Saudi Turkey Pakistan Defense Pact: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। ये देश सुन्नी मुस्लिम हैं और अमेरिका के सहयोगी हैं। वे खाड़ी क्षेत्र में तेल निर्यात करने वाले देशों पर मिसाइल हमलों से पैदा हुए तनाव को लेकर चिंतित हैं। इस डील के बाद एक पर हमले को सभी पर अटैक मानने की बात कही गई है।
ईरान और उसके सहयोगी सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों पर हमले कर रहे हैं और उनकी ऊर्जा आपूर्ति को रोक रहे हैं। यह सब तब से हो रहा है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था, जिससे क्षेत्र में सालों से चल रहा तनाव और बढ़ गया।
कलेक्टिव डिटरेंस को मजबूत करना लक्ष्य
उन्होंने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा कि इस एग्रीमेंट का मकसद किसी भी अटैक के खिलाफ कलेक्टिव डिटरेंस को मजबूत करना है और यह तय करता है कि तीनों में से किसी के भी खिलाफ हथियारबंद हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
हालांकि स्टेटमेंट में यह नहीं बताया गया कि मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत हर एक ने क्या कमिटमेंट या जिम्मेदारियां मानी हैं, लेकिन इसमें कहा गया कि इस पैक्ट का मकसद उनकी कलेक्टिव सिक्योरिटी को मजबूत करना और इलाके और उसके बाहर शांति, सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी को बढ़ावा देना है।
एक तुर्किए अधिकारी ने कहा कि यह एग्रीमेंट डिफेंसिव था, किसी खास सेक्टर के खिलाफ नहीं था, दूसरे इलाके के देशों के लिए खुला था, और इसने किसी भी मौजूदा बाइलेटरल या मल्टीलेटरल अरेंजमेंट को खत्म या रिप्लेस नहीं किया।
भारत के लिए डील के ये मायने
भारत के सऊदी अरब और तुर्किए, दोनों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं। ऐसे में इस समझौते पर भारत की खास नजर है। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। लाखों भारतीय रोजगार के लिए इन देशों में प्रवास कर रहे हैं जो हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भारत भेजने का एक जरिया हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कतर जैसे देशों से पूरा करता है। ऐसे में इस नए सैन्य समझौते का असर भारत के ऊर्जा और आर्थिक हितों पर पड़ने की आशंका है।


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