आंबेडकर जयंती पर मंगलवार को केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदी मप्र शासन की सजा माफी योजना के तहत रिहा किए गए। इनमें 8 पुरुष और 1 महिला बंदी शामिल हैं। रिहाई की सूचना एक दिन पूर्व ही उनके परिजनों को दे दी गई थी, लिहाजा जेल परिसर के बाहर परिजन सुबह से ही इंतजार करते रहे। बंदियों की रिहाई के समय जेल के अधिकारियों ने बंदियों से कहा कि यहां से जाकर ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाएं ऐसा कोई व्यवहार न करें कि आप लोगों को दोबारा जेल आना पड़े। रिहाई के दौरान जेल प्रबंधन ने बंदियों को नए कपड़े और मिठाई भेंट की। जेल प्रबंधन ने बंदियों को रिहाई के दस्तावेज सौंपे।
जेल अधीक्षक मानेंद्र सिंह परिहार ने रिहा हुए बंदियों से कहा है कि जेल में रहने के दौरान आपने जो कौशल और प्रशिक्षण लिया है, उससे अपने परिवार के जीवन-यापन करें। जेल में सजा काटने के दौरान सभी को टेलरिंग, कारपेंटिंग, भवन मिस्त्री, लौहारी, भवन निर्माण मिस्त्री, प्रिंटिंग प्रेस, हथकरघा, बुनाई उद्योग आदि सहित कई हुनर सिखाए गए हैं। रिहाई के बाद बंदी अपने हुनर से जीवन यापन कर सकेंगे।
अब साल में 5 अवसरों पर किया जा रिहा
जेल अधीक्षक मानेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि रिहाई नीति के तहत बलात्कार पॉक्सो आदि प्रकरण वाले दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की माफी प्रदान नहीं की जाती है। शासन ने रिहाई नीति में आवश्यक संशोधन किया है। अब आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को वर्ष में 5 अवसरों पर रिहा किया जा रहा। पूर्व में गणतंत्र दिवस, आंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती पर बंदी रिहा होते थे, वहीं अब राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस 15 नवंबर को भी पात्रतानुसार बंदियों को रिहा किया जाता है।
इनको मिली आजादी
विमलाबाई पुत्र शीलचंद जैन, महेश पुत्र खिलान पटेल, रघुनाथ पुत्र देवीप्रसाद आदिवासी, लक्ष्मण पुत्र चिरौंजी सौर बाबू पुत्र दयाराम आदिवासी, श्रीराम उर्फ मुन्ना पुत्र प्रहलाद सिंह राजपूत, विज्जू उर्फ विजय पुत्र श्यामलाल आदिवासी, विनोद पुत्र लीलाधर अहिरवार, हल्ला उर्फ शाहरुख पुत्र सलीम मुसलमान के नाम शामिल हैं।


