पटना में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। देवी दर्शन के लिए सप्तमी से पट खुल जाएंगे। इस बार श्रद्धालुओं को खास तरह की दुर्गा प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी। मूर्तिकार जितेंद्र ने गरम मसाला, सीप, मौली, कॉर्न फ्लेक्स और सोलह श्रृंगार का इस्तेमाल कर पांच मूर्तियां बनाई हैं, जो इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगी। ये सारी प्रतिमा 6-7 फीट की हैं और इसे बनाने में करीब 4 लाख का खर्च आया है। मूर्तिकार जितेंद्र और उनके भाई चंदन, पिछले एक महीने से इन प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे थे। देखें 5 अनोखी मूर्ति की तस्वीरें 25 किलो गरम मसाला का इस्तेमाल कर बनाई प्रतिमा मूर्तिकार जितेंद्र ने बताया कि गरम मसाला का इस्तेमाल कर प्रतिमा बनाने में 25 किलो मसाला का इस्तेमाल किया गया है। इसमें दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, जावित्री, गोलकी, धनिया, सौंफ और लौंग जैसे मसाले प्रतिमा में लगाए गए हैं। वहीं, बैकग्राउंड को तेज पत्ता और लाल मिर्च से सजाया गया है। इसके साथ ही फूल चक्री मसाले का भी इस्तेमाल किया गया है। 500 रबर और 1000 पेंसिल से मूर्ति का किया निर्माण वहीं, उन्होंने बताया कि सोलह श्रृंगार वाली प्रतिमा के लिए बिंदी, आईना, कंघी, मेहंदी, काजल, पायल, मंगलसूत्र, काजल, पाउडर, नेल पेंट, अल्ता, लिपस्टिक जैसी चीजों का इस्तेमाल किया है। करीब 5000 बिंदी, 1500 आईना, 500 कंघी और 1200 काजल पेंसिल इस प्रतिमा में लगा है। माता के हाथ और चेहरे को पूरी तरह से बिंदी से ही बनाया गया है। वहीं, साड़ी के एक लेयर में रंग बिरंगी बिंदी लगाई गई है। 10 हज़ार सीप का इस्तेमाल कर बनाई गई भारत माता की प्रतिमा माता की तीसरी प्रतिमा 10 हज़ार सीप का इस्तेमाल कर बनाया गया है। इसमें अलग-अलग साइज और रंग के शंख के साथ घोंघे भी दिख रहे हैं। इस प्रतिमा को भारत माता का रूप दिया गया है और माता पीछे भारत का नक्शा भी सीप से बनाया गया है। वहीं, 5 किलो कॉर्न फ्लेक्स और 15 हज़ार पीस मौली का इस्तेमाल कर भी प्रतिमाओं का निर्माण हुआ है। बांस, पुआल और कागज़ से बनी है इको फ्रेंडली मूर्ति मूर्तिकार चंदन कुमार ने बताया कि ये सभी प्रतिमाएं पूरी तरह से इको फ्रेंडली है, जिसमें बांस, पुआल और कागज़ का इस्तेमाल किया गया है। इन सभी प्रतिमाओं को चीटियों से बचाने के लिए लक्ष्मण रेखा और ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया है। मूर्ति के आसपास इन चीजों को छिंटा गया है, ताकि कोई भी कीड़े-मकौड़े प्रतिमा को खराब न करे। 20 सालों से कर रहे मूर्ति का निर्माण जितेंद्र पिछले 20 सालों से अनोखी दुर्गा प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं। बाद में उनके भाई चंदन कुमार भी उनका हाथ बंटाने लगे। जितेंद्र ने बताया कि, दूसरे मूर्तिकार को देखकर उन्हें इसमें आने की लालसा हुई। कहीं भी इसके लिए ट्रेनिंग नहीं ली है। मूर्तियों का धीरे-धीरे निर्माण करने के बाद वह खुद ही इसके एक्सपर्ट बन गए। जितेंद्र दुर्गा पूजा में मूर्ति निर्माण के अलावा अन्य दिनों में प्राइवेट नौकरी करके अपनी जीविका चलाते हैं। कभी वह जूस की दुकान चलाते हैं। अब जितेंद्र मूर्ति बनाने में एक्सपर्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा, हर एक साल कुछ नया करने का आइडिया आता है। हर बार डिफरेंट ही रहता है। कभी कोई ऐसा थीम मिल ही जाता है, कभी अपने मन से सोच कर करता हूं तो कभी संस्था वाले भी सजेस्ट करते हैं। पटना