लालू परिवार के लिए क्या कहा, कितनी सजा हो सकती है? कोर्ट ने शुक्रवार को लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए हैं। कहा कि लालू परिवार ने आपराधिक गिरोह की तरह काम किया। कोर्ट ने कहा, चार्जशीट से संकेत मिलता है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया। सरकारी नौकरी के बदले जमीनें लेने की साजिश रची। कोर्ट ने तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के खिलाफ भी आरोप तय करने का निर्देश दिया है। इस केस में लालू यादव समेत अन्य अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8, 9, 11, 12 और 13 के तहत आरोप तय किए गए हैं। इसके साथ ही IPC की धारा 120, 420, 468, 467 और 471 भी लगाई गई है। ट्रायल के दौरान अगर दोष साबित होते हैं तो आरोपियों को 4 साल से लेकर 10 साल तक की सजा मिल सकती है। लालू परिवार ने आरोप तय होने पर क्या कहा? लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने कहा, ‘हम लड़ाई लड़ेंगे।’ वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने कहा, ‘हम कई सालों से इन साजिशों से लड़ रहे हैं। हम लड़ते रहेंगे। भारत की न्यायिक व्यवस्था में देर है, अंधेर नहीं। मुझे लगता है कि इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। आखिरकार हम सत्यमेव जयते कहेंगे। राहत जरूर मिलेगी। ये सारे आरोप जहां से आ रहे हैं। जिनकी वजह से आ रहे हैं। जिनके इशारे पर आ रहे हैं। वो सब हवा में काबू हो जाएंगे।’ क्या इस केस से RJD पर कोई असर पड़ेगा? हां, असर पड़ेगा। लालू के साथ ही राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव आरोपी हैं। लालू और राबड़ी की उम्र बहुत ज्यादा है। दोनों धीरे-धीरे राजनीति से दूर हो रहे हैं। तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के सामने पूरा करियर पड़ा है। यह मामला तेजस्वी यादव के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि वह राजद का नेतृत्व कर रहे हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन के मुताबिक इस मामले में अगर कोर्ट से लालू परिवार को बरी किया जाता है तो परिवार के लोगों का मनोबल बढ़ेगा। RJD और तेजस्वी पर लगे भ्रष्टाचार के दाग दूर होंगे। जनता को संदेश जाएगा कि राजनीति की वजह से उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया। कोर्ट ने जिन धाराओं में आरोप तय किया है, उसमें 10 साल तक सजा हो सकती है। अगर कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत परिवार के लोगों को सजा दी तो सिनैरियो बदल जाएगा। तेजस्वी का राजनीतिक भविष्य खराब हो सकता है। जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 8 के मुताबिक, दोषियों के लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद का चुनाव लड़ने पर रोक है। इसकी धारा 8(3) के अनुसार किसी भी अपराध में दोषी ठहराए जाने वाले किसी सांसद और विधायक को अगर 2 साल से ज्यादा की सजा हुई तो सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। वह सजा पूरी करने की तारीख से अगले 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। अगर तेजस्वी यादव को सजा हुई तो RJD का क्या होगा? लालू-राबड़ी के 9 बच्चों में से 4 (मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव) राजनीति में एक्टिव हैं। लालू ने RJD की कमान तेजस्वी को सौंपी है। अगर उन्हें सजा हुई तो RJD के नेतृत्व और भविष्य पर संकट पैदा हो जाएगा। ऐसे में 2 बातें होंगी… 1. RJD को मिलेंगी दूसरी ‘राबड़ी देवी’ सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण बताते हैं कि तेजस्वी को सजा होती है तो वह कभी नहीं चाहेंगे कि पार्टी की कमान हाथ से निकल जाए। वह अपने पिता वाली टैक्टिस अपना सकते हैं। अपनी पत्नी राजश्री को कमान सौंप सकते हैं। इंद्रभूषण कहते हैं, ‘चारा घोटाला में जब लालू यादव को जेल जाना था तब पार्टी के कई सीनियर नेताओं के अंदर महत्वाकांक्षा जागी थी। हालांकि, लालू ने उनको पार्टी की कमान नहीं सौंप, घरेलू महिला अपनी पत्नी राबड़ी देवी को CM बना दिया।’ 