खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े ग्रामीण खाताधारकों की जमा राशि के कथित गबन का मामला वर्षों बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। वर्ष 2013 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की गई थी। वहीं, कुछ खाताधारकों की जमा राशि वापस करने की विभागीय स्वीकृति भी दी गई। इसके बावजूद कई खाताधारक आज भी अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वर्षों पहले जमा कराई गई मेहनत की कमाई के लिए उन्हें अब भी विभागीय प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, यह मामला डाकघर में जमा राशि की सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े करता है। 2013 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मामला वर्ष 2011 से 6 अगस्त 2013 के बीच का है। तत्कालीन सहायक डाक अधीक्षक, पूर्वी अनुमंडल खगड़िया हरिमोहन झा के बयान पर 11 दिसंबर 2013 को परबत्ता थाना में केस संख्या 284/13 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि सलारपुर शाखा डाकघर में ग्रामीणों द्वारा जमा कराई गई राशि उनके खातों में दर्ज की गई, लेकिन राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की गई। विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल कामिनी कुमारी को दोषी ठहराते हुए निलंबित किया गया था। मामले में कामिनी कुमारी, उनके पति राकेश मंडल तथा परबत्ता डाकपाल समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी के बाद राकेश मंडल की गिरफ्तारी कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की भी बात सामने आई थी। 25 लाख रुपये के गबन का आरोप वर्ष 2022 में जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने जिलाधिकारी और डाक विभाग को आवेदन देकर मामले को फिर से उठाया था। आवेदन में तत्कालीन डाककर्मी कामिनी कुमारी पर वर्ष 2009 से 2014 के बीच ग्रामीण खाताधारकों की करीब 25 लाख रुपये की राशि के गबन का आरोप लगाया गया था। आवेदन के माध्यम से मांग की गई थी कि सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े सभी खाताधारकों से दावा-आपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष शिविर लगाया जाए। साथ ही, दावों का पारदर्शी तरीके से सत्यापन कर पात्र खाताधारकों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित वापस की जाए। कुछ खातों की राशि लौटाने की स्वीकृति सलारपुर डाकघर से जुड़े मामलों में सामने आए विभागीय दस्तावेजों के अनुसार कुछ खाताधारकों की राशि बहाल करने की स्वीकृति भी दी गई थी। 29 अगस्त 2017 को बेगूसराय डाक प्रमंडल से जारी एक पत्र में सलारपुर बीओ के बचत खाता संख्या 684117 से जुड़े कुमार सानू, पिता महेंद्र प्रसाद सिंह, निवासी सलारपुर के खाते का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार खाते में जमा 1,800 रुपये की राशि के गबन की जांच में पुष्टि हुई थी। इसके बाद उक्त राशि और उस पर देय ब्याज खाते में बहाल करने की स्वीकृति दी गई थी। इसी तरह आरडी खाता संख्या 75742, जो सुभाष पोद्दार एवं पूनम देवी के नाम से सलारपुर बीओ में खोला गया था, में कुल 10,400 रुपये जमा होने का उल्लेख है। जांच में अलग-अलग तिथियों पर जमा राशि सरकारी खाते में जमा नहीं किए जाने की बात सामने आई। विभागीय निर्देश के तहत 2,000 रुपये और उस पर देय अद्यतन ब्याज की बहाली की स्वीकृति दी गई थी। भुगतान से पहले खाताधारक की पहचान और दावे की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे अन्य मामलों में भी विभागीय स्तर पर राशि लौटाने की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन कई खाताधारकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। वसूली और भुगतान की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी का इंतजार मामले में ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि विभागीय स्तर पर आरोपी कर्मी से गबन की राशि की वसूली की गई है तो प्रभावित खाताधारकों को उनकी जमा राशि का भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ। हालांकि, आरोपी से कितनी राशि की वसूली हुई और उसमें से कितनी राशि वास्तविक खाताधारकों को भुगतान की गई, इसकी स्पष्ट स्थिति विभागीय स्तर पर सामने आना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिकी और विभागीय जांच के बावजूद यदि वर्षों तक जमा राशि वापस नहीं मिलती है तो खाताधारक अपनी शिकायत लेकर आखिर कहां जाएं। अंग्रेजों के जमाने का बताया जाता है डाकघर ग्रामीणों के अनुसार सलारपुर शाखा डाकघर