अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में वो राज खोला जो सालों से दुनिया के सबसे ताकतवर दफ्तरों की दीवारों के पीछे बंद था।
केरी ने कहा कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन राष्ट्रपतियों से ईरान पर सैन्य हमला करने की मांग की। लेकिन हर बार जवाब ना में आया।
‘वो चाहते थे कि हम हमला करें’
केरी ने जेन साकी के शो ‘द ब्रीफिंग’ में बातचीत के दौरान साफ कहा कि नेतन्याहू के साथ उनकी कई बैठकें हुईं। हर बार एक ही मांग थी। केरी ने बताया कि नेतन्याहू ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सामने यह प्रस्ताव रखा। ओबामा ने मना किया।
पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने भी इस प्रस्ताव को खारिज किया। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन भी ईरान पर आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं माने। और जिस राष्ट्रपति ने हां कही वो थे डोनाल्ड ट्रंप।
नेतन्याहू का चार सूत्री फॉर्मूला क्या था?
केरी ने बताया कि नेतन्याहू सिर्फ हमले की बात नहीं करते थे, उनके पास एक पूरी तैयार योजना थी जिसे केरी ने ‘चार सूत्री पिच’ कहा। इस योजना में चार दावे थे। पहला, हमले से ईरान की नेतृत्व को खत्म किया जा सकता है।
दूसरा, इससे सत्ता पलट हो सकती है। तीसरा, ईरान की सेना को तबाह किया जा सकता है। और चौथा, इससे पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। केरी ने यह भी कहा कि इन बैठकों की जो रिपोर्टें सामने आई हैं वो उन्हें सच्ची लगती हैं।
तो क्या ईरान की जंग नेतन्याहू का पुराना सपना था?
तीन अलग-अलग अमेरिकी राष्ट्रपति, तीन अलग-अलग दौर, तीन अलग-अलग सरकारें। लेकिन हर बार एक ही जवाब। नहीं। इसका मतलब यह है कि अमेरिका की पिछली तीन सरकारों ने नेतन्याहू की इस योजना को खतरनाक और गैरजरूरी माना।
जब ट्रंप दूसरी बार व्हाइट हाउस पहुंचे तो पासा पलट गया। और आज इस्लामाबाद में जो बातचीत हो रही है, जो जंग रुकने की उम्मीद जगी है, उसके पीछे की पूरी कहानी दरअसल उन्हीं बंद कमरों से शुरू होती है जहां नेतन्याहू अपनी चार सूत्री योजना लेकर जाते थे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस्लामाबाद बैठक के बाद युद्ध को लेकर क्या निष्कर्ष निकलता है।