2. पार्टी टूटने की आशंका RJD की टॉप लीडरशिप में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव हैं। उनके चलते पार्टी और कैडर एकजुट है। सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव अगर जेल जाते हैं तो पार्टी में टूट की संभावना बढ़ सकती है। परिवार के कुछ लोगों की नजर उस कुर्सी पर है। तेजस्वी यादव पर जैसे ही संकट आएगा पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की जाएगी। इसमें बाहरी नेताओं से ज्यादा परिवार के लोग ही ज्यादा आगे रहेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हाल की कुछ घटनाओं से इसके इशारे मिले हैं। लालू यादव को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी की नाराजगी की खबर आई। रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इशारों-इशारों में तेजस्वी यादव के खास और राज्यसभा सांसद संजय यादव पर निशाना साधा।’ इससे पहले इसी साल मई में तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया गया। उन पर यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर अपने नई रिलेशनशिप को सार्वजनिक करने पर की गई थी। इसके बाद तेजप्रताप ने अपनी पार्टी बनाई। लगातार तेजस्वी यादव पर हमला कर रहे हैं। लालू परिवार में कौन? लैंड फॉर जॉब मामले में राजद प्रमुख लालू यादव के परिवार की मुसीबत बढ़ गई है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को लालू, राबड़ी, तेजस्वी, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए। इससे पूरे लालू परिवार पर जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है। CBI की चार्जशीट के आधार पर लालू परिवार के साथ कुल 41 लोगों पर आरोप तय हुए हैं। इनपर अब मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया है। इस मामले में अगर लालू परिवार को सजा होती है तो तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री RJD की दूसरी ‘राबड़ी’ बन सकती हैं। मतलब पार्टी की कमान ‘भाभी जी’ के हाथों में होगी। कोर्ट में आरोप साबित हुए, सजा मिली तो तेजस्वी यादव का क्या होगा? RJD का क्या होगा? पढ़ें खास रिपोर्ट… क्या पिता के नक्शे-कदम पर चलेंगे तेजस्वी यादव? तेजस्वी यादव नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में आरोपी हैं। कोर्ट ने उनपर आरोप तय किया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जेल जाने की नौबत आने पर तेजस्वी यादव क्या करेंगे? तेजस्वी अभी राजद का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। तेजस्वी यादव क्या फैसला ले सकते हैं? इसपर बात करने से पहले बीते वक्त में झांकना होगा। 30 जुलाई 1997 को लालू यादव चारा घोटाला में जेल गए थे। उस वक्त वह बिहार के मुख्यमंत्री थे। जेल जाने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी के किसी नेता को CM नहीं बनाया। उन्हें यह जोखिम भरा लगा। इससे पार्टी और सरकार में ताकत शिफ्ट होने का डर था। लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। राजद का गठन 5 जुलाई 1997 को हुआ था। इसके बाद से इस पार्टी का नेतृत्व लालू यादव और इनके परिवार के लोगों ने किया है। तेजप्रताप यादव को पिछले साल पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया गया। अब तेजस्वी के सामने जेल जाने की नौबत आई तो जानकारों का मानना है कि वह पिता के नक्शे-कदम पर चल सकते हैं। अपनी पत्नी राजश्री को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या तेजस्वी की पत्नी राजश्री RJD की दूसरी ‘राबड़ी’ बनेंगी? 29 साल के राजद के इतिहास में पार्टी की कमान कभी लालू परिवार से बाहर नहीं गई। कौन हैं राजश्री यादव? राजश्री राजद नेता तेजस्वी यादव की पत्नी हैं। विवाह से पहले उनका नाम रचेल गोडिन्हो था। जन्म हरियाणा के रेवाड़ी के एक ईसाई परिवार में हुआ था। दिल्ली में पली-बढ़ी हैं। एयर होस्टेस की पढ़ाई की है। लालू परिवार में आने के बाद रचेल राजश्री बन गईं। क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला? लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रिश्वत में जमीन लेकर बहुत से लोगों को रेलवे की नौकरी दिलाई। CBI के अनुसार लालू ने रेलवे के कई जोन में ग्रुप डी पदों पर 12 लोगों की भर्ती कराई। इसके बदले अपने परिवार वालों के नाम पर जमीन के 7 प्लॉट ट्रांसफर कराए। लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI की चार्जशीट में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत कई लोगों के नाम हैं। आरोप है कि नौकरी के लिए कई लोगों ने लालू परिवार को बहुत ही कम कीमत पर जमीनें गिफ्ट डीड के माध्यम से दीं। लालू परिवार पर क्या आरोप हैं? राबड़ी देवी: 6 फरवरी 2008 को पटना के किशुन देव राय ने 3,375 वर्ग फीट जमीन 3.75 लाख रुपए में राबड़ी देवी को बेची। 