संपत्तियों की होगी डिजिटल मैपिंग
23.5 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत घर-घर सर्वे इस माह के अंत से
प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि को मिलेगा बल
हुब्बल्ली. नगर निगम क्षेत्र की सभी संपत्तियों की सटीक पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए 3डी भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सर्वेक्षण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत घर-घर सर्वेक्षण इस माह के अंत से प्रारंभ होगा।
अधिकारियों ने बताया कि आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस सर्वेक्षण पर कुल 23.5 करोड़ रुपए व्यय किए जा रहे हैं। मुंबई स्थित जेनेसिस इंटरनेशनल कंपनी को इसका ठेका दिया गया है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जुलाई तक संपूर्ण जीआईएस सर्वे पूरा किया जाना है।
250 वर्ग किमी क्षेत्र में हवाई सर्वे पूरा
नगर निगम क्षेत्र के लगभग 250 वर्ग किलोमीटर में हवाई सर्वेक्षण तथा ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज (ओआरआई) प्रोसेसिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। 360 डिग्री पैनोरमिक इमेज और रडार सर्वे भी किया गया है। प्रॉपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम (पीटीएमएस) के लिए वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं। कंपनी और निगम के कर्मचारी संयुक्त रूप से 12 जोनों में दो से तीन माह तक घर-घर सर्वेक्षण करेंगे।
डिजिटल बेस मैप और सत्यापन
वर्ष 2025 से पूर्व और वर्तमान सभी संपत्तियों का डेटा वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। रडार सर्वे और ओआरआई के आधार पर तैयार बेस मैप में सडक़ की चौड़ाई, भवन, विद्युत खंभे और अन्य संरचनाओं की जानकारी दर्ज होगी। मोबाइल ऐप से एकत्रित जानकारी का वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों से मिलान किया जाएगा। यदि 90 प्रतिशत तक आंकड़े मेल नहीं खाते हैं तो कंपनी को दोबारा सर्वे करना होगा।
3डी सिटी मॉडल
परियोजना के तहत एलओडी-2 आधारित 3डी सिटी मॉडल भी तैयार किया गया है। इससे किसी भी भवन की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या की जानकारी कार्यालय से ही प्राप्त की जा सकेगी।
केंद्र से प्रोत्साहन अनुदान की उम्मीद
जीआईएस सर्वे के आधार पर नगर निगम को केंद्र सरकार से 50 करोड़ रुपए तक का प्रोत्साहन अनुदान मिलने की उम्मीद है। पहले चरण में 20 करोड़ रुपए और दूसरे चरण में 30 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हो सकती है। अंतिम प्रॉपर्टी कार्ड तैयार होने पर तीसरे चरण में अतिरिक्त 30 करोड़ रुपए का अनुदान भी मिल सकता है।
राजस्व वृद्धि को बल मिलेगा
हुब्बल्ली-धारवाड़ में पहली बार इस स्तर का जीआईएस सर्वे किया जा रहा है। इससे संपत्तियों की सटीक पहचान संभव होगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता व राजस्व वृद्धि को बल मिलेगा।”
–रुद्रेश घाली, आयुक्त, हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम


