अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने कहा सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक और घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। समय पर सही उपचार मिलने से जान बचाई जा सकती है। इस कार्यक्रम में आशा कार्यकत्रियों, एएनएम, सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार और समय पर अस्पताल पहुंचाने की जानकारी दी गई। घबराएं नहीं, सीधे अस्पताल ले जाएं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि सर्पदंश चिकित्सकीय आपातस्थिति हो सकती है। ऐसे में समय पर सही कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं और झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें। पीड़ित को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं। काटे गए अंग को स्थिर रखें डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि सर्पदंश के बाद पीड़ित को शांत रखें और उसे अनावश्यक चलने-फिरने न दें। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे यथासंभव स्थिर रखें और जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं। घाव पर चीरा लगाना और जहर चूसना खतरनाक डॉ. द्विवेदी ने बताया कि घाव पर चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसना, कसकर टॉर्निकेट बांधना या जड़ी-बूटी और किसी अन्य पदार्थ को घाव पर लगाना नुकसानदायक हो सकता है। इससे पीड़ित को नुकसान पहुंचने के साथ अस्पताल पहुंचने में भी देरी हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय दिशा-निर्देश भी ऐसे उपायों से बचने और जल्द चिकित्सकीय देखभाल लेने पर जोर देते हैं। घर के आसपास सफाई रखें, रात में टॉर्च लेकर निकलें सर्पदंश से बचने के लिए घर के आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी गई। कूड़ा-कचरा और झाड़ियां जमा न होने दें। रात में जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। अंधेरे में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई। एंटी-स्नेक वेनम और समय पर इलाज जरूरी डॉ. द्विवेदी ने बताया कि सर्पदंश के इलाज में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से समय पर उपचार मिलना महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने, उपचार की पहुंच और लोगों में जागरूकता बढ़ाने को भी राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रमुख रणनीति बताया गया है। स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों को दिया प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों को सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक स्तर पर किए जाने वाले सुरक्षित उपाय बताए गए। लोगों से अपील की गई कि सर्पदंश की किसी भी घटना को गंभीरता से लें और बिना समय गंवाए स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा सेवाओं का लाभ लें। इस साल की थीम इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस की थीम “सर्पदंश से बचे लोग और बचावकर्ता : बदलाव के अग्रदूत” रखी गई। कार्यक्रम में सर्पदंश से बचे लोगों और बचाव कार्य में लगे लोगों के अनुभवों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया गया।