काफी पुराना है और इसका संचालन अंग्रेजों के शासनकाल से होने की बात कही जाती है। लंबे समय तक डाकघर कभी झोले में, कभी किसी के दरवाजे पर तो कभी अस्थायी व्यवस्था में संचालित होता रहा। वर्तमान में इसे भरसो पंचायत सरकार भवन में स्थानांतरित किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान स्थान पर भी पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल के पद भी रिक्त बताए जा रहे हैं। वर्ष 2013 में तत्कालीन शाखा डाकपाल के निलंबन के बाद से शाखा डाकपाल का काम प्रभार के भरोसे चलने की बात कही जा रही है। वहीं, सहायक शाखा डाकपाल के सेवानिवृत्त होने के बाद से पद रिक्त बताया जा रहा है। नए खाते खोलने का दबाव ग्रामीणों का आरोप है कि डाक विभाग की ओर से शाखा डाकघर में नए खाते खोलने और लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन जिन खाताधारकों की राशि कथित तौर पर गबन के मामले में फंसी हुई है, उनके दावों के निपटारे में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और भुगतान की प्रक्रिया किन कारणों से लंबित है, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। खाताधारकों का सवाल—आखिर कब वापस मिलेगी जमा पूंजी? सलारपुर डाकघर का मामला अब सिर्फ पुराने गबन के आरोप तक सीमित नहीं है। यह वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस पाने का इंतजार कर रहे खाताधारकों के लिए बड़ा सवाल बन चुका है। ग्रामीणों की मांग है कि डाक विभाग स्पष्ट करे कि इस मामले में कुल कितने खाताधारक प्रभावित हुए, कितनी राशि के गबन की पुष्टि हुई, कितनी राशि की वसूली हुई, कितने खाताधारकों को भुगतान किया जा चुका है और कितनी राशि अब भी लंबित है। डाक अधीक्षक बोलीं—मामला सीबीआई स्तर पर, स्वीकृत दावों का भुगतान जल्द बेगूसराय प्रमंडल की डाक अधीक्षक अर्चना कुमारी ने बताया कि सलारपुर डाकघर में गबन से जुड़ा मामला उनके संज्ञान में हाल ही में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला फिलहाल सीबीआई के स्तर पर है। उन्होंने कहा कि जिन खाताधारकों के भुगतान को विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है और जिनके दावे के साथ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उनके भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े ग्रामीण खाताधारकों की जमा राशि के कथित गबन का मामला वर्षों बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। वर्ष 2013 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की गई थी। वहीं, कुछ खाताधारकों की जमा राशि वापस करने की विभागीय स्वीकृति भी दी गई। इसके बावजूद कई खाताधारक आज भी अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वर्षों पहले जमा कराई गई मेहनत की कमाई के लिए उन्हें अब भी विभागीय प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, यह मामला डाकघर में जमा राशि की सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े करता है। 2013 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मामला वर्ष 2011 से 6 अगस्त 2013 के बीच का है। तत्कालीन सहायक डाक अधीक्षक, पूर्वी अनुमंडल खगड़िया हरिमोहन झा के बयान पर 11 दिसंबर 2013 को परबत्ता थाना में केस संख्या 284/13 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि सलारपुर शाखा डाकघर में ग्रामीणों द्वारा जमा कराई गई राशि उनके खातों में दर्ज की गई, लेकिन राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की गई। विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल कामिनी कुमारी को दोषी ठहराते हुए निलंबित किया गया था। मामले में कामिनी कुमारी, उनके पति राकेश मंडल तथा परबत्ता डाकपाल समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी के बाद राकेश मंडल की गिरफ्तारी कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की भी बात सामने आई थी। 25 लाख रुपये के गबन का आरोप वर्ष 2022 में जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने जिलाधिकारी और डाक विभाग को आवेदन देकर मामले को फिर से उठाया था। आवेदन में तत्कालीन डाककर्मी कामिनी कुमारी पर वर्ष 2009 से 2014 के बीच ग्रामीण खाताधारकों की करीब 25 लाख रुपये की राशि के गबन का आरोप लगाया गया था। आवेदन के माध्यम से मांग की गई थी कि सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े सभी खाताधारकों से दावा-आपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष शिविर लगाया जाए। साथ ही, दावों का पारदर्शी तरीके से सत्यापन कर पात्र खाताधारकों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित वापस की जाए। कुछ खातों की राशि लौटाने की स्वीकृति सलारपुर डाकघर से जुड़े मामलों में सामने आए विभागीय दस्तावेजों के अनुसार कुछ खाताधारकों की राशि बहाल करने की स्वीकृति भी दी गई थी। 