हिमाचल कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर एक बार फिर सियासी खींचतान सामने आई है। वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के हालिया कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर सवा उठाए। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी चार-साढ़े चार साल ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री के रोहड़ू दौरे के दौरान लगाए गए पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने और मंच से उनका नाम नहीं लिए जाने पर भी प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। प्रतिभा सिंह मंगलवार को रोहड़ू पहुंचीं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसी पार्टी नहीं थी, जहां इतने बड़े नेता को इतनी जल्दी भुला दिया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का हर कार्यक्रम में स्मरण किया जाता है तो छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह को क्यों याद नहीं किया गया। ‘जब आयोजक ने नहीं लगाए तो अपने लोग ही पोस्टर लगा देते: प्रतिभा प्रतिभा सिंह ने कहा कि यदि कार्यक्रम के आयोजकों ने वीरभद्र सिंह के पोस्टर नहीं लगाए थे तो कम से कम कांग्रेस के अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को उनके पोस्टर-बैनर लगाने चाहिए थे। उनका कहना था कि वीरभद्र सिंह का हिमाचल के विकास में बड़ा योगदान रहा है और पार्टी को उनकी विरासत को याद रखना चाहिए। लंबे समय तक वीरभद्र की कर्म भूमि रहा रोहडू प्रतिभा सिंह की इस नाराजगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मामला रोहड़ू का है। रोहड़ू लंबे समय तक वीरभद्र सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है। 2025 में भी यहां वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यही वजह है कि प्रतिभा सिंह के बयान को कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह परिवार और संगठन के मौजूदा नेतृत्व के बीच मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इन कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर या नाम न होने को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई ऐसी आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, जिससे इसे किसी सुनियोजित राजनीतिक फैसले के तौर पर निष्कर्षित किया जा सके। सुक्खू-वीरभद्र खेमे की पुरानी राजनीतिक खींचतान हिमाचल कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भी वीरभद्र परिवार की दावेदारी और सुक्खू के चयन के बीच पार्टी के भीतर खींचतान सामने आई थी। बाद में सुक्खू मुख्यमंत्री बने, जबकि प्रतिभा सिंह उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहीं और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिली। हालांकि, सुक्खू ने जून 2026 में वीरभद्र सिंह की जयंती पर रिज मैदान में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि वीरभद्र सिंह छह बार मुख्यमंत्री रहे और प्रदेश के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र, कांग्रेस की राजनीति में अब भी प्रभाव वीरभद्र सिंह 1983 से 2017 के बीच छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनका राजनीतिक जीवन करीब छह दशक लंबा रहा और वे कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली हिमाचली नेताओं में शामिल रहे। ऐसे में रोहड़ू में प्रतिभा सिंह का यह बयान महज एक परिवार की नाराजगी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि कांग्रेस में वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही बहस को फिर सामने लाता है। खास तौर पर तब, जब वीरभद्र परिवार की ओर से पहले भी संगठन और सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग मौकों पर असहमति सामने आती रही है।