में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। देवी दर्शन के लिए सप्तमी से पट खुल जाएंगे। इस बार श्रद्धालुओं को खास तरह की दुर्गा प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी। मूर्तिकार जितेंद्र ने गरम मसाला, सीप, मौली, कॉर्न फ्लेक्स और सोलह श्रृंगार का इस्तेमाल कर पांच मूर्तियां बनाई हैं, जो इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगी। ये सारी प्रतिमा 6-7 फीट की हैं और इसे बनाने में करीब 4 लाख का खर्च आया है। मूर्तिकार जितेंद्र और उनके भाई चंदन, पिछले एक महीने से इन प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे थे। देखें 5 अनोखी मूर्ति की तस्वीरें 25 किलो गरम मसाला का इस्तेमाल कर बनाई प्रतिमा मूर्तिकार जितेंद्र ने बताया कि गरम मसाला का इस्तेमाल कर प्रतिमा बनाने में 25 किलो मसाला का इस्तेमाल किया गया है। इसमें दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, जावित्री, गोलकी, धनिया, सौंफ और लौंग जैसे मसाले प्रतिमा में लगाए गए हैं। वहीं, बैकग्राउंड को तेज पत्ता और लाल मिर्च से सजाया गया है। इसके साथ ही फूल चक्री मसाले का भी इस्तेमाल किया गया है। 500 रबर और 1000 पेंसिल से मूर्ति का किया निर्माण वहीं, उन्होंने बताया कि सोलह श्रृंगार वाली प्रतिमा के लिए बिंदी, आईना, कंघी, मेहंदी, काजल, पायल, मंगलसूत्र, काजल, पाउडर, नेल पेंट, अल्ता, लिपस्टिक जैसी चीजों का इस्तेमाल किया है। करीब 5000 बिंदी, 1500 आईना, 500 कंघी और 1200 काजल पेंसिल इस प्रतिमा में लगा है। माता के हाथ और चेहरे को पूरी तरह से बिंदी से ही बनाया गया है। वहीं, साड़ी के एक लेयर में रंग बिरंगी बिंदी लगाई गई है। 10 हज़ार सीप का इस्तेमाल कर बनाई गई भारत माता की प्रतिमा माता की तीसरी प्रतिमा 10 हज़ार सीप का इस्तेमाल कर बनाया गया है। इसमें अलग-अलग साइज और रंग के शंख के साथ घोंघे भी दिख रहे हैं। इस प्रतिमा को भारत माता का रूप दिया गया है और माता पीछे भारत का नक्शा भी सीप से बनाया गया है। वहीं, 5 किलो कॉर्न फ्लेक्स और 15 हज़ार पीस मौली का इस्तेमाल कर भी प्रतिमाओं का निर्माण हुआ है। बांस, पुआल और कागज़ से बनी है इको फ्रेंडली मूर्ति मूर्तिकार चंदन कुमार ने बताया कि ये सभी प्रतिमाएं पूरी तरह से इको फ्रेंडली है, जिसमें बांस, पुआल और कागज़ का इस्तेमाल किया गया है। इन सभी प्रतिमाओं को चीटियों से बचाने के लिए लक्ष्मण रेखा और ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया है। मूर्ति के आसपास इन चीजों को छिंटा गया है, ताकि कोई भी कीड़े-मकौड़े प्रतिमा को खराब न करे। 20 सालों से कर रहे मूर्ति का निर्माण जितेंद्र पिछले 20 सालों से अनोखी दुर्गा प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं। बाद में उनके भाई चंदन कुमार भी उनका हाथ बंटाने लगे। जितेंद्र ने बताया कि, दूसरे मूर्तिकार को देखकर उन्हें इसमें आने की लालसा हुई। कहीं भी इसके लिए ट्रेनिंग नहीं ली है। मूर्तियों का धीरे-धीरे निर्माण करने के बाद वह खुद ही इसके एक्सपर्ट बन गए। जितेंद्र दुर्गा पूजा में मूर्ति निर्माण के अलावा अन्य दिनों में प्राइवेट नौकरी करके अपनी जीविका चलाते हैं। कभी वह जूस की दुकान चलाते हैं। अब जितेंद्र मूर्ति बनाने में एक्सपर्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा, हर एक साल कुछ नया करने का आइडिया आता है। हर बार डिफरेंट ही रहता है। कभी कोई ऐसा थीम मिल ही जाता है, कभी अपने मन से सोच कर करता हूं तो कभी संस्था वाले भी सजेस्ट करते हैं।

