मुजफ्फरनगर के 2500 लोग खाड़ी देशों में फंसे:ईरान-इजरायल युद्ध के कारण परिजनों की चिंता बढ़ी, प्रशासन ने हेल्पलाइन जारी की

मुजफ्फरनगर के 2500 लोग खाड़ी देशों में फंसे:ईरान-इजरायल युद्ध के कारण परिजनों की चिंता बढ़ी, प्रशासन ने हेल्पलाइन जारी की

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के कुटेसरा गांव के लगभग 2500 लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात के कारण इन लोगों के परिजन चिंतित हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग सऊदी अरब और दुबई जैसे खाड़ी देशों में काम करने गए थे। परिजनों के अनुसार, वहां फंसे उनके परिवार के सदस्य बता रहे हैं कि उनके ऊपर से मिसाइलें गुजरती हैं और अमेरिकी ठिकानों पर गिरती हैं। हालांकि, वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। मुजफ्फरनगर में मौजूद इन परिवारों ने भारत सरकार से अपील की है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो उनके अपनों को सुरक्षित वापस लाया जाए। जिला प्रशासन ने जिला कलेक्ट्रेट में एक आपातकालीन कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसका हेल्पलाइन नंबर 1077 भी जारी किया गया है। इस नंबर पर युद्धग्रस्त देशों में फंसे किसी भी व्यक्ति की जानकारी दी जा सकती है और सहायता मांगी जा सकती है। कुटेसरा गांव के पूर्व जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद कामिल ने बताया कि उनके गांव के लगभग 2000 से 2500 युवक खाड़ी देशों जैसे दुबई, कतर और सऊदी अरब में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान में बहुत कम लोग होंगे, बाकी सभी अन्य खाड़ी देशों में हैं। परिजनों का कहना है कि गांव से करीब ढाई हजार लड़के बाहर रोजगार के लिए गए हुए हैं। एक परिवार के पांच भतीजे, एक बेटा और छोटा भाई भी वहीं कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। कोई क्लीनिंग का काम कर रहा है, कोई सिलाई का और कुछ मजदूरी कर रहे हैं। परिजनों ने बताया कि वहां हमलों की खबरें मिल रही हैं। बच्चे फोन पर बताते रहते हैं कि ऊपर से मिसाइलें गुजरती हैं और कई बार ठिकानों पर गिरती हैं। हालांकि अब तक उनके रहने वाली जगहों पर कोई सीधी क्षति नहीं हुई है। परिवार के लोगों ने बताया कि रोजाना बात हो रही है। हालात को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन फिलहाल बच्चे खुद को सुरक्षित बता रहे हैं। ईद पर आने के लिए कुछ युवकों के टिकट भी बुक हो चुके थे, लेकिन मौजूदा हालात के कारण यात्रा टल सकती है। टिकट मिलना भी मुश्किल हो गया है। परिजनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि विदेशों में रह रहे भारतीय युवकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वदेश लाने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि न्यूज में कई भारतीयों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे परिवारों में डर बना हुआ है। हालांकि युवक हिम्मत बनाए हुए हैं और परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं। तीनों बेटे रियाद में मजदूरी कर रहे गांव कुटेसरा, कस्बा चरथावल निवासी मोहम्मद मतलूब ने बताया कि उनके तीनों बेटे सऊदी अरब के रियाद में मजदूरी कर रहे हैं। बेटों के नाम नौशाद, शहजाद और सरफराज हैं। उन्होंने बताया कि एक बेटा करीब सात-आठ साल से वहां रह रहा है, दूसरा दो साल से और तीसरा करीब डेढ़ साल से काम कर रहा है। घर में डर का माहौल है, हालांकि बच्चों से लगातार बात हो रही है। मतलूब ने कहा कि कुछ बच्चे ईद पर घर आने वाले थे और टिकट भी बुक हो गए थे, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण फ्लाइट्स प्रभावित हो गई हैं। गांव के लगभग हर घर से एक-दो युवक खाड़ी देशों—कुवैत, रियाद और दुबई—में काम कर रहे हैं। परिजनों ने सरकार से मांग की है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो बच्चों को सुरक्षित देश वापस लाने की व्यवस्था की जाए। दो बेटे सऊदी में कार्यरत, मिसाइलों की आवाज से दहशत का माहौल ग्रामीण मोहम्मद इंतजार ने बताया कि उनके दो बेटे—सलमान और नाजिम—सऊदी अरब में मजदूरी कर रहे हैं। उनसे रोजाना बात हो रही है। उन्होंने बताया कि मिसाइलें उनके क्षेत्र के ऊपर से गुजरती हैं, जिससे दहशत का माहौल बना रहता है। हालांकि बेटे सुरक्षित हैं और किसी प्रकार की सीधी परेशानी नहीं है। उन्होंने बताया कि एक बेटा करीब दस साल से वहां काम कर रहा है और हर दो साल में घर आता है। इस बार ईद पर आने की योजना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण वह नहीं आ पाएगा। परिजनों का कहना है कि घर पर माता-पिता को चिंता बनी रहती है। सरकार से अपील की गई है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और यदि स्थिति गंभीर हो तो उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाया जाए।

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