हाथरस पालिकाध्यक्ष श्वेता चौधरी को हाईकोर्ट से राहत:कूड़ा कलेक्शन टेंडर में लापरवाही के आरोपों पर हुई थी कार्रवाई, समर्थकों ने ढोल-नगाड़े बजाकर मनाई खुशी

हाथरस पालिकाध्यक्ष श्वेता चौधरी को हाईकोर्ट से राहत:कूड़ा कलेक्शन टेंडर में लापरवाही के आरोपों पर हुई थी कार्रवाई, समर्थकों ने ढोल-नगाड़े बजाकर मनाई खुशी

हाथरस नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्वेता चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने के शासन के आदेश को खारिज कर दिया है। फैसले की जानकारी मिलने के बाद पालिकाध्यक्ष के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने उनके साथ खुशी मनाई और ढोल-नगाड़े बजाए। मामले की शुरुआत 30 अगस्त 2024 को हुई थी। वार्ड-35 के सभासद मनीष अग्रवाल (पीपा) और वार्ड-34 के सभासद पं. सुनील अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर नगर पालिका के 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की निविदा प्रक्रिया और कार्यादेश जारी करने में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि इससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान हुआ। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति ने निविदा प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन ने सीज किए थे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के परीक्षण के बाद शासन ने श्वेता चौधरी को प्रथमदृष्टया कर्तव्य पालन में चूक, गंभीर प्रशासनिक अनियमितता, नगर पालिका निधि को नुकसान पहुंचाने, निधि के दुरुपयोग और पालिका हित के विपरीत कार्य करने का दोषी माना था। इसके बाद उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48(2) के तहत उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए थे। साथ ही अपर जिलाधिकारी को नगर पालिका का प्रशासक नियुक्त किया गया था। हाईकोर्ट में दी थी शासन के आदेश को चुनौती शासन की कार्रवाई के खिलाफ श्वेता चौधरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अब हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद पालिकाध्यक्ष के समर्थकों ने खुशी जताई और ढोल-नगाड़े बजाकर जश्न मनाया।

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