सावन मास के अंतिम दिन सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर रामनगरी अयोध्या में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी के तट पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई, स्नान-दान किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद अब श्रद्धालु शाम तक अयोध्या से रवाना हो चुके हैं।हलांकि आज झूलन उत्सव की अंतिम शाम शेष है।
सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं का जत्था प्राचीन एवं प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचा, जहां भगवान शिव का जलाभिषेक कर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सावन पूर्णिमा होने के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पूरी व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए क्षेत्र को 5 जोन में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस प्रशासन के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन-पूजन व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थे।
भीड़ नियंत्रण के लिए श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से टोली बनाकर नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर भेजा गया। पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर तक पहुंचाया, जिससे उन्हें सुविधापूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक करने का अवसर मिल सके। प्रमुख मार्गों, सरयू घाटों और मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती रही
एसपी सिटी चक्रपाणि तिवारी सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। प्रमुख मार्गों, सरयू घाटों और मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
धार्मिक मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश ने की थी। यही कारण है कि यह मंदिर अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखता है।
सावन पूर्णिमा के साथ ही अयोध्या में चल रहे भव्य सावन मेले का भी समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन के अंतिम दिन अयोध्या में सरयू स्नान, नागेश्वरनाथ में जलाभिषेक तथा रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य और जीवन का अविस्मरणीय क्षण है।

