वाहन उद्योग ने CAFE 3 मानकों का किया स्वागत, 2027 से लागू होंगे नए नियम

वाहन उद्योग ने CAFE 3 मानकों का किया स्वागत, 2027 से लागू होंगे नए नियम

वाहन उद्योग ने बुधवार को यात्री वाहनों के लिए अधिसूचित ‘कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता’ (सीएएफई-3) मानकों का स्वागत करते हुए कहा कि नए नियमों से ईंधन दक्षता सुधारने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की स्पष्ट रूपरेखा सामने आएगी। उद्योग के मुताबिक, विभिन्न प्रौद्योगिकियों के जरिये मानकों का अनुपालन करने की सुविधा से कंपनियों को निवेश और अनुसंधान की बेहतर योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, सीएएफई-3 नियम एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च, 2032 तक प्रभावी रहेंगे।

ये भारत में बिक्री के लिए निर्मित या आयातित नए यात्री वाहनों पर लागू होंगे। इनमें कंपनियों के लिए पांच वर्षों के भीतर ईंधन दक्षता में 16 प्रतिशत से अधिक सुधार का लक्ष्य रखा गया है। वाहन विनिर्माता कंपनियों के संगठन सियाम के अध्यक्ष शेनू अग्रवाल ने कहा कि नए ईंधन दक्षता ढांचे से उद्योग को नीतिगत स्पष्टता और निश्चितता मिलेगी, जिससे कंपनियां निवेश की योजना बना सकेंगी और तकनीकी नवाचार को गति दे सकेंगी।

अग्रवाल ने कहा कि बाजार आधारित अनुपालन व्यवस्था के साथ अगले पांच वर्षों के लिए तय लक्ष्य से नए यात्री वाहनों के बेड़े की कुल ईंधन खपत कम करने में मदद मिलेगी। प्रमुख वाहन विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा कि नए सीएएफई नियम भारतीय परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत कदम हैं। उन्होंने कहा कि नए नियमों में विभिन्न पावरट्रेन और ईंधन प्रौद्योगिकियों को मान्यता दी गई है तथा क्रेडिट-डेबिट व्यवस्था पिछले सीएएफई-2 नियमों की तुलना में अहम सुधार है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश चंद्रा ने कहा कि यह ढांचा स्वच्छ और अधिक टिकाऊ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि शून्य-उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों को मान्यता मिलने से उत्सर्जन में कटौती के दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने में विद्युतीकरण की भूमिका मजबूत होगी। हुंदै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि क्रेडिट कारोबार, पूलिंग और लचीली अनुपालन व्यवस्था से कंपनियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और नवाचार एवं निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के अध्यक्ष (वाहन व्यवसाय) वेलुसामी आर. ने कहा कि नए नियम पर्यावरणीय जरूरतों और उद्योग के लिए व्यावहारिक अनुपालन के बीच संतुलन बनाते हैं। उन्होंने अनुपालन अवधि, प्रौद्योगिकी क्रेडिट, स्वच्छ ईंधन के लाभ और इलेक्ट्रिक तथा अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए सुपर क्रेडिट का स्वागत किया। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं भारत प्रमुख विक्रम गुलाटी ने कहा कि नए मानकों में विभिन्न स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के महत्व को ध्यान में रखते हुए वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक मूल्यांकन पद्धति अपनाई गई है।

उन्होंने कहा कि इसमें बहु-विकल्पीय दृष्टिकोण के तहत बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, प्लग-इन हाइब्रिड वाहन, मजबूत हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन को उचित मान्यता दी गई है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ संतोष अय्यर ने कहा कि इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों को स्पष्ट मान्यता तथा दीर्घकालिक नियामकीय स्पष्टता से नवीन ऊर्जा चालित वाहनों और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी आ सकती है। नए ढांचे में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल और अन्य वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों तथा ईंधन बचाने वाली प्रौद्योगिकियों के जरिये अनुपालन के कई विकल्प दिए गए हैं।

इलेक्ट्रिक, रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बेड़े के औसत प्रदर्शन की गणना में ‘सुपर क्रेडिट’ मिलेगा। कंपनियां निर्धारित दो या तीन साल के अनुपालन ब्लॉक में भी अपने दायित्व पूरे कर सकेंगी। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को मिले क्रेडिट को संबंधित अवधि में आगे ले जाने की सुविधा होगी, जबकि कमी वाली कंपनियां पात्र क्रेडिट का इस्तेमाल करने, दूसरी कंपनियों से क्रेडिट का लेनदेन करने या भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) की व्यवस्था के तहत क्रेडिट खरीदने का विकल्प चुन सकेंगी।

नए नियमों में मान्यता प्राप्त ईंधन-बचत प्रौद्योगिकियों की संख्या भी चार से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। वहीं, सालाना 1,000 से कम वाहनों की बिक्री करने वाले वाहन निर्माताओं को बेड़े के औसत ईंधन दक्षता दायित्व से छूट जारी रहेगी।

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