सहारनपुर में मेला गुघाल के सांस्कृतिक मंच पर बुधवार शाम सात बजे ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम में देश की विविध संस्कृति और लोक परंपराओं का रंग देखने को मिला। पंजाब के भंगड़े, गुजरात के गरबा, महाराष्ट्र की लावणी और राजस्थान के लोकनृत्य ने दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया। नगर निगम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों के नृत्य, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारत की विविधता को मंच पर उतारा गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री जसवंत सैनी, महापौर डॉ. अजय कुमार, नगरायुक्त शिपू गिरि समेत अन्य अतिथियों ने मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और रिबन काटकर किया। कार्यक्रम संयोजक ज्योति अग्रवाल और सहसंयोजक रेणु शर्मा के प्रतिनिधि अनिल शर्मा भी मौजूद रहे। ओइ्म डांस एकेडमी की संचालक एवं कोरियोग्राफर शिवानी सिंघल के निर्देशन में गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद शिव तांडव और रामायण पर आधारित ‘सीताहरण से रावण वध तक’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। हनुमान की दमदार एंट्री और विभिन्न भाव मुद्राओं पर पूरा सभागार ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। ज्योति आर्यवंशी ने ‘अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो’ गीत प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। छोटी बच्चियों की राजस्थानी प्रस्तुति ‘आयो रे आयो रे म्हारो ढोलना’ ने भी खूब वाहवाही लूटी। राज्यमंत्री जसवंत सैनी ने कहा कि भारत सिर्फ स्थान का वाचक नहीं, बल्कि अद्भुत संस्कृति वाला अद्भुत देश है। यहां अलग-अलग भाषाओं, ऋतुओं और संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। आध्यात्मिक और वैदिक चिंतन के साथ रिश्तों की मर्यादा जैसी विशेषताएं भारत को दुनिया में अलग पहचान देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों को एक सूत्र में जोड़ने का काम किया है। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि नृत्य और संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना और तप का विषय रहे हैं। भारत में वीणा, बांसुरी, डमरू, ढोल और ढोलक जैसे असंख्य वाद्य यंत्रों की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज और डीएनए एक हैं,इसलिए अपनी पहचान समझकर विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुटना होगा। तस्वीरें देखिए…

