सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के धर्मस्थला में 17 साल की छात्रा के रेप-मर्डर केस की दोबारा जांच का आदेश दिया। मामला 2012 का है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कर्नाटक सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने और तीन महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले जिस तरह जांच हुई उसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़ित छात्रा की मां की याचिका पर दिया।
SIT में पुराने जांच अधिकारियों नहीं रखने का आदेश पीड़ित को न्याय दिलाना समाज का कर्तव्य सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से आरोपी बनाए गए व्यक्ति के साथ हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है। लेकिन बेरहमी से रेप और मर्डर की शिकार नाबालिग के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता। अगर समाज ऐसे जघन्य अपराध में सही जांच और असली अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय नहीं देता, तो वह अपना कर्तव्य निभाने में असफल होगा। ————————- ये खबर भी पढ़ें: गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई तो एक्शन गैरकानूनी कहलाएगा:दोबारा पकड़ने से पहले मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी; सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नियम सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता है और जांच एजेंसी उसे दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है, तो पुलिस सीधे उसे नहीं पकड़ सकती। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। पढ़ें पूरी खबर…
14 साल पुराने रेप मर्डर केस में फिर जांच होगी:सुप्रीम कोर्ट बोला-जिस तरह जांच हुई उसने अंतरात्मा को झकझोर दिया, 3 महीने में रिपोर्ट मांगी

