Vande Mataram Controversy Sharmila Tagore-Yamuna Pathak: ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की हालिया टिप्पणी के बाद विश्व हिंदू रक्षा परिषद (VHRP) की नेशनल महिला प्रेसिडेंट यमुना पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
यमुना पाठक ने शर्मिला टैगोर को दिया जवाब
यमुना पाठक ने कहा कि शर्मिला टैगोर को ‘वंदे मातरम’ को छोटे धार्मिक नजरिए से देखना बंद करना चाहिए। मातृभूमि को सम्मान देना देशभक्ति है। इसे राजनीति से जोड़ना सही नहीं है।
पाठक ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गीत में शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती के संदर्भों को कविता के तौर पर समझा जा सकता है। इनका इस्तेमाल भारत की शक्ति, समृद्धि और ज्ञान को दिखाने के लिए किया गया था। वंदे मातरम को किसी एक समुदाय तक सीमित करना उचित नहीं है। यह हर भारतीय से जुड़ा गीत है।
1905 के आंदोलन और आजादी की लड़ाई का जिक्र
यमुना पाठक ने वंदे मातरम के इतिहास का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1905 में बंगाल के विभाजन के खिलाफ हुए आंदोलन में यह गीत लोगों के बीच गूंजा था। उस दौर में वंदे मातरम अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का एक महत्वपूर्ण नारा बन गया था। आजादी की लड़ाई के दौरान हिंदू और मुसलमान साथ खड़े हुए थे।
पाठक ने संविधान के अनुच्छेद 25 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के ऐतिहासिक महत्व को कम नहीं किया जाना चाहिए।
कंगना रनौत भी कर चुकी हैं टिप्पणी
वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर की टिप्पणी को लेकर अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत भी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वह टैगोर की राय रखने के अधिकार का सम्मान करती हैं। हालांकि, वह उनकी बात से सहमत नहीं हैं।
शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था?
शर्मिला टैगोर ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में ‘वंदे मातरम’ के कुछ छंदों को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं और कई लोग एक ईश्वर में विश्वास करते हैं। गीत के बाद के छंदों में काली और दुर्गा जैसे देवी-देवताओं की बात करता है। इससे दूसरे धर्मों में विश्वास रखने वाले लोगों को असहजता हो सकती है। हालांकि इसके पहले दो छंद अच्छे हैं।


