हाईकोर्ट बोला- साइबर फ्रॉड समाज के लिए ‘साइलेंट वायरस’:कहा- डिजिटल बदलाव हुए तो कमज़ोरियां का फ़ायदा क्रिमिनल उठा रहे

हाईकोर्ट बोला- साइबर फ्रॉड समाज के लिए ‘साइलेंट वायरस’:कहा- डिजिटल बदलाव हुए तो कमज़ोरियां का फ़ायदा क्रिमिनल उठा रहे

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की है।
कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत में टेक्नोलॉजी के तेज़ी से विकास और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की वजह से साइबर-क्राइम में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है जिनमें फ़िशिंग स्कैम, रैंसमवेयर हमले, साइबर-स्टॉकिंग और डेटा ब्रीच शामिल है।
बदलाव तो हुए लेकिन कमजोरियां भी आईं हाईकोर्ट ने कहा ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों ने देश के डिजिटल बदलाव को तो तेज़ किया है लेकिन साथ ही ऐसी कमज़ोरियां भी सामने आई है जिनका फ़ायदा साइबर-क्रिमिनल उठाते है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तकनीक का प्रसार जितना तेज हुआ है साइबर अपराधियों की सक्रियता भी उतनी ही खतरनाक रूप ले चुकी है।
पूरे देश को प्रभावित कर रहा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि साइबर-क्राइम पूरे देश में लोगों को हर क्षेत्र में प्रभावित कर रहा है। अखबार, मैगज़ीन, यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया साइबर-क्राइम के अनगिनत बेगुनाह पीड़ितों की आपबीती से भरे पड़े है जिनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई ठग ली गई है। कोर्ट ने चिंता व्यक्त की और कहा कि हमारे समाज में ऐसे साइबर-क्राइम बहुत ज़्यादा हो रहे है और इन्हें रोकना ज़रूरी है। साइबर क्राइम साइलेंट वायरल कोर्ट ने कहा हमारे देश में साइबर-क्राइम एक साइलेंट वायरस की तरह है जो चुपके से नुकसान पहुंचाता है और समाज को सिर्फ़ पैसे का ही नहीं बल्कि भरोसे, सुरक्षा और तरक्की का भी नुकसान पहुँचाता है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सबूतों और रिकॉर्ड में लाए गए डॉक्यूमेंट्स को देखने से आवेदक को बेल पर रिहा करने का कोई नया आधार नहीं बनता है।
आवेदक ने पब्लिक सेक्टर के सरकारी बैंक के साथ जो फ्रॉड किया है वह बहुत संगीन है और इस तरह के क्राइम को बढ़ावा देना समाज के लिए एक बुरा उदाहरण है और अगर आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाता है तो प्रॉसिक्यूशन के सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने की पूरी संभावना है। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने नैनीताल बैंक के सर्वर को हैक कर 16 करोड़ रुपये से अधिक की रकम उड़ाने और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी विदेशी नागरिक उमेलाकेइ एमेका उर्फ एलेक्स की दूसरी जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया है। गौतमबुद्ध नगर मामले पर गंभीर टिप्पणियां यह मामला गौतमबुद्ध नगर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज केस से जुड़ा है जहां दस जुलाई 2024 को नोएडा सेक्टर 62 के नैनीताल बैंक लिमिटेड के आईटी मैनेजर ने सुमित श्रीवास्तव ने धोखाधड़ी वाले लेन-देन को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120B, 201 IPC और आईटी की धारा 66/66C में मामला दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि यहां बहुत बड़ा एक साइबर क्राइम फ्रॉड से जुड़ा हुआ मामला है। आरोपी की पहली जमानत याचिका जनवरी 2026 में हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है जिसके बाद आरोपी विदेशी नागरिक ने जेल से बाहर आने के लिए दूसरी जमानत याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी। नैनीताल बैंक का सर्वर हैक हुआ था इस मामले में आवेदक आरोपी नाइजीरियाई नागरिक उमेलाकेइ एमेका उर्फ एलेक्स पर नैनीताल बैंक का सर्वर हैक कर 16 करोड़ रुपये की साइबर फ्रॉड का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपी एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है और दो प्रतिशत कमीशन पर म्यूल अकाउंट्स लेकर ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। आरोपी की ओर से सह-अभियुक्तों की जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर जमानत मांगी गई थी।
निर्दोश बताते हुए झूठा फंसाने का आरोप लगाया आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी आवेदक निर्दोष है। उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और वह 2025 से जेल में बंद है। आवेदक के खिलाफ आपराधिक इतिहास के दो मामले है जिनके बारे में पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया जा चुका है और ज़मानत पर रिहा होने पर उसके न्याय की प्रक्रिया से भागने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। वहीं राज्य सरकार की तरफ से ज़मानत अर्ज़ी का विरोध करते हुए कहा गया कि आवेदक ने दूसरे सह-आरोपियों के साथ मिलकर नैनीताल बैंक का सर्वर हैक करके 16 करोड़ रुपये और उससे ज़्यादा की रकम निकाल ली है।
सरकारी वकील ने कहा कि आवेदक सह-आरोपी मोहम्मद शाहवेज़ उर्फ़ शानू से म्यूल अकाउंट लेता था और बदले में आवेदक सह-आरोपी मोहम्मद शाहवेज़ को दो परसेंट कमीशन देता था और यह बात जांच के दौरान सह-आरोपी दानिश के बयान में साफ़ तौर पर सामने आई है। आवेदक एक NRI है और अगर उसे ज़मानत पर रिहा किया जाता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि आवेदक की मौजूदगी पेंडिंग ट्रायल में नहीं हो पाएगी। जांच के दौरान तैयार किए गए और रिकॉर्ड में लाए गए डॉक्यूमेंट्स से यह पूरी तरह साबित हो गया है कि आवेदक साइबर फ्रॉड के क्राइम में शामिल सिंडिकेट का एक एक्टिव मेंबर है। ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही से पता चलता है कि आवेदक के खिलाफ आरोप अभी तय नहीं हुए है। जमानत अर्जी सिरे से खारिज की कोर्ट ने सभी पक्षों सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल समानता जमानत का एकमात्र आधार नहीं हो सकती बल्कि आरोपी की भूमिका, अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को देखना आवश्यक है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे देश में साइबर-क्राइम एक साइलेंट वायरस की तरह है जो चुपके से नुकसान पहुँचाने वाला है और समाज को सिर्फ़ पैसे का ही नहीं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और तरक्की का भी नुकसान पहुँचा रहा है। आरोपी के विदेशी नागरिक होने के कारण उसके फरार होने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।

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