रात के करीब 10.45 बजे थे। देवेंद्र मामा ने बेटे की छठी पर ऑर्केस्ट्रा बुलाया था। भोजपुरी गाने पर डांसर नाच रही थी। परिवार और गांव के लोग घर के बाहर जुटे थे। घर के लोग भी डांस कर रहे थे। अचानक से बस आई और रौंदते हुए चली गई। 30 सेकेंड में पूरा माहौल बदल गया। घर के सामने देवेंद्र मामा की लाश पड़ी थी। जिस बेटे के लिए मामा ने छठी का कार्यक्रम रखा था उसी के सामने पिता की मौत हो गई। थोड़ी देर पहले एक रिश्तेदार के मान-मनोव्वल पर वो ऑर्केस्ट्रा पर डांस कर रहे थे। उनके साथ 4 और लोगों की मौत हो गई। ऑर्केस्ट्रा बंद हो चुका था। चीख-पुकार मच गई। महिलाएं रोने लगीं। किसी ने पुलिस को फोन किया और एंबुलेंस को बुलाने लगा। घायलों को अस्पताल भेजा गया। ये कहना है देवेंद्र दुबे के भांजे सूरज का। बेतिया में घर के बाहर बेटे की छठी मनाई जा रही थी। तभी एक तेज रफ्तार बस आई और सबको रौंदते हुए निकल गई। पढ़िए बेतिया बस हादसे की आंखों देखी… देवेंद्र मामा के 4 बच्चे थे। 3 बेटियां और सबसे छोटा एक बेटा। 7 दिन पहले एक और बेटा हुआ था। कल उसी की छठी का कार्यक्रम था। परिवार के लोगों के कहने पर मामा ने ऑर्केस्ट्रा मंगवाया था। बेटे के जन्म को लेकर सभी बहुत खुश थे। रात में खाना खाने के बाद लोग ऑर्केस्ट्रा देख रहे थे। कुछ डांस कर रहे थे, तभी ये सब हो गया। हादसे के बाद बस का ड्राइवर भागने लगा। सामने से एक ट्रक आ गया जिसकी वजह से उसे गाड़ी रोकनी पड़ी। बस में 15 से 20 पैसेंजर्स सवार थे। वो साईं ट्रैवल्स की बस थी। गोरखपुर से बेतिया आ रही थी। 5 लोगों की मौत के बाद लोगों में गुस्सा था। भीड़ बस की और दौड़ पड़ी। बस में सवार पैसेंजर्स जान बचाकर नीचे उतरने लगे। लोगों को उतारने के बाद भीड़ बस में तोड़फोड़ करने लगी। इसी दौरान बस ड्राइवर भाग निकला। पिता से कहा- ऑर्केस्ट्रा देखकर आता हूं, लाश आई हादसे में 28 साल के संजय कुमार की मौत हुई है। संजय के पिता नाथू महतो ने बताया कि देवेंद्र दुबे के घर छठी का कार्यक्रम था। वो घर से कहकर गया था कि ऑर्केस्ट्रा आया है, मैं देखकर आता हूं। मैंने कहा कि रात ज्यादा हो रही है, रहने दो। वो नहीं माना, 11 बजे के आसपास गांव में हल्ला होने लगा। हम लोग बाहर निकले, पता चला की देवेंद्र दुबे के यहां हादसा हो गया है। मेरे बेटे की लाश सड़क पर पड़ी थी। वो हमारे बूढ़ापे का सहारा था। मैंने उसे मना भी किया था, लेकिन वो नहीं माना। उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। जवान बेटा चला गया अब हमा लोगों को कौन सहारा है। लोगों को लेकर दौड़ रहे थे लोग हादसे में 52 साल के बहादुर महतो की भी मौत हुई है। उनके बड़े भाई जयप्रकाश महतो ने बताया कि मेरे भाई खाना खाने के बाद गांव में देवेंद्र दुबे के दूसरे बेटे के छठीयार पर ऑर्कस्ट्रा देखने गए थे। 11 बजे रात में सूचना मिली कि नाच देख रहे लोगों के ऊपर बस से चढ़ गई है। जानकारी मिलते ही मैं देवेंद्र दुबे के घर पहुंचा। वहां लोग चिल्ला रहे थे। भाई की लाश पड़ी थी। 