‘शैक्षणिक संस्थान ही छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार’, IIT मुंबई में छात्र की आत्महत्या पर नेहा बोरा और अभिजीत दिपकें का गुस्सा

‘शैक्षणिक संस्थान ही छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार’, IIT मुंबई में छात्र की आत्महत्या पर नेहा बोरा और अभिजीत दिपकें का गुस्सा

IIT Bombay student suicide case: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मुंबई में एक बार फिर छात्र की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ गया है। संस्थान के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के दूसरे वर्ष के छात्र द्वारा शुक्रवार शाम को आत्महत्या किए जाने के बाद कैंपस में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पिछले एक साल में IIT मुंबई में छात्र की आत्महत्या की यह तीसरी घटना है, जिसके बाद छात्र संगठनों और नेताओं ने सीधे तौर पर शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

इस दर्दनाक घटना के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों से जुड़े नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। अभिजीत दिपके ने घटना पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि दुर्गम आदिवासी इलाकों में भी छात्र अपनी जान गंवा रहे हैं और मुंबई जैसे महानगरों में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यह संकट किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। छात्रों की जिंदगी हमारी प्राथमिकता बने, इसके लिए आखिर कितने और छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी?’ उन्होंने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में भी छात्रों की मौत की घटनाओं को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

नेहा बोरा ने भी जाहिर किया गुस्सा

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने इस घटना पर कड़ा गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘यह समझने के लिए कि कितने लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, आखिर और कितनी मौतों का इंतजार करना होगा? जिन संस्थानों में माता-पिता अपने बच्चों को बड़ी उम्मीदों के साथ भेजते हैं, वही संस्थान उनकी मौत का कारण बन रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि IIT मुंबई में एक साल के भीतर यह तीसरी मौत है। बोरा ने छात्रों को सुरक्षित माहौल देने को लेकर संस्थानों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र को शुक्रवार को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने और प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड करने के आरोप में पकड़ा गया था। IIT प्रशासन का कहना है कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। शिक्षक और विभाग प्रमुख ने उससे बात कर उसकी काउंसलिंग की थी और भरोसा दिलाया था कि इसका उसके करियर पर असर नहीं पड़ेगा। साथी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा हॉल से बाहर निकाले जाने और निलंबन जैसी कार्रवाई के डर से छात्र भयंकर तनाव में था। घटना के विरोध में 400 से अधिक छात्र मुख्य प्रशासनिक भवन के बाहर जमा हो गए और संस्थान के डायरेक्टर से सीधे संवाद की मांग करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। बढ़ते दबाव के कारण संस्थान को फिलहाल मिड-समेस्टर परीक्षाएं आगे बढ़ानी पड़ी हैं।

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