‘साल 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या ओडिशा में हुई थी। हत्या के कारणों की जांच के लिए बीजू जनता दल की सरकार के जांच आयोग बनाई गई थी। जांच आयोग की रिपोर्ट ही गायब हो गई। ये हिन्दू समाज के लिए अघात की बात है।’ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष ने शनिवार को समस्तीपुर में ये बातें कही। अंबरीष समस्तीपुर में शनिवार से शुरू हुए विश्व हिंदू परिषद उत्तर बिहार की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। परिषद की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक शहर के खाटू श्याम बिहारी मंदिर कैंपस में शुरू हुई, जो रविवार को संपन्न होगी। बैठक में उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से करीब 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। ‘बैठक में लक्ष्मणानंद की हत्या की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा’ परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष ने कहा कि पिछले दिनों दिल्ली की बैठक में लक्ष्मणानंद की हत्या के मामले की सीबीआई से जांच करने के साथ ही हत्या की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके साथ ही धर्मांतरण को लेकर जो कुछ उस रिपोर्ट में है, उसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि लक्षमणाजी की हत्या और कुटुम्ब को लेकर जो प्रस्ताव पारित किया गया था। उस प्रस्ताव पर यहां विचार किया जाएगा। संत रविदास का भी अंबरीष ने किया जिक्र दैनिक भास्कर से बातचीत में अंबरीष ने कहा कि संत रविदास सामाजिक समरसता के पुरोधा थे। उनका पूरा जीवन बताता है कि हिन्दू समाज में जन्म के आधार पर कोई भेद नहीं था। संत रविदास चमड़े का काम करने वाले थे, जबकि उनकी शिष्या मीराबाई मेवाड़ की रानी थी। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने जिस तरह सिकंदर लोदी के राज्य में अपने धर्म पर दृढ़ रह कर काम किया था। उसे लेकर संगठन देश भर में जाने वाला है। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन के मुख्य नायक अशोक की शताब्दी वर्ष भी इस बार मनाया जाएगा। ‘हिंदू समाज के खिलाफ विश्वस्तरीय साजिश चल रही, हम मुकाबले करेंगे’ अंबरीष ने कहा कि हिन्दू समाज के खिलाफ विश्वस्तरीय साजिश चल रही है, उससे हिन्दू समाज मुकाबला करेगा। षड्यंत्र को समाप्त करेगा। बैठक के दौरान परिषद के केंद्रीय मंत्री के अलावा क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय प्रताप, वीरेंद्र विमल, संजीव सिंह राणा, रणधीर सिंह, त्रिलोकी नाथ आदि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय ने की। बैठक का उद्घाटन विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष, क्षेत्रीय मंत्री राणा रणबीर सिंह, संयोजक प्रकाश पांडे ने संयुक्त रूप से मां भारती और भगवान श्री राम की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर किया। ओडिशा में हुई थी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या साल 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की ओडिशा के खंडामाल जिले में स्थित उनके आश्रम में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन 4 शिष्यों समेत गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तूबर 2016 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के मामले में खंडामाल की फूलबानी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 8 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हत्याकांड को माओवादियों और स्थानीय साजिशकर्ताओं ने मिलकर अंजाम दिया था। माओवादी नेता सब्यसाची पांडा को इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। उसे जुलाई 2014 में गिरफ्तार किया गया था। दोषी ठहराए गए लोगों में 7 स्थानीय निवासी (गदानाथ चालानसेठ, बिजॉय कुमार श्यामसेठ, बुद्ध नायक, सनातन बड़ामांझी, दुर्योधन सुनामांझी, भास्कर सुनामांझी, मुंडा बड़ामांझी) और 1 आंध्र प्रदेश का माओवादी नेता (पुलारी रामा राव उर्फ उदय) शामिल थे। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने उड़ीसा हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इन सजायाफ्ता आरोपियों को जमानत दे दी थी। अदालत ने जमानत का आधार यह माना कि आरोपी 10 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और उनकी अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई में देरी हो रही है। ‘साल 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या ओडिशा में हुई थी। हत्या के कारणों की जांच के लिए बीजू जनता दल की सरकार के जांच आयोग बनाई गई थी। जांच आयोग की रिपोर्ट ही गायब हो गई। ये हिन्दू समाज के लिए अघात की बात है।’ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष ने शनिवार को समस्तीपुर में ये बातें कही। अंबरीष समस्तीपुर में शनिवार से शुरू हुए विश्व हिंदू परिषद उत्तर बिहार की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। परिषद की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक शहर के खाटू श्याम बिहारी मंदिर कैंपस में शुरू हुई, जो रविवार को संपन्न होगी। बैठक में उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से करीब 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। ‘बैठक में लक्ष्मणानंद की हत्या की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा’ परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष ने कहा कि पिछले दिनों दिल्ली की बैठक में लक्ष्मणानंद की हत्या के मामले की सीबीआई से जांच करने के साथ ही हत्या की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके साथ ही धर्मांतरण को लेकर जो कुछ उस रिपोर्ट में है, उसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि लक्षमणाजी की हत्या और कुटुम्ब को लेकर जो प्रस्ताव पारित किया गया था। उस प्रस्ताव पर यहां विचार किया जाएगा। संत रविदास का भी अंबरीष ने किया जिक्र दैनिक भास्कर से बातचीत में अंबरीष ने कहा कि संत रविदास सामाजिक समरसता के पुरोधा थे। उनका पूरा जीवन बताता है कि हिन्दू समाज में जन्म के आधार पर कोई भेद नहीं था। संत रविदास चमड़े का काम करने वाले थे, जबकि उनकी शिष्या मीराबाई मेवाड़ की रानी थी। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने जिस तरह सिकंदर लोदी के राज्य में अपने धर्म पर दृढ़ रह कर काम किया था। उसे लेकर संगठन देश भर में जाने वाला है। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन के मुख्य नायक अशोक की शताब्दी वर्ष भी इस बार मनाया जाएगा। ‘हिंदू समाज के खिलाफ विश्वस्तरीय साजिश चल रही, हम मुकाबले करेंगे’ अंबरीष ने कहा कि हिन्दू समाज के खिलाफ विश्वस्तरीय साजिश चल रही है, उससे हिन्दू समाज मुकाबला करेगा। षड्यंत्र को समाप्त करेगा। बैठक के दौरान परिषद के केंद्रीय मंत्री के अलावा क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय प्रताप, वीरेंद्र विमल, संजीव सिंह राणा, रणधीर सिंह, त्रिलोकी नाथ आदि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय ने की। बैठक का उद्घाटन विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीष, क्षेत्रीय मंत्री राणा रणबीर सिंह, संयोजक प्रकाश पांडे ने संयुक्त रूप से मां भारती और भगवान श्री राम की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर किया। ओडिशा में हुई थी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या साल 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की ओडिशा के खंडामाल जिले में स्थित उनके आश्रम में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन 4 शिष्यों समेत गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तूबर 2016 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के मामले में खंडामाल की फूलबानी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 8 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हत्याकांड को माओवादियों और स्थानीय साजिशकर्ताओं ने मिलकर अंजाम दिया था। माओवादी नेता सब्यसाची पांडा को इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। उसे जुलाई 2014 में गिरफ्तार किया गया था। दोषी ठहराए गए लोगों में 7 स्थानीय निवासी (गदानाथ चालानसेठ, बिजॉय कुमार श्यामसेठ, बुद्ध नायक, सनातन बड़ामांझी, दुर्योधन सुनामांझी, भास्कर सुनामांझी, मुंडा बड़ामांझी) और 1 आंध्र प्रदेश का माओवादी नेता (पुलारी रामा राव उर्फ उदय) शामिल थे। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने उड़ीसा हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इन सजायाफ्ता आरोपियों को जमानत दे दी थी। अदालत ने जमानत का आधार यह माना कि आरोपी 10 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और उनकी अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई में देरी हो रही है।

