केरल उच्च न्यायालय ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और उनके पति पी.ए. मोहम्मद रियास की उन अर्जियों को खारिज कर दिया है, जिनमें उन्होंने CMRL रिश्वत मामले में अपने खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। भाजपा और कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं, CPI(M) ने दावा किया है कि यह मामला झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। पार्टी का कहना है कि यह भाजपा और UDF की एक सोची-समझी चाल है, जिसका मकसद उनके नेताओं और वामपंथी दल को निशाना बनाना है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश सरकार के लिए कोई झटका नहीं है, क्योंकि सरकार ने कानून के अनुसार काम किया है और इसमें कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं था।
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विजयन, वीणा और रियास को सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति नहीं मिली, जिसमें विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद, BJP नेता शोन जॉर्ज ने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री में “ज़रा भी शर्म बची है”, तो उन्हें राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जॉर्ज ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से पत्र मिलने के बाद, जिसमें CPI(M) के वरिष्ठ नेता और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई थी, राज्य सरकार विजयन की अब और कोई मदद नहीं कर सकती।
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CPI(M) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि पार्टी फैसले की समीक्षा करने के बाद इस मामले से राजनीतिक और कानूनी तौर पर निपटेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को एकल न्यायाधीश (सिंगल जज) के आदेश को तुरंत लागू करने के बजाय उसके खिलाफ अपील करनी चाहिए थी।

