धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी काशी में श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सनातन परंपरा के अनुसार वार्षिक झूलनोत्सव का अत्यंत भव्य और अलौकिक आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर देवाधिदेव महादेव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती और पुत्र प्रथम श्री गणेश व कार्तिकेय के साथ सपरिवार चांदी के भव्य झूले पर विराजमान हुए। बाबा विश्वनाथ की इस दिव्य पंचबदन रजत चल प्रतिमा के सपरिवार दर्शन पाने के लिए विश्वनाथ धाम में तड़के से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देखिए तस्वीरें… टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से शुरू हुआ अनुष्ठान
झूलनोत्सव की पारंपरिक शुरुआत टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास से हुई। ब्रह्ममुहूर्त में वैदिक विद्वानों के आचार्यत्व में 11 भूदेवों ने बाबा की पंचबदन रजत प्रतिमा का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भव्य महाअभिषेक व विशेष पूजन-अर्चन संपन्न कराया। इसके पश्चात भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश-कार्तिकेय का पारंपरिक ‘हरियाली शृंगार’ तथा राजसी शृंगार किया गया, जिसमें भांग, धतूरा, मदार, शमी पत्र और भांति-भांति के सुगंधित पुष्पों व मालाओं से बाबा को अलंकृत किया गया। शोभायात्रा के रूप में धाम पहुंचे बाबा
सायंकाल पारंपरिक अनुष्ठानों और हर-हर महादेव व बम-बम भोले के गगनभेदी जयकारों के बीच बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा को गाजे-बाजे और डमरू दल की थाप पर पूर्व महंत आवास से विश्वनाथ धाम लाया गया। डमरूओं की गूंज, शंखनाद और भजनों की धुनों से समूचा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर पालकी का भव्य स्वागत किया। गर्भगृह में छह घंटे तक झूले पर दिया दर्शन
धाम परिसर में पहुंचने के बाद सप्तऋषि आरती से पूर्व बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित हिंडोले (झूले) पर विधि-विधान पूर्वक विराजमान कराया गया। झूले पर विराजमान शिव परिवार का दृश्य अत्यंत विहंगम और मनमोहक था। सप्तऋषि आरती के उपरांत झूलनोत्सव का दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया, जो देर रात शयन आरती तक निरंतर जारी रहेगा। लगभग छह घंटे तक काशीवासियों और देश-विदेश से आए शिवभक्तों ने बाबा के इस अनूठे व दुर्लभ रूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।

