बूंदी में 3658 परिवारों को मिले पक्के मकान:पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत निर्माण कार्य जारी, 1.20 लाख तक मिलती है सहायता

बूंदी में 3658 परिवारों को मिले पक्के मकान:पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत निर्माण कार्य जारी, 1.20 लाख तक मिलती है सहायता

बूंदी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 3658 गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले हैं। केंद्र सरकार की यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2016 से संचालित है, जिसका लक्ष्य सभी के लिए आवास सुनिश्चित करना है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान ये आवास पूर्ण हुए हैं। वर्तमान में जिले में 15 हजार 882 मकानों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वर्ष 2024-25 में 3169 आवास पूरे हुए और 10 हजार 74 आवासों पर काम जारी है। वहीं, वर्ष 2025-26 में अब तक 489 आवास पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 5808 आवासों का निर्माण कार्य चल रहा है। योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान बनाने के लिए 1.20 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। पहाड़ी राज्यों, दुर्गम क्षेत्रों और आदिवासी व पिछड़े जिलों में यह राशि 1.30 लाख रुपए तक है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपए और मनरेगा के तहत 90 से 95 दिन की मजदूरी भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को अन्य सरकारी योजनाओं जैसे नल से जल, बिजली कनेक्शन, एलपीजी गैस, स्वच्छ ईंधन और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाओं से भी जोड़ रही है। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार देखा जा रहा है। योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मकान का स्वामित्व महिला के नाम या संयुक्त रूप से रखने को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके। सरल और पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया के तहत पात्र व्यक्ति ग्राम पंचायत या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सत्यापन के बाद राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किस्तों में जमा कराई जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण आज गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन की नई राह खोल रही हैं। यह योजना न केवल पक्के मकान उपलब्ध करा रही है, बल्कि ग्रामीण भारत में विकास की नई तस्वीर भी पेश कर रही हैं।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *