“पूरे गांव से 6 जवान लड़कों को बुलाया गया। सबके हाथ में लाठी और भाले दिए गए। हमलोग विजय को ढूंढने VTR के खेत की तरफ गए, जहां वह सुबह में काम करने गया था। वहां बाल और खून के कुछ सूखे, तो कुछ गीले धब्बे मिले। उन पर मक्खियां भिनभिना रही थीं।” हमलोग विजय को आसपास ही ढूंढ रहे थे, तभी कुछ दूरी से बाघ के हांफने की आवाज आई। हमलोग घबरा गए। इतने में बाघ जंगल की ओर जाता दिखाई दिया। उसे दौड़ाकर मारने की कोशिश की, लेकिन वह भाग गया। वापस लौटे तो एक खेत में विजय मृत अवस्था में पड़ा था। बाघ ने उसकी गर्दन काट दी थी और पूरे शरीर से खून बह गया था। उसकी वहीं मौत हो गई थी। विजय को ढूंढने निकले 6 लोगों में शामिल प्रकाश हालदार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह कहानी बताई है। दरअसल, बगहा में 20 दिन के भीतर बाघों ने तीन लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनमें दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। VTR से सटे इलाकों में बाघों की दहशत अचानक क्यों बढ़ गई है? बाघ जंगल छोड़कर रिहाइशी इलाकों में क्यों आ रहे हैं? वन विभाग के रेंजर क्या-क्या कदम उठा रहे हैं? और तीनों व्यक्तियों की मौत कब और कैसे हुई? पढ़िए रिपोर्ट… पहले मैप के जरिए समझिए… VTR का जंगल और तीनों शिकारों के लोकेशन…. अब जानिए तीन लोगों की कहानी, जिन्हें टाइगर खा गया पेड़ की छांव में लेटे अकलू पर कर दिया हमला 30 जुलाई की दोपहर 3 बजे घर से भूजा और पानी लेकर वाल्मीकि नगर के विसहा निवासी अकलू यादव बकरियों के साथ निकले थे। बेटे रोहित यादव के अनुसार, करीब आधे घंटे पैदल चलकर वह मलखंता सरेह में पहुंचे, जहां एक साइड से पूरे VTR का एरिया है। अकलू अपनी बकरियों को वहीं छोड़कर वहां से 100 मीटर की दूरी पर पेड़ की छाया में आकर आराम करने लगा। इसके आसपास खेत भी हैं, जहां अन्य लोग भी काम कर रहे थे। अकलू के लेटने के 10 मिनट के बाद ही उसके पैरों में झपट्टा मारकर बाघ उसे झाड़ियों में ले जाने लगा। अकलू के चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग दौड़े। लोगों के हाथ में लाठी-डंडे थे, लोगों ने बाघ की पीठ और पैर पर खूब लाठी बरसाए, करीब 2 मिनट तक अकलू के पैर बाघ के मुंह में और लोगों की लाठी बाघ के पैर और पीठ पर बरस रहे थे। आखिर में बाघ अकलू को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। लोगों ने तुरंत रेंजर्स को सूचना देकर बाघ की खोजबीन की शुरू कराई। साथ ही अकलू को लेकर लोग बगहा अस्पताल पहुंचे। अकलू के पैर में सिर्फ कंकाल दिख रहे थे, बाकि मांस बाघ ने नोच खाया था। बगहा से उन्हें गोरखपुर रेफर किया गया। वहां उनका इलाज चल ही रहा था कि 31 जुलाई की सुबह सूचना मिली कि जंगल में एक बाघ का शव मिला है। यह वही बाघ था, जिसने अकलू पर हमला किया था। इसी के शाम में गोरखपुर के अस्पताल में अकलू की भी मौत हो गई। रेंजर्स नसीम ने बताया कि अकलू की मौत लेटे रहने के कारण हुई। ऐसा इसलिए कि जब कोई इंसान सीधा खड़ा होता है, तो उसका दो पैरों वाला लंबा ढांचा बाघ के लिए अनजाना और डरावना होता है, लेकिन जैसे ही इंसान खेत में घास काटने या काम करने के लिए नीचे झुकता है (या उकडू बैठता है), उसकी लंबाई कम हो जाती है। बाघ को भ्रम हो जाता है कि वह कोई चार पैरों वाला जानवर जैसे कि हिरण, जंगली सूअर या लंगूर है। उमरावती को गर्दन से झपटकर गन्ने के खेत में ले गया बाघ 31 जुलाई की ही सुबह अकलू के घटनास्थल से 35 किलोमीटर की दूरी पर नौरंगिया निवासी रामायण साहनी की पत्नी उमरावती देवी की मौत की सूचना मिली। परिजनों ने बताया कि उमरावती सुबह-सुबह खेत में पहुंची और खरपतवार निकालने के लिए झुककर काम कर रही थी। इसी दौरान पीछे से बाघ ने उसके गर्दन पर झपट्टा मारकर उसे उठा ले गया। करीब थोड़ी दूरी पर गन्ने के खेत में उमरावती के शरीर से सिर को अलग कर दिया गया, और खून से सने मुंह लेकर बाघ वहीं बैठा रहा। कुछ देर के बाद उनके पति रामायण साहनी उस खेत की तरफ गए जहां पत्नी काम कर रही थी। वहां पहुंचने पर वह नहीं मिली, लेकिन मौके पर काफी मात्रा में खून गिरा हुआ था। इसके बाद साहनी ने आसपास के लोगों को चिल्लाकर बुलाया और लाठी डंडे के साथ शोर मचाते हुए गन्ने की खेत के तरफ बढ़े, जहां लोगों को देखते ही बाघ भाग खड़ा हुआ। पास जाकर देखने पर उमरावती की मौत हो चुकी है। विजय की गर्दन काटकर खा गया 15 अगस्त की सुबह 7 बजे विजय हालदार अपने भाई वीरेंद्र हालदार के साथ पशुओं के लिए चारा लेने निकले थे। जंगल से करीब 200 मीटर पहले दोनों अलग-अलग जगहों पर चारा काटने लगे। चारा काटने के बाद वीरेंद्र हालदार को लगा कि विजय चारा लेकर घर पहुंच गए होंगे। वह भी चारा लेकर घर लौट आए। लेकिन करीब 9:30 बजे तक विजय घर नहीं पहुंचे। विजय की पत्नी ने वीरेंद्र हालदार से जाकर कहा कि अभी तक वे घर नहीं आए हैं, चिंता हो रही है। इसके बाद वीरेंद्र हालदार के साथ 6 ग्रामीण जवान लड़के लाठी-भाले लेकर सरेह की तरफ विजय को ढूंढने निकल गए। दोपहर में जिस खेत में विजय काम करने गए थे, सबसे पहले वे उसी तरफ पहुंचे। वहां बाल और खून के कुछ सूखे धब्बे थे, तो कुछ अभी भी गीले थे। उन पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। देखकर लग रहा था कि वहां कुछ हुआ है। वे लोग विजय को आसपास ही ढूंढ रहे थे, तभी कुछ दूरी से बाघ के हांफने की आवाज आई। आवाज सुनकर सभी घबरा गए। इतने में बाघ जंगल की ओर जाता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर मारने की कोशिश की, लेकिन वह भाग गया। इसके बाद जब वे लोग वापस लौट रहे थे, तो एक झाड़ी में विजय लेटा पड़ा मिला। बाघ ने उसकी गर्दन काट दी थी और पूरे शरीर से खून बह गया था। उसकी वहीं मौत हो गई थी। अब, VTR जंगल की स्थिति समझिए… मदनपुर वन क्षेत्र के रेंजर नसीम अंसारी ने कहा कि VTR का पूरा एरिया 900 स्क्वायर वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें करीब 75 बाघ हो गए हैं, यानी एक बाघ के लिए 12 वर्ग किलोमीटर एरिया बनता है। यानी साढ़े तीन किलोमीटर लंबाई और चौड़ाई। मादा बाघों के लिए यह ठीक है, लेकिन नर बाघों के लिए यह एरिया काफी कम पड़ता है। नसीम अंसारी ने बताया कि VTR का एरिया कमने के कारण बाघों वन क्षेत्र को क्रॉस कर रहे हैं। जिससे आसपास के सटे इलाके में भ्रमण करते दिख जाते हैं। जिन लोगों के वहां खेत या अन्य काम काज हैं, उनके लिए संघर्ष की स्थिति बन रही है। इंसानों को खाने के बाद अन्य जानवरों को नहीं खाता बाघ नसीम अंसारी ने बताया कि बाघ एक बार अगर इंसान का खून चख लिया, तो फिर वह अन्य जानवरों पर कम ही हमला करता है, वह सिर्फ इंसानों पर ही हमला करता है। यही कारण है कि 20 दिन के अंदर 3 लोगों की मौत हो गई है। इसके कई कारण है। बाघों की संख्या बढ़ रही है, जिससे उनके लिए वन क्षेत्र छोटा पड़ रहा है और रिहाइशी इलाके में आ रहे हैं।। “पूरे गांव से 6 जवान लड़कों को बुलाया गया। सबके हाथ में लाठी और भाले दिए गए। हमलोग विजय को ढूंढने VTR के खेत की तरफ गए, जहां वह सुबह में काम करने गया था। वहां बाल और खून के कुछ सूखे, तो कुछ गीले धब्बे मिले। उन पर मक्खियां भिनभिना रही थीं।” हमलोग विजय को आसपास ही ढूंढ रहे थे, तभी कुछ दूरी से बाघ के हांफने की आवाज आई। हमलोग घबरा गए। इतने में बाघ जंगल की ओर जाता दिखाई दिया। उसे दौड़ाकर मारने की कोशिश की, लेकिन वह भाग गया। वापस लौटे तो एक खेत में विजय मृत अवस्था में पड़ा था। बाघ ने उसकी गर्दन काट दी थी और पूरे शरीर से खून बह गया था। उसकी वहीं मौत हो गई थी। विजय को ढूंढने निकले 6 लोगों में शामिल प्रकाश हालदार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह कहानी बताई है। दरअसल, बगहा में 20 दिन के भीतर बाघों ने तीन लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनमें दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। VTR से सटे इलाकों में बाघों की दहशत अचानक क्यों बढ़ गई है? बाघ जंगल छोड़कर रिहाइशी इलाकों में क्यों आ रहे हैं? वन विभाग के रेंजर क्या-क्या कदम उठा रहे हैं? और तीनों व्यक्तियों की मौत कब और कैसे हुई? पढ़िए रिपोर्ट… पहले मैप के जरिए समझिए… VTR का जंगल और तीनों शिकारों के लोकेशन…. अब जानिए तीन लोगों की कहानी, जिन्हें टाइगर खा गया पेड़ की छांव में लेटे अकलू पर कर दिया हमला 30 जुलाई की दोपहर 3 बजे घर से भूजा और पानी लेकर वाल्मीकि नगर के विसहा निवासी अकलू यादव बकरियों के साथ निकले थे। बेटे रोहित यादव के अनुसार, करीब आधे घंटे पैदल चलकर वह मलखंता सरेह में पहुंचे, जहां एक साइड से पूरे VTR का एरिया है। अकलू अपनी बकरियों को वहीं छोड़कर वहां से 100 मीटर की दूरी पर पेड़ की छाया में आकर आराम करने लगा। इसके आसपास खेत भी हैं, जहां अन्य लोग भी काम कर रहे थे। अकलू के लेटने के 10 मिनट के बाद ही उसके पैरों में झपट्टा मारकर बाघ उसे झाड़ियों में ले जाने लगा। अकलू के चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग दौड़े। लोगों के हाथ में लाठी-डंडे थे, लोगों ने बाघ की पीठ और पैर पर खूब लाठी बरसाए, करीब 2 मिनट तक अकलू के पैर बाघ के मुंह में और लोगों की लाठी बाघ के पैर और पीठ पर बरस रहे थे। आखिर में बाघ अकलू को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। लोगों ने तुरंत रेंजर्स को सूचना देकर बाघ की खोजबीन की शुरू कराई। साथ ही अकलू को लेकर लोग बगहा अस्पताल पहुंचे। अकलू के पैर में सिर्फ कंकाल दिख रहे थे, बाकि मांस बाघ ने नोच खाया था। बगहा से उन्हें गोरखपुर रेफर किया गया। वहां उनका इलाज चल ही रहा था कि 31 जुलाई की सुबह सूचना मिली कि जंगल में एक बाघ का शव मिला है। यह वही बाघ था, जिसने अकलू पर हमला किया था। इसी के शाम में गोरखपुर के अस्पताल में अकलू की भी मौत हो गई। रेंजर्स नसीम ने बताया कि अकलू की मौत लेटे रहने के कारण हुई। ऐसा इसलिए कि जब कोई इंसान सीधा खड़ा होता है, तो उसका दो पैरों वाला लंबा ढांचा बाघ के लिए अनजाना और डरावना होता है, लेकिन जैसे ही इंसान खेत में घास काटने या काम करने के लिए नीचे झुकता है (या उकडू बैठता है), उसकी लंबाई कम हो जाती है। बाघ को भ्रम हो जाता है कि वह कोई चार पैरों वाला जानवर जैसे कि हिरण, जंगली सूअर या लंगूर है। उमरावती को गर्दन से झपटकर गन्ने के खेत में ले गया बाघ 31 जुलाई की