29 अगस्त 2017 को बेगूसराय डाक प्रमंडल से जारी एक पत्र में सलारपुर बीओ के बचत खाता संख्या 684117 से जुड़े कुमार सानू, पिता महेंद्र प्रसाद सिंह, निवासी सलारपुर के खाते का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार खाते में जमा 1,800 रुपये की राशि के गबन की जांच में पुष्टि हुई थी। इसके बाद उक्त राशि और उस पर देय ब्याज खाते में बहाल करने की स्वीकृति दी गई थी। इसी तरह आरडी खाता संख्या 75742, जो सुभाष पोद्दार एवं पूनम देवी के नाम से सलारपुर बीओ में खोला गया था, में कुल 10,400 रुपये जमा होने का उल्लेख है। जांच में अलग-अलग तिथियों पर जमा राशि सरकारी खाते में जमा नहीं किए जाने की बात सामने आई। विभागीय निर्देश के तहत 2,000 रुपये और उस पर देय अद्यतन ब्याज की बहाली की स्वीकृति दी गई थी। भुगतान से पहले खाताधारक की पहचान और दावे की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे अन्य मामलों में भी विभागीय स्तर पर राशि लौटाने की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन कई खाताधारकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। वसूली और भुगतान की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी का इंतजार मामले में ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि विभागीय स्तर पर आरोपी कर्मी से गबन की राशि की वसूली की गई है तो प्रभावित खाताधारकों को उनकी जमा राशि का भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ। हालांकि, आरोपी से कितनी राशि की वसूली हुई और उसमें से कितनी राशि वास्तविक खाताधारकों को भुगतान की गई, इसकी स्पष्ट स्थिति विभागीय स्तर पर सामने आना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिकी और विभागीय जांच के बावजूद यदि वर्षों तक जमा राशि वापस नहीं मिलती है तो खाताधारक अपनी शिकायत लेकर आखिर कहां जाएं। अंग्रेजों के जमाने का बताया जाता है डाकघर ग्रामीणों के अनुसार सलारपुर शाखा डाकघर काफी पुराना है और इसका संचालन अंग्रेजों के शासनकाल से होने की बात कही जाती है। लंबे समय तक डाकघर कभी झोले में, कभी किसी के दरवाजे पर तो कभी अस्थायी व्यवस्था में संचालित होता रहा। वर्तमान में इसे भरसो पंचायत सरकार भवन में स्थानांतरित किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान स्थान पर भी पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल के पद भी रिक्त बताए जा रहे हैं। वर्ष 2013 में तत्कालीन शाखा डाकपाल के निलंबन के बाद से शाखा डाकपाल का काम प्रभार के भरोसे चलने की बात कही जा रही है। वहीं, सहायक शाखा डाकपाल के सेवानिवृत्त होने के बाद से पद रिक्त बताया जा रहा है। नए खाते खोलने का दबाव ग्रामीणों का आरोप है कि डाक विभाग की ओर से शाखा डाकघर में नए खाते खोलने और लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन जिन खाताधारकों की राशि कथित तौर पर गबन के मामले में फंसी हुई है, उनके दावों के निपटारे में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और भुगतान की प्रक्रिया किन कारणों से लंबित है, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। खाताधारकों का सवाल—आखिर कब वापस मिलेगी जमा पूंजी? सलारपुर डाकघर का मामला अब सिर्फ पुराने गबन के आरोप तक सीमित नहीं है। यह वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस पाने का इंतजार कर रहे खाताधारकों के लिए बड़ा सवाल बन चुका है। ग्रामीणों की मांग है कि डाक विभाग स्पष्ट करे कि इस मामले में कुल कितने खाताधारक प्रभावित हुए, कितनी राशि के गबन की पुष्टि हुई, कितनी राशि की वसूली हुई, कितने खाताधारकों को भुगतान किया जा चुका है और कितनी राशि अब भी लंबित है। डाक अधीक्षक बोलीं—मामला सीबीआई स्तर पर, स्वीकृत दावों का भुगतान जल्द बेगूसराय प्रमंडल की डाक अधीक्षक अर्चना कुमारी ने बताया कि सलारपुर डाकघर में गबन से जुड़ा मामला उनके संज्ञान में हाल ही में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला फिलहाल सीबीआई के स्तर पर है। उन्होंने कहा कि जिन खाताधारकों के भुगतान को विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है और जिनके दावे के साथ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उनके भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।