8 से 10 लोगों को लेकर इधर-उधर लेकर लोग दौड़ रहे थे। एंबुलेंस से लोगों को अस्पताल भेजा गया। रात के करीब 10.45 बजे थे। देवेंद्र मामा ने बेटे की छठी पर ऑर्केस्ट्रा बुलाया था। भोजपुरी गाने पर डांसर नाच रही थी। परिवार और गांव के लोग घर के बाहर जुटे थे। घर के लोग भी डांस कर रहे थे। अचानक से बस आई और रौंदते हुए चली गई। 30 सेकेंड में पूरा माहौल बदल गया। घर के सामने देवेंद्र मामा की लाश पड़ी थी। जिस बेटे के लिए मामा ने छठी का कार्यक्रम रखा था उसी के सामने पिता की मौत हो गई। थोड़ी देर पहले एक रिश्तेदार के मान-मनोव्वल पर वो ऑर्केस्ट्रा पर डांस कर रहे थे। उनके साथ 4 और लोगों की मौत हो गई। ऑर्केस्ट्रा बंद हो चुका था। चीख-पुकार मच गई। महिलाएं रोने लगीं। किसी ने पुलिस को फोन किया और एंबुलेंस को बुलाने लगा। घायलों को अस्पताल भेजा गया। ये कहना है देवेंद्र दुबे के भांजे सूरज का। बेतिया में घर के बाहर बेटे की छठी मनाई जा रही थी। तभी एक तेज रफ्तार बस आई और सबको रौंदते हुए निकल गई। पढ़िए बेतिया बस हादसे की आंखों देखी… देवेंद्र मामा के 4 बच्चे थे। 3 बेटियां और सबसे छोटा एक बेटा। 7 दिन पहले एक और बेटा हुआ था। कल उसी की छठी का कार्यक्रम था। परिवार के लोगों के कहने पर मामा ने ऑर्केस्ट्रा मंगवाया था। बेटे के जन्म को लेकर सभी बहुत खुश थे। रात में खाना खाने के बाद लोग ऑर्केस्ट्रा देख रहे थे। कुछ डांस कर रहे थे, तभी ये सब हो गया। हादसे के बाद बस का ड्राइवर भागने लगा। सामने से एक ट्रक आ गया जिसकी वजह से उसे गाड़ी रोकनी पड़ी। बस में 15 से 20 पैसेंजर्स सवार थे। वो साईं ट्रैवल्स की बस थी। गोरखपुर से बेतिया आ रही थी। 5 लोगों की मौत के बाद लोगों में गुस्सा था। भीड़ बस की और दौड़ पड़ी। बस में सवार पैसेंजर्स जान बचाकर नीचे उतरने लगे। लोगों को उतारने के बाद भीड़ बस में तोड़फोड़ करने लगी। इसी दौरान बस ड्राइवर भाग निकला। पिता से कहा- ऑर्केस्ट्रा देखकर आता हूं, लाश आई हादसे में 28 साल के संजय कुमार की मौत हुई है। संजय के पिता नाथू महतो ने बताया कि देवेंद्र दुबे के घर छठी का कार्यक्रम था। वो घर से कहकर गया था कि ऑर्केस्ट्रा आया है, मैं देखकर आता हूं। मैंने कहा कि रात ज्यादा हो रही है, रहने दो। वो नहीं माना, 11 बजे के आसपास गांव में हल्ला होने लगा। हम लोग बाहर निकले, पता चला की देवेंद्र दुबे के यहां हादसा हो गया है। मेरे बेटे की लाश सड़क पर पड़ी थी। वो हमारे बूढ़ापे का सहारा था। मैंने उसे मना भी किया था, लेकिन वो नहीं माना। उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। जवान बेटा चला गया अब हमा लोगों को कौन सहारा है। लोगों को लेकर दौड़ रहे थे लोग हादसे में 52 साल के बहादुर महतो की भी मौत हुई है। उनके बड़े भाई जयप्रकाश महतो ने बताया कि मेरे भाई खाना खाने के बाद गांव में देवेंद्र दुबे के दूसरे बेटे के छठीयार पर ऑर्कस्ट्रा देखने गए थे। 11 बजे रात में सूचना मिली कि नाच देख रहे लोगों के ऊपर बस से चढ़ गई है। जानकारी मिलते ही मैं देवेंद्र दुबे के घर पहुंचा। वहां लोग चिल्ला रहे थे। भाई की लाश पड़ी थी। 8 से 10 लोगों को लेकर इधर-उधर लेकर लोग दौड़ रहे थे। एंबुलेंस से लोगों को अस्पताल भेजा गया।

