समस्तीपुर विकास संघर्ष मोर्चा ने चीनी मिल का किया निरीक्षण:कहा- डीएम, गन्ना मंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन, दोबारा चालू होने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

समस्तीपुर विकास संघर्ष मोर्चा ने चीनी मिल का किया निरीक्षण:कहा- डीएम, गन्ना मंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन, दोबारा चालू होने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

समस्तीपुर शहर के चीनी मिल चौक स्थित वर्षों से बंद समस्तीपुर चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग तेज होने लगी है। शुक्रवार को समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा की टीम ने बंद चीनी मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान मिल को फिर से शुरू करने की संभावनाओं और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया गया। मोर्चा की ओर से निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी और बिहार सरकार के गन्ना मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। मोर्चा की टीम ने मिल परिसर में जमीन की उपलब्धता, सड़क संपर्क, बिजली, रेल सुविधा, जलापूर्ति, जलनिकासी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिकों की उपलब्धता सहित अन्य जरूरी पहलुओं का निरीक्षण किया। टीम का मानना है कि मिल को दोबारा चालू करने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मिल बंद होने से 25 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा असर मोर्चा के अनुसार, समस्तीपुर चीनी मिल बंद होने से इससे जुड़े करीब 25 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हुआ था। इनमें मिल के श्रमिकों के साथ गन्ना उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े लोगों तथा अन्य अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित परिवारों की आजीविका भी शामिल है। मिल दोबारा चालू होने से रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ किसानों, मजदूरों, कारोबारियों और आसपास के लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कभी देश की प्रमुख चीनी मिलों में थी पहचान निरीक्षण के दौरान मोर्चा संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार की मदद से राज्य में 25 चीनी मिलें खोलने और बंद मिलों को फिर से चालू करने की घोषणा की थी। इस सूची में समस्तीपुर की बंद चीनी मिल भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि करीब 15 चीनी मिलों को चालू करने के लिए कैबिनेट से राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन समस्तीपुर चीनी मिल को फिर से शुरू करने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। मोर्चा के सदस्य और भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्ष 1917 में स्थापित समस्तीपुर चीनी मिल कभी देश की प्रमुख चीनी मिलों में शामिल थी। यहां उच्च गुणवत्ता की चीनी का उत्पादन होता था, जिसकी मांग देशभर में थी। मिल से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई थी। 23 एकड़ जमीन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि मिल के पास करीब 23 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसके आसपास सड़क और बिजली की सुविधा है। साथ ही रेल संपर्क, जलापूर्ति, जलनिकासी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिकों की उपलब्धता जैसे पहलू भी मिल को दोबारा चालू करने की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। क्षेत्र में गन्ना उत्पादन की संभावनाएं भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इतनी सुविधाएं होने के बावजूद मिल को फिर से चालू करने के लिए सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने स्थानीय सांसद, विधायक और मंत्रियों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सौंपेंगे ज्ञापन मोर्चा ने बंद चीनी मिल और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी और बिहार सरकार के गन्ना मंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। मोर्चा ने जनहित में समस्तीपुर चीनी मिल को जल्द से जल्द दोबारा चालू कराने की मांग उठाने की बात कही है। निरीक्षण दल में शंकर साह, शाहिद हुसैन, जितेंद्र कुशवाहा, राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, दीनबंधु प्रसाद, असगर अंसारी और सुशील कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे। समस्तीपुर शहर के चीनी मिल चौक स्थित वर्षों से बंद समस्तीपुर चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग तेज होने लगी है। शुक्रवार को समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा की टीम ने बंद चीनी मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान मिल को फिर से शुरू करने की संभावनाओं और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया गया। मोर्चा की ओर से निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी और बिहार सरकार के गन्ना मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। मोर्चा की टीम ने मिल परिसर में जमीन की उपलब्धता, सड़क संपर्क, बिजली, रेल सुविधा, जलापूर्ति, जलनिकासी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिकों की उपलब्धता सहित अन्य जरूरी पहलुओं का निरीक्षण किया। टीम का मानना है कि मिल को दोबारा चालू करने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मिल बंद होने से 25 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा असर मोर्चा के अनुसार, समस्तीपुर चीनी मिल बंद होने से इससे जुड़े करीब 25 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हुआ था। इनमें मिल के श्रमिकों के साथ गन्ना उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े लोगों तथा अन्य अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित परिवारों की आजीविका भी शामिल है। मिल दोबारा चालू होने से रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ किसानों, मजदूरों, कारोबारियों और आसपास के लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कभी देश की प्रमुख चीनी मिलों में थी पहचान निरीक्षण के दौरान मोर्चा संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार की मदद से राज्य में 25 चीनी मिलें खोलने और बंद मिलों को फिर से चालू करने की घोषणा की थी। इस सूची में समस्तीपुर की बंद चीनी मिल भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि करीब 15 चीनी मिलों को चालू करने के लिए कैबिनेट से राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन समस्तीपुर चीनी मिल को फिर से शुरू करने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। मोर्चा के सदस्य और भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्ष 1917 में स्थापित समस्तीपुर चीनी मिल कभी देश की प्रमुख चीनी मिलों में शामिल थी। यहां उच्च गुणवत्ता की चीनी का उत्पादन होता था, जिसकी मांग देशभर में थी। मिल से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई थी। 23 एकड़ जमीन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि मिल के पास करीब 23 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसके आसपास सड़क और बिजली की सुविधा है। साथ ही रेल संपर्क, जलापूर्ति, जलनिकासी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिकों की उपलब्धता जैसे पहलू भी मिल को दोबारा चालू करने की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। क्षेत्र में गन्ना उत्पादन की संभावनाएं भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इतनी सुविधाएं होने के बावजूद मिल को फिर से चालू करने के लिए सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने स्थानीय सांसद, विधायक और मंत्रियों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सौंपेंगे ज्ञापन मोर्चा ने बंद चीनी मिल और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी और बिहार सरकार के गन्ना मंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। मोर्चा ने जनहित में समस्तीपुर चीनी मिल को जल्द से जल्द दोबारा चालू कराने की मांग उठाने की बात कही है। निरीक्षण दल में शंकर साह, शाहिद हुसैन, जितेंद्र कुशवाहा, राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, दीनबंधु प्रसाद, असगर अंसारी और सुशील कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *