सासाराम से 5 km दूर पहाड़, आस्था और इतिहास का अद्भूत संगम है ताराचंडी मंदिर। चारों तरफ पहाड़ की चट्टानें, हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के बीच प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं मां ताराचंडी। यही वजह है कि ये मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए भी खास है। पौराणिक कथा के मुताबिक, राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने अपने प्राण त्याग दिए। भगवान शिव उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे। सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया। धार्मिक मान्यता है कि सती की दाहिनी आंख इसी स्थान पर गिरी थी। इसी वजह से ताराचंडी धाम को शक्तिपीठ और सिद्ध शक्तिस्थल के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे 51 सिद्ध शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। कैमूर पर्वत श्रृंखला की प्राकृतिक गोद में बसा ये प्राचीन धाम ड्रोन कैमरे से बेहद खूबसूरत नजर आता है। वीडियो देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। सासाराम से 5 km दूर पहाड़, आस्था और इतिहास का अद्भूत संगम है ताराचंडी मंदिर। चारों तरफ पहाड़ की चट्टानें, हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के बीच प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं मां ताराचंडी। यही वजह है कि ये मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए भी खास है। पौराणिक कथा के मुताबिक, राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने अपने प्राण त्याग दिए। भगवान शिव उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे। सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया। धार्मिक मान्यता है कि सती की दाहिनी आंख इसी स्थान पर गिरी थी। इसी वजह से ताराचंडी धाम को शक्तिपीठ और सिद्ध शक्तिस्थल के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे 51 सिद्ध शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। कैमूर पर्वत श्रृंखला की प्राकृतिक गोद में बसा ये प्राचीन धाम ड्रोन कैमरे से बेहद खूबसूरत नजर आता है। वीडियो देखने के लिए ऊपर क्लिक करें।