2008 में ही किशुन के परिवार के 3 लोगों (राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार) को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिली। फरवरी 2008 में पटना के महुआबाग के संजय राय ने 3.75 लाख रुपए में 3,375 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को बेची। संजय राय के अलावा उसके परिवार के 2 अन्य लोगों को रेलवे में नौकरी मिली। फरवरी 2007 में पटना के हजारी राय ने 9,527 स्क्वायर फीट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपए में बेची। हजारी के 2 भतीजों (दिलचंद कुमार और प्रेम चंद कुमार) को वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ-ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिली। 2014 में एके इंफोसिस्टम के ज्यादातर शेयर राबड़ी देवी ने खरीद लिए और कंपनी की डायरेक्टर बन गईं। पटना के लाल बाबू राय ने मई 2015 में 13 लाख रुपए में 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम की। लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिली। मीसा भारती: पटना की किरण देवी ने नवंबर 2007 में 3.70 लाख रुपए में 80,905 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की बेटी मीसा भारती को बेची। 2008 में सेंट्रल रेलवे मुंबई में किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को नौकरी मिली। हेमा यादव: बृज नंदन राय ने मार्च 2008 में 3,375 वर्ग फुट जमीन गोपालगंज के हृदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपए में बेची। हृदयानंद चौधरी को 2005 में ईस्ट-सेंट्रल रेलवे हाजीपुर में नौकरी मिली। 2014 में हृदयानंद ने गिफ्ट डीड के जरिए इस जमीन को लालू यादव की बेटी हेमा को ट्रांसफर कर दिया। विशुन देव राय ने मार्च 2008 में 3,375 वर्ग फीट जमीन सीवान के ललन चौधरी को दी। ललन के पोते पिंटू कुमार की 2008 में वेस्टर्न रेलवे मुंबई में नौकरी लगी। इसके बाद ललन ने फरवरी 2014 में यह जमीन हेमा यादव को दे दी। तेजस्वी और तेजप्रताप यादव: 14 जून 2005 को एक व्यक्ति ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए 5700 रुपए में दो जमीनें राबड़ी देवी के संरक्षण में तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के नाम कर दीं। उस समय दोनों नाबालिग थे। कोर्ट ने लालू परिवार के लिए क्या कहा, कितनी सजा हो सकती है? कोर्ट ने शुक्रवार को लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए हैं। कहा कि लालू परिवार ने आपराधिक गिरोह की तरह काम किया। कोर्ट ने कहा, चार्जशीट से संकेत मिलता है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया। सरकारी नौकरी के बदले जमीनें लेने की साजिश रची। कोर्ट ने तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के खिलाफ भी आरोप तय करने का निर्देश दिया है। इस केस में लालू यादव समेत अन्य अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8, 9, 11, 12 और 13 के तहत आरोप तय किए गए हैं। इसके साथ ही IPC की धारा 120, 420, 468, 467 और 471 भी लगाई गई है। ट्रायल के दौरान अगर दोष साबित होते हैं तो आरोपियों को 4 साल से लेकर 10 साल तक की सजा मिल सकती है। लालू परिवार ने आरोप तय होने पर क्या कहा? लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने कहा, ‘हम लड़ाई लड़ेंगे।’ वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने कहा, ‘हम कई सालों से इन साजिशों से लड़ रहे हैं। हम लड़ते रहेंगे। भारत की न्यायिक व्यवस्था में देर है, अंधेर नहीं। मुझे लगता है कि इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। आखिरकार हम सत्यमेव जयते कहेंगे। राहत जरूर मिलेगी। ये सारे आरोप जहां से आ रहे हैं। जिनकी वजह से आ रहे हैं। जिनके इशारे पर आ रहे हैं। वो सब हवा में काबू हो जाएंगे।’ क्या इस केस से RJD पर कोई असर पड़ेगा? हां, असर पड़ेगा। लालू के साथ ही राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव आरोपी हैं। लालू और राबड़ी की उम्र बहुत ज्यादा है। दोनों धीरे-धीरे राजनीति से दूर हो रहे हैं। तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के सामने पूरा करियर पड़ा है। यह मामला तेजस्वी यादव के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि वह राजद का नेतृत्व कर रहे हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन के मुताबिक इस मामले में अगर कोर्ट से लालू परिवार को बरी किया जाता है तो परिवार के लोगों का मनोबल बढ़ेगा। RJD और तेजस्वी पर लगे भ्रष्टाचार के दाग दूर होंगे। जनता को संदेश जाएगा कि राजनीति की वजह से उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया। कोर्ट ने जिन धाराओं में आरोप तय किया है, उसमें 10 साल तक सजा हो सकती है। अगर कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत परिवार के लोगों को सजा दी तो सिनैरियो बदल जाएगा। तेजस्वी का राजनीतिक भविष्य खराब हो सकता है। जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 8 के मुताबिक, दोषियों के लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद का चुनाव लड़ने पर रोक है। इसकी धारा 8(3) के अनुसार किसी भी अपराध में दोषी ठहराए जाने वाले किसी सांसद और विधायक को अगर 2 साल से ज्यादा की सजा हुई तो सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। वह सजा पूरी करने की तारीख से अगले 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। अगर तेजस्वी यादव को सजा हुई तो RJD का क्या होगा? लालू-राबड़ी के 9 बच्चों में से 4 (मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव) राजनीति में एक्टिव हैं। लालू ने RJD की कमान तेजस्वी को सौंपी है। अगर उन्हें सजा हुई तो RJD के नेतृत्व और भविष्य पर संकट पैदा हो जाएगा। ऐसे में 2 बातें होंगी… 1. RJD को मिलेंगी दूसरी ‘राबड़ी देवी’ सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण बताते हैं कि तेजस्वी को सजा होती है तो वह कभी नहीं चाहेंगे कि पार्टी की कमान हाथ से निकल जाए। वह अपने पिता वाली टैक्टिस अपना सकते हैं। अपनी पत्नी राजश्री को कमान सौंप सकते हैं। इंद्रभूषण कहते हैं, ‘चारा घोटाला में जब लालू यादव को जेल जाना था तब पार्टी के कई सीनियर नेताओं के अंदर महत्वाकांक्षा जागी थी। हालांकि, लालू ने उनको पार्टी की कमान नहीं सौंप, घरेलू महिला अपनी पत्नी राबड़ी देवी को CM बना दिया।’ 2. पार्टी टूटने की आशंका RJD की टॉप लीडरशिप में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव हैं। उनके चलते पार्टी और कैडर एकजुट है। सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव अगर जेल जाते हैं तो पार्टी में टूट की संभावना बढ़ सकती है। परिवार के कुछ लोगों की नजर उस कुर्सी पर है। तेजस्वी यादव पर जैसे ही संकट आएगा पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की जाएगी। इसमें बाहरी नेताओं से ज्यादा परिवार के लोग ही ज्यादा आगे रहेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हाल की कुछ घटनाओं से इसके इशारे मिले हैं। लालू यादव को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी की नाराजगी की खबर आई। रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इशारों-इशारों में तेजस्वी यादव के खास और राज्यसभा सांसद संजय यादव पर निशाना साधा।’ इससे पहले इसी साल मई में तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया गया। उन पर यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर अपने नई रिलेशनशिप को सार्वजनिक करने पर की गई थी। इसके बाद तेजप्रताप ने अपनी पार्टी बनाई। लगातार तेजस्वी यादव पर हमला कर रहे हैं। लालू परिवार में कौन?  

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