झारखंड जन अधिकार महासभा के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण लातेहार डीएफओ कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए। आंदोलनकारियों का कहना है कि 15 वर्षों से वन अधिकार पट्टा की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। इस बार जब तक वन पट्टा नहीं दिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारी एक महीने तक भी धरना देना पड़े तो पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। धरना का नेतृत्व संयोजक नंदकिशोर गंझू, सेल्सटिन कुजूर और प्रवक्ता जॉर्ज मोनी पल्ली उर्फ धोती फादर कर रहे हैं। नंदकिशोर गंझू ने कहा कि जिला प्रशासन लोगों को सिर्फ बरगलाने का काम कर रहा है। इससे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया, लेकिन वन पट्टा देने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब तक वन पट्टा नहीं मिलता, अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। इस बार आंदोलन आर-पार का होगा। संयोजक सेल्सटिन कुजूर ने कहा कि झारखंड जन अधिकार महासभा लंबे समय से वन अधिकार और वन पट्टा की मांग कर रही है। करीब एक वर्ष पहले भी अनिश्चितकालीन धरना दिया गया था। उस समय वन पट्टा देने का आश्वासन मिला था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। प्रवक्ता जॉर्ज मोनी पल्ली उर्फ धोती फादर ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा, “वन पट्टा नहीं तो घर वापसी नहीं होगी। प्रशासन चाहे जेल भेजे या कार्रवाई करे, हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से वन पट्टा का मामला लंबित है, सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो से 3000 लंबित मामले पड़े हुए हैं। जिसका निष्पादन नहीं किया जा रहा है। महिला गेंदी देवी ने कहा कि हम लोग जंगल झाड़ में रहते हैं, लेकिन हम लोगों के अधिकार को नहीं दिया जाता है। इस बार हमलोग वन पट्टा लेकर ही जाएंगे। खाना-पीना और रहने का सामान लेकर पहुंचे ग्रामीण धरना में महिला और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर खाना बनाने के लिए बर्तन समेत अन्य सामान भी लाया है। उनका कहना है कि जब तक आंदोलन चलेगा, सुबह-शाम खाना यहीं बनाया जाएगा और यहीं खाकर धरना जारी रखा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकार की मांग को लेकर पूरी तैयारी के साथ आए हैं। परमिशन को लेकर प्रशासन से हुई वार्ता
सुबह करीब 9 से 10 बजे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वाहनों से धरना स्थल पर पहुंचने लगे। इसकी सूचना जिला प्रशासन को मिलने के बाद झारखंड जन अधिकार महासभा के संयोजक और प्रवक्ताओं को वार्ता के लिए डीसी संदीप कुमार के द्वारा बुलाया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि धरना के लिए अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए टेंट नहीं लगाया जाए। इसके बाद कुछ देर के लिए टेंट नहीं लगाया गया। करीब दो से तीन घंटे तक चली वार्ता के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। मौके पर मुनेश्वर उरांव, हरिकुमार भगत, संतोष उरांव,रामेश्वर उरांव, राजू उरांव, प्रवेश राणा समेत हजारों की संख्या में महिला, पुरुष ग्रामीण मौजूद थे। झारखंड जन अधिकार महासभा के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण लातेहार डीएफओ कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए। आंदोलनकारियों का कहना है कि 15 वर्षों से वन अधिकार पट्टा की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। इस बार जब तक वन पट्टा नहीं दिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारी एक महीने तक भी धरना देना पड़े तो पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। धरना का नेतृत्व संयोजक नंदकिशोर गंझू, सेल्सटिन कुजूर और प्रवक्ता जॉर्ज मोनी पल्ली उर्फ धोती फादर कर रहे हैं। नंदकिशोर गंझू ने कहा कि जिला प्रशासन लोगों को सिर्फ बरगलाने का काम कर रहा है। इससे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया, लेकिन वन पट्टा देने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब तक वन पट्टा नहीं मिलता, अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। इस बार आंदोलन आर-पार का होगा। संयोजक सेल्सटिन कुजूर ने कहा कि झारखंड जन अधिकार महासभा लंबे समय से वन अधिकार और वन पट्टा की मांग कर रही है। करीब एक वर्ष पहले भी अनिश्चितकालीन धरना दिया गया था। उस समय वन पट्टा देने का आश्वासन मिला था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। प्रवक्ता जॉर्ज मोनी पल्ली उर्फ धोती फादर ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा, “वन पट्टा नहीं तो घर वापसी नहीं होगी। प्रशासन चाहे जेल भेजे या कार्रवाई करे, हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से वन पट्टा का मामला लंबित है, सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो से 3000 लंबित मामले पड़े हुए हैं। जिसका निष्पादन नहीं किया जा रहा है। महिला गेंदी देवी ने कहा कि हम लोग जंगल झाड़ में रहते हैं, लेकिन हम लोगों के अधिकार को नहीं दिया जाता है। इस बार हमलोग वन पट्टा लेकर ही जाएंगे। खाना-पीना और रहने का सामान लेकर पहुंचे ग्रामीण धरना में महिला और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर खाना बनाने के लिए बर्तन समेत अन्य सामान भी लाया है। उनका कहना है कि जब तक आंदोलन चलेगा, सुबह-शाम खाना यहीं बनाया जाएगा और यहीं खाकर धरना जारी रखा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकार की मांग को लेकर पूरी तैयारी के साथ आए हैं। परमिशन को लेकर प्रशासन से हुई वार्ता
सुबह करीब 9 से 10 बजे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वाहनों से धरना स्थल पर पहुंचने लगे। इसकी सूचना जिला प्रशासन को मिलने के बाद झारखंड जन अधिकार महासभा के संयोजक और प्रवक्ताओं को वार्ता के लिए डीसी संदीप कुमार के द्वारा बुलाया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि धरना के लिए अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए टेंट नहीं लगाया जाए। इसके बाद कुछ देर के लिए टेंट नहीं लगाया गया। करीब दो से तीन घंटे तक चली वार्ता के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। मौके पर मुनेश्वर उरांव, हरिकुमार भगत, संतोष उरांव,रामेश्वर उरांव, राजू उरांव, प्रवेश राणा समेत हजारों की संख्या में महिला, पुरुष ग्रामीण मौजूद थे।

