कैसरबाग में राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह ‘ब्लैक होल’ नाटक का मंचन किया गया। यह नाटक आज के माता-पिता की भौतिक सुखों, पद और प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ को सशक्त रूप से चित्रित करता है, जिसके कारण वे मानवीय मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। नाटक ने दर्शकों को समाज के उस कड़वे सच से परिचित कराया, जहाँ परिवार होते हुए भी रिश्तों में शून्यता व्याप्त है। बिम्ब सांस्कृतिक समिति के कलाकारों ने इस मंचन के माध्यम से दर्शाया कि सही मार्गदर्शन और संस्कारों के अभाव में युवा पीढ़ी किस प्रकार भटकाव का शिकार हो रही है। उच्च पद और बेहतर जीवन स्तर पाने की लालसा राम किशोर नाग द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन महर्षि कपूर ने किया। इसका मंचन संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली की रंगमंडल योजना और भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से संभव हुआ। कहानी एक निजी कंपनी के अधिकारी कुरु के इर्द-गिर्द घूमती है। वह उच्च पद और बेहतर जीवन स्तर पाने की लालसा में अपनी पत्नी आशी और बच्चों को समय नहीं दे पाता। आशी भी अपने बेटे विभु को हॉस्टल भेज देती है और बेटी त्रिषा की परवरिश की जिम्मेदारी से कतराती है। फिल्मी ग्लैमर से प्रभावित त्रिषा करियर को लेकर जिद्दी होकर मां से विवाद के बाद घर छोड़ देती है और गलत लोगों के जाल में फंस जाती है। उधर, विभु प्रेम में असफल होकर अवसादग्रस्त हो जाता है और हिंसक रास्ता अपनाता है। कलाकारों ने सामाजिक जीवन के सच्चाई को दिखाया घर का सेवक भोले काका यह सब देखता है, लेकिन असहाय है। जब उसके बेटे के साथ दुर्घटना होती है और वह गांव जाने की अनुमति मांगता है, तो कुरु और आशी उसे स्वार्थी कहकर अपमानित करते हैं। पद,पैसा और नाम की दौड़ में हम अपनी आंखों के तारों से दूर उस ब्लैक होल तक पहुंच जाते हैं, जहाँ अस्तित्व ही गुम हो जाता है। मंच पर कुरु की भूमिका में गुरुदत्त पाण्डेय, आशी के रूप में रितु श्रीवास्तव, त्रिषा के किरदार में मुस्कान सोनी, विभु के रूप में आकाश सैनी, भोले काका के रूप में महर्षि कपूर और रसिक जी के रूप में विवेक रंजन सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया।


