रोज 60 KM सफर और खराब सड़कें बनी वजह, SIR Tribunal प्रमुख पद छोड़ेंगे पूर्व जज

रोज 60 KM सफर और खराब सड़कें बनी वजह, SIR Tribunal प्रमुख पद छोड़ेंगे पूर्व जज

कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) से जुड़ी अपीलों की सुनवाई करने वाले ट्रिब्यूनल के प्रमुख पद से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की है। उन्होंने रोज़ाना 60 किलोमीटर से ज़्यादा सफ़र करने में होने वाली परेशानी का हवाला दिया है। मुर्शिदाबाद ज़िले के SIR ट्रिब्यूनल के प्रमुख चटर्जी ने कहा कि अगर उन्हें घर से काम करने की इजाज़त दी जाए या सॉल्ट लेक में उनके घर के पास कोई ऑफ़िस दिया जाए, तो वह इस पद पर बने रहेंगे। 70 से ज़्यादा उम्र के रिटायर्ड जज ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को पत्र लिखकर 2 नवंबर से ट्रिब्यूनल के प्रमुख का पद छोड़ने की पेशकश की है।

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चटर्जी ने कहा कि उनके घर और ट्रिब्यूनल ऑफ़िस के बीच की दूरी, साथ ही सड़कों की खराब हालत और ट्रैफ़िक जाम की वजह से रोज़ाना आना-जाना मुश्किल हो गया था। उन्होंने बताया मैंने पत्र में साल्ट लेक स्थित अपने घर से दक्षिण 24 परगना ज़िले के जोका में स्थित ट्रिब्यूनल तक की 27 किलोमीटर से ज़्यादा की लंबी दूरी, खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम का ज़िक्र किया है। उन्होंने कहा कि हालांकि एक तरफ की दूरी 27 किलोमीटर से ज़्यादा है, लेकिन रोज़ाना आने-जाने में 60 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र करना पड़ता है। चटर्जी ने एक वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है, जिससे उन्हें रोज़ाना इतनी लंबी यात्रा किए बिना ट्रिब्यूनल के प्रमुख के तौर पर काम जारी रखने में मदद मिल सके।

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उन्होंने कहा मैंने घर से या अपने घर के 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में किसी ऑफिस से काम करने का विकल्प मांगा है। रिटायर्ड जज ने पिछले हफ़्ते चीफ़ जस्टिस को ईमेल और स्पीड पोस्ट से चिट्ठी भेजी थी। उन्होंने तीन हफ़्ते के अंदर जवाब देने का अनुरोध किया है। चटर्जी अभी मुर्शिदाबाद ज़िले के लिए SIR ट्रिब्यूनल के प्रमुख हैं। ज़िले में कथित तार्किक विसंगतियों के कारण 4.5 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए थे, और ट्रिब्यूनल वोटर लिस्ट से जुड़ी अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। ये ट्रिब्यूनल चुनाव आयोग की उस प्रक्रिया के तहत बनाए गए थे, जिसमें पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (विशेष गहन संशोधन) के दौरान लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी अपीलों पर सुनवाई की जानी थी। चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में ऐसे 19 ट्रिब्यूनल बनाए थे।

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