काश! डॉक्टर ध्यान देते तो ये दिन नहीं देखने पड़ते

भैरूंदा| काश! अस्पताल प्रबंधन ध्यान देता तो बच्ची की किलकारी गूंजती, उसकी जान नहीं जाती और यह दिन नहीं देखना पड़ता, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाहीं ने बच्ची की जान ले ली। यह कहना है भैरूंदा निवासी संतोष जाट का, जिन्होंने जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं से आहत होकर उसका अंतिम संस्कार सड़क किनारे किया। मानवता को झकझोर देने वाली यह तस्वीर लापरवाही पर तमाचा है। भैरूंदा निवासी संतोष जाट की पत्नी ममता जाट को प्रसव के लिए भैरूंदा से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। 2 जनवरी को ममता ने बेटी को जन्म दिया। परिवार के अनुसार सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन जन्म के मात्र दो दिन बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने बच्ची का शव परिवार को सौंप दिया। ​पीड़ित परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजन का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज और ध्यान दिया जाता, तो उनकी बच्ची आज जीवित होती। अस्पताल में व्यवस्था की बेरुखी से आहत परिवार ने बच्ची का अंतिम संस्कार सड़क किनारे ही कर दिया।

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