राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का 29वां दीक्षांत एवं शिष्योपनयनीय संस्कार समारोह आज स्वतंत्रता भवन, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया। जिस्में 700 छात्रों को डिग्री मिली। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। पहले देखें तस्वीर… काशी की परंपरा और आयुर्वेद की विरासत मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा – भगवान शिव की नगरी काशी प्राचीन काल से आयुर्वेद की महान परंपराओं का केंद्र रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि काशी को अष्टांग आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा की उद्गमस्थली माना जाता है, जहाँ काशी नरेश धन्वंतरि दिवोदास की परंपरा से आयुर्वेदिक ज्ञान का विकास हुआ। आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं, जीवन दर्शन मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का विज्ञान है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में गुरु–शिष्य परंपरा के माध्यम से ही आयुर्वेदिक ज्ञान सुरक्षित और विकसित हुआ। उन्होंने महान आयुर्वेदाचार्यों जैसे चरक, सुश्रुत और वाग्भट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विद्वानों ने इसी परंपरा के माध्यम से आयुर्वेद को विश्व के सामने प्रतिष्ठित किया। आजीवन उपलब्धि सम्मान समारोह के दौरान आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई वरिष्ठ वैद्यों को सम्मानित किया गया। आजीवन उपलब्धि सम्मान से सम्मानित होने वालों में वैद्य निर्मला शर्मा,केवल कृष्ण ठाकराल,गिरधारी लाल मिश्रा इसके अतिरिक्त कई प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्यों और चिकित्सकों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।