ही सुबह अकलू के घटनास्थल से 35 किलोमीटर की दूरी पर नौरंगिया निवासी रामायण साहनी की पत्नी उमरावती देवी की मौत की सूचना मिली। परिजनों ने बताया कि उमरावती सुबह-सुबह खेत में पहुंची और खरपतवार निकालने के लिए झुककर काम कर रही थी। इसी दौरान पीछे से बाघ ने उसके गर्दन पर झपट्टा मारकर उसे उठा ले गया। करीब थोड़ी दूरी पर गन्ने के खेत में उमरावती के शरीर से सिर को अलग कर दिया गया, और खून से सने मुंह लेकर बाघ वहीं बैठा रहा। कुछ देर के बाद उनके पति रामायण साहनी उस खेत की तरफ गए जहां पत्नी काम कर रही थी। वहां पहुंचने पर वह नहीं मिली, लेकिन मौके पर काफी मात्रा में खून गिरा हुआ था। इसके बाद साहनी ने आसपास के लोगों को चिल्लाकर बुलाया और लाठी डंडे के साथ शोर मचाते हुए गन्ने की खेत के तरफ बढ़े, जहां लोगों को देखते ही बाघ भाग खड़ा हुआ। पास जाकर देखने पर उमरावती की मौत हो चुकी है। विजय की गर्दन काटकर खा गया 15 अगस्त की सुबह 7 बजे विजय हालदार अपने भाई वीरेंद्र हालदार के साथ पशुओं के लिए चारा लेने निकले थे। जंगल से करीब 200 मीटर पहले दोनों अलग-अलग जगहों पर चारा काटने लगे। चारा काटने के बाद वीरेंद्र हालदार को लगा कि विजय चारा लेकर घर पहुंच गए होंगे। वह भी चारा लेकर घर लौट आए। लेकिन करीब 9:30 बजे तक विजय घर नहीं पहुंचे। विजय की पत्नी ने वीरेंद्र हालदार से जाकर कहा कि अभी तक वे घर नहीं आए हैं, चिंता हो रही है। इसके बाद वीरेंद्र हालदार के साथ 6 ग्रामीण जवान लड़के लाठी-भाले लेकर सरेह की तरफ विजय को ढूंढने निकल गए। दोपहर में जिस खेत में विजय काम करने गए थे, सबसे पहले वे उसी तरफ पहुंचे। वहां बाल और खून के कुछ सूखे धब्बे थे, तो कुछ अभी भी गीले थे। उन पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। देखकर लग रहा था कि वहां कुछ हुआ है। वे लोग विजय को आसपास ही ढूंढ रहे थे, तभी कुछ दूरी से बाघ के हांफने की आवाज आई। आवाज सुनकर सभी घबरा गए। इतने में बाघ जंगल की ओर जाता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर मारने की कोशिश की, लेकिन वह भाग गया। इसके बाद जब वे लोग वापस लौट रहे थे, तो एक झाड़ी में विजय लेटा पड़ा मिला। बाघ ने उसकी गर्दन काट दी थी और पूरे शरीर से खून बह गया था। उसकी वहीं मौत हो गई थी। अब, VTR जंगल की स्थिति समझिए… मदनपुर वन क्षेत्र के रेंजर नसीम अंसारी ने कहा कि VTR का पूरा एरिया 900 स्क्वायर वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें करीब 75 बाघ हो गए हैं, यानी एक बाघ के लिए 12 वर्ग किलोमीटर एरिया बनता है। यानी साढ़े तीन किलोमीटर लंबाई और चौड़ाई। मादा बाघों के लिए यह ठीक है, लेकिन नर बाघों के लिए यह एरिया काफी कम पड़ता है। नसीम अंसारी ने बताया कि VTR का एरिया कमने के कारण बाघों वन क्षेत्र को क्रॉस कर रहे हैं। जिससे आसपास के सटे इलाके में भ्रमण करते दिख जाते हैं। जिन लोगों के वहां खेत या अन्य काम काज हैं, उनके लिए संघर्ष की स्थिति बन रही है। इंसानों को खाने के बाद अन्य जानवरों को नहीं खाता बाघ नसीम अंसारी ने बताया कि बाघ एक बार अगर इंसान का खून चख लिया, तो फिर वह अन्य जानवरों पर कम ही हमला करता है, वह सिर्फ इंसानों पर ही हमला करता है। यही कारण है कि 20 दिन के अंदर 3 लोगों की मौत हो गई है। इसके कई कारण है। बाघों की संख्या बढ़ रही है, जिससे उनके लिए वन क्षेत्र छोटा पड़ रहा है और रिहाइशी इलाके में आ रहे हैं।।